'वक्फ बोर्ड में 1000 करोड़ का घोटाला', जितेंद्र नारायण सिंह सेंगर का आरोप
Lucknow News In Hindi: पूर्व शिया वक्फ बोर्ड चेयरमैन जितेंद्र नारायण सिंह सेंगर (वसीम रिजवी) ने यूपी में वक्फ संपत्तियों में करीब हजार करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया है. कब्र बेचने का भी आरोप है.

उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड को लेकर पूर्व चेयरमैन जितेंद्र नारायण सिंह सेंगर (सैयद वसीम रिजवी) ने गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने वक्फ संपत्तियों में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताओं, अवैध बिक्री और संपत्तियों के रिकॉर्ड में हेरफेर का दावा किया है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
जितेंद्र नारायण सिंह सेंगर ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में शिया वक्फ बोर्ड से जुड़ी संपत्तियों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं. उनका दावा है कि लखनऊ, मेरठ, प्रयागराज, अलीगढ़ और झांसी समेत कई शहरों में करोड़ों रुपये की बहुमूल्य संपत्तियां कथित तौर पर मुतवल्लियों के जरिए बेची गईं. उन्होंने करीब एक हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया है. इसके साथ ही दावा किया कि कुछ वक्फ संपत्तियों को कथित तौर पर पैसे लेकर रिकॉर्ड से हटाया गया.
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‘हिंदुओं की संपत्तियों को भी वक्फ में दर्ज किया गया’
सेंगर ने आरोप लगाया कि कुछ हिंदू संपत्तियों को भी वक्फ के तौर पर दर्ज कर दिया गया और इस तरह वक्फ संपत्तियों की संख्या में कथित रूप से हजारों की बढ़ोतरी हुई. उन्होंने करीब ढाई हजार अतिरिक्त वक्फ दर्ज किए जाने का दावा किया. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और रिकॉर्ड में संपत्तियों को दर्ज करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की जानी चाहिए.
कब्रों की बिक्री का भी लगाया आरोप
पूर्व चेयरमैन ने वक्फ से जुड़े कब्रिस्तानों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए. उनका दावा है कि कुछ स्थानों पर कब्रों को कथित तौर पर लाखों रुपये में बेचा जा रहा है. उन्होंने एक कब्र के लिए 10 लाख रुपये तक लिए जाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि धार्मिक और वक्फ संपत्तियों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है और किसी भी तरह की अवैध वसूली की जांच होनी चाहिए.
दरगाहों में चंदे को लेकर भी सवाल
सेंगर ने लखनऊ की हजरत अब्बास दरगाह, आगरा के मजार शहीद-ए-सालिस और बिजनौर की जोगीपुरा दरगाह समेत कुछ प्रमुख धार्मिक स्थलों पर चंदे के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि चंदे की रकम में कथित तौर पर वक्फ बोर्ड से जुड़े लोगों और एक बड़े मौलाना के बीच बंदरबांट होती है. उन्होंने पूरे मामले की जांच और वित्तीय रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने की मांग की.
सेंगर ने यह भी सवाल उठाया कि साल 1995 के बाद उत्तर प्रदेश में शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों के गठन और संचालन से जुड़े नियमों का पालन किस तरह किया गया. उन्होंने अलग-अलग बोर्ड बनाए जाने को लेकर भी सवाल उठाते हुए सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया.
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