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यूपी की सियासत के 'बादशाह' का राजनीति से संन्यास, मायावती की सरकार में रहे थे कैबिनेट मंत्री

UP Politics: चार बार के विधायक और हमीरपुर-महोबा की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले बादशाह सिंह ने सियासी गंदगी को संन्यास की वजह बताया है. संन्यास की खबर ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है.

बुंदेलखंड की राजनीति के दिग्गज स्तंभ और बहुजन समाज पार्टी की सरकार में कद्दावर कैबिनेट मंत्री रहे कुंवर बादशाह सिंह ने सक्रिय राजनीति को अलविदा कह दिया है. शनिवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपने संन्यास की घोषणा की. कुंवर बादशाह सिंह के ऐलान ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है.

बादशाह सिंह का यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब वे समाजवादी पार्टी में बेहद सक्रिय थे. हाल ही में संपन्न हुए 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने उन्हें हमीरपुर-महोबा सीट जिताने की अहम जिम्मेदारी सौंपी थी. बादशाह सिंह ने अपनी रणनीति के दम पर अजेंद्र सिंह लोधी को सांसद बनवाने में बड़ी भूमिका निभाई, लेकिन इस सफलता के कुछ समय बाद ही उनके संन्यास के फैसले ने समर्थकों को चौंका दिया है.

पूर्व मंत्री ने क्यों लिया राजनीति से संन्यास?

वायरल वीडियो में कुंवर बादशाह सिंह ने भावुक और कड़े लहजे में कहा कि वर्तमान समय में राजनीति में बहुत ज्यादा गंदगी आ गई है. उन्होंने कहा, एक दौर था जब राजनीति समाजसेवा का सबसे बड़ा मंच हुआ करती थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. इसी ऊब के कारण मैंने पीछे हटने का फैसला किया है.

कद्दावर मंत्री के रूप में बादशाह ने प्रदेश में जमाई धाक

बताते चलें कि महोबा जिले के खरेला निवासी बादशाह सिंह के राजनीतिक सफर की शुरुआत बेहद जमीनी रही है. साल 1989 में महोबा की खरेला नगर पंचायत के चेयरमैन बनकर पहली बार सत्ता के गलियारे में कदम रखा. 1991 हमीरपुर की मौदहा सीट से पहली बार विधायक चुने गए. वह मौदहा सीट से कुल चार बार विधायक रहे. बसपा शासनकाल के दौरान उन्होंने प्रदेश के कद्दावर मंत्री के रूप में अपनी धाक जमाई.

बीजेपी-कांग्रेस और बसपा-सपा का रहे हैं हिस्सा

वह अपने करियर में  भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), कांग्रेस और अंत में समाजवादी पार्टी का हिस्सा रहे. 2012 के चुनाव से ठीक पहले उन्होंने बसपा छोड़ी और भाजपा में शामिल हुए. 2016 में भाजपा से इस्तीफा देकर वह कांग्रेस में आए, जहां उनके साथ पत्नी रत्ना सिंह और समर्थकों ने भी सदस्यता ली थी. 

महोबा और हमीरपुर में रहा है अलग प्रभाव

इसके बाद साल 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने साइकिल की सवारी की और सपा में शामिल होकर संगठन को मजबूती दी. महोबा और हमीरपुर जिले की राजनीति में बादशाह सिंह का एक अलग प्रभाव रहा है. वर्तमान में उन्हें हमीरपुर सदर सीट से टिकट का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन उनके इस स्वैच्छिक संन्यास ने बुंदेलखंड के सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है.

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