वोटर लिस्ट है या मजाक? यूपी में चार कमरे के इस मकान में चार हजार से ज्यादा मतदाता!
UP News: देश भर में विपक्ष द्वारा मतदाता सूची को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच यूपी स्थित महोबा में एक ऐसे घर की कहानी सामने आई है जहां मकान चार कमरे का है और वोटर- 4,271.

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2026 में पंचायत चुनाव प्रस्तावित है. इस बीच मतदाता सूची के पनुरीक्षण का काम जोरों पर हैं. पूरे राज्य में राज्य निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया को अंजाम दे रहा है. इस बीच महोबा जिले में पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियों के मतदाता पुनरीक्षण में एक बार फिर बड़ी खामी सामने आई है. जहां मतदाता सूची इस समय सबसे बड़ा मजाक बन गई है. गड़बड़ी का आलम यह है कि एक साधारण मकान में 4,271 मतदाता दर्ज होने से लोग हैरत में है. मतदाता सूची में ऐसी गड़बड़ी देख हर कोई हैरत में है जबकि अधिकारी इसे मामूली त्रुटि बता रहे हैं.
पंचायत चुनाव को लेकर मतदाता पुनरीक्षण में इतना बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है. कुलपहाड़ तहसील के जैतपुर ग्राम पंचायत का मकान नंबर 803 तो सुर्खियों का केंद्र बना हुआ है. यहां के वार्ड नंबर तीन जुगयाना में चार कमरों वाले मकान की मुख्या उजिया की 10 वर्ष पूर्व मृत्यु हो चुकी फिर भी मतदाता सूची में उसका नाम दर्ज है. मगर ताज्जुब है कि मतदाता सूची के क्रमांक 2,251 के मकान नंबर 803 जिसमें मृतक उजिया और उसके परिजनों के नाम दर्ज हैं.
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दस साल पहले हो गई थी मौत और अभी भी लिस्ट में नाम
इसी नंबर में 4,271 लोग कागजों में इस घर के स्थायी निवासी बना दिए गए हैं. लोग इसको लेकर विभागीय जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर रहे है. उजिया की पुत्री मज्जो का कहना है कि उनकी मां उजिया की 10 वर्ष पूर्व मौत हो गई उनका भी नाम वोटर लिस्ट में है जबकि उनके घर के सिर्फ 10 मतदाता है मगर ये हजारों की संख्या कैसे हुई पता नहीं है.
रशीद बताते हैं कि ये जानकार हम लोग भी हैरान और परेशान है. पड़ोस में रहने वाले एहसान ने भी इस मामले को लेकर सवाल खड़े किए और कहा कि इस मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए कि इतने सारे लोग कैसे एक ही मकान नंबर पर दर्ज हो गए है. जबकि इतनी मतदाता संख्या तो वार्ड की नहीं है. बताया जाता है कि जिनके नाम एक ही नंबर पर दर्ज है वो सब इसी गांव के रहने वाले अन्य वार्ड के निवासी है.
इस मामले को लेकर एडीएम कुंवर पंकज का कुछ और ही कहना है. उनकी मानें तो स्थायी मकान नंबर न होने के कारण यह त्रुटि हुई हैं. बीएलओ ने एक ही नंबर पर कई परिवारों के नाम दर्ज कर दिए, लेकिन दर्ज मतदाता उसी गांव के ही हैं. इसलिए मतदाता पुनरीक्षण के जरिए इसमें सुधार किए जाएंगे. अब सुधार प्रक्रिया के तहत मकान नंबरों को विभाजित कर त्रुटियों को ठीक किया जाएगा.
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Source: IOCL






















