Kanpur Dehat News: उफ्फ ये पेट की आग! सरकारी राशन पाने के लिए सालों से मौत का दरिया पार करने को मजबूर ग्रामीण
Kanpur News: कानपुर में मुफ्त सरकारी राशन पाने के लिए सैकड़ों लोगों को अपनी जान दांव पर लगानी पड़ती है. ये लोग राशन के लिए उफनती नदी को पार कर जाते हैं जरा की चूक इनकी जिन्दगी पर भारी पड़ सकती है.

Kanpur News: प्रदेश सरकार मुफ्त राशन योजना (Free Ration Scheme) और तमाम सुविधाओं को लेकर तमाम तरह के दावे करती है, लेकिन हकीकत इन दावों से कोसो दूर नजर आती है. चुनावों में मुफ्त राशन का जमकर बखान किया गया लेकिन इसे पाना कानपुर देहात (Kanpur Dehat) के एक गांव के लोगों को इसे पाने के लिए अपनी जान दांव पर लगानी पड़ती है. ये सुनकर आप भले ही हैरान हों लेकिन ये सच है. इस गांव की आबादी 1200 की है. यहां रहने वाले लोगों को सरकारी राशन लेने के लिए हर बार उफनती नदी को तैरकर पार करना पड़ा है.
जान जोखिम में डालने को मजबूर लोग
इस दुनिया में सबसे बुरी आग पेट की आग होती है. इसी आग को बुझाने के लिए भोगनीपुर तहसील के भरतौली गांव के लोग अपनी जान दांव पर लगाने को मजबूर हैं. सरकारी राशन पाने के लिए यहां के लोगों को मौत का दरिया पार करना पड़ता है. जरा सी चूक कभी भी इनकी जिंदगी को निगल सकती है. लेकिन जनपद के अधिकारियों को तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता और न ही उन्हें गांववालों की बेबसी दिखाई देती है. सैकड़ों की तादाद में यहां के लोग हाथों में प्लास्टिक का झोला, सरकारी राशन कार्ड और प्लास्टिक का टब लेकर उफनती नदी की धारा में इसलिए उतर जाते हैं ताकि उन्हें मुट्ठी भर सरकारी अनाज मिल सके.
सरकारी राशन के लिए पार करते हैं उफनती नदी
इस गांव की महिलाएं हों या पुरुष ये सभी लोग सरकारी राशन के लिए इस नदी को ही पार करके जाते हैं. कई महिलाएं तैर कर तो कई ऐसी महिलाएं भी है जो गाड़ी के ड्यूब में हवा भरकर उसके सहारे नदी को पार करती हैं. नदी पार से राशन लेने के बाद ये लोग सिर पर टब और उसमें राशन रखकर लाते हैं. मुफ्त राशन की बेबसी में कई महिलाओं ने तैरना भी सीख लिया है.
जानिए क्या है इसकी असल वजह
इस गांव के लोगों की मानें तो इस मजरे को मिलाकर यहां 4 और मजरे भी है जिनका ग्राम प्रधान क्षेत्र एक ही है. गांव में राशन की दुकान भी एक है लेकिन इन 5 मजरों को कानपुर देहात की सिंगूर नदी 3 और 2 मजरों में बांट देती है. जिसकी वजह से सरकारी राशन की दुकान दूसरी पार 3 मजरों वाले गांव में बनी है. इसलिए बाकी इस तरह के 2 मजरों के लोगों को नदी पार करके राशन लेना पड़ता है. यहां के लोगों ने कई बार अधिकारियों से इसकी शिकायत भी कि उनके लिए अलग से राशन की दुकान खोल दी जाए या उनके गांव में ही राशन की व्यवस्था हो लेकिन कोई असर नहीं हुआ.
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लोगों की समस्याओं पर कब होगा काम
सवाल उठता है कि जिस जनपद से प्रदेश सरकार में तीन मंत्री हो वहां के गांव पर सरकार की नजर क्यों नहीं पड़ती. इन नदी पर कोई स्थाई या अस्थाई पुल की व्यवस्था भी नहीं है. इस गांव में करीब 300 राशन कार्ड हैं. लेकिन मुफ्त की ऐसी राशन व्यवस्था अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाती है. इस मामले पर डीएम ने अब संज्ञान में ले लिया है. उन्होंने कहा कि जल्द ही यहां एक और राशन की दुकान खुलवाने पर विचार किया जाएगा. इसके साथ ही नदी पर पुल बनाने के लिए भी सरकार से बात की जाएगी.
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Source: IOCL





















