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UP Election 2022 : स्वामी प्रसाद मौर्य की बगावत के बाद आसान नहीं होगी उनकी सांसद बेटी की बीजेपी में राह, क्या है संघमित्रा मौर्य की राय

UP Election 2022 : स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे उत्कृष्ट और संघमित्रा मौर्य भी राजनीति में हैं. बेटा जहां दो बार विधानसभा का चुनाव हार चुका है, वहीं बेटी 2019 में बीजेपी के टिकट पर सांसद चुनी गई थीं.

स्वामी प्रसाद मौर्य बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो चुके हैं. वो बसपा छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे. मौर्य 2017 के चुनाव में बीजेपी के टिकट पर जीते थे. उन्हें योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री बनाया गया था. बीजेपी ने उनकी बेटी को संघमित्रा मौर्य को 2019 के लोकसभा चुनाव में बदायूं से टिकट दिया था. वो वहां से चुनाव जीती भी थीं. लेकिन पिता के बीजेपी छोड़ने के बाद बेटी के राजनीतिक करिअर पर सवाल उठाए जा रहे हैं. 

राजनीति में कब आई थीं संघमित्रा मौर्य

योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल से बीते हफ्ते 3 मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया था. स्वामी प्रसाद मौर्य इस्तीफा देने वाले पहले मंत्री थे. बाद में वो अपने बेटे उत्कृष्ट मौर्य के साथ सपा में शामिल हो गए थे. इस अवसर पर उन्होंने बीजेपी को सत्ता से उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया था. पिता और भाई के पार्टी छोड़ने के बाद उम्मीद की जा रही है कि संघमित्रा मौर्य को राजनीतिक परेशानी उठानी पड़ेंगी, जिन्होंने अभी बीजेपी में ही रहने का फैसला किया है. 

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बौद्ध धर्म के अनुयायी स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपनी बेटी का नाम सम्राट असोक की बेटी संघमित्रा के नाम पर रखा है. संघमित्रा मौर्य ने एमबीबीएस की पढ़ाई की है. अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए संघमित्रा भी राजनीति में शामिल हो गई थीं. उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी बहुजन समाज पार्टी के साथ शुरू की थी. उनके पिता और भाई भी पहले बसपा में ही थे. बसपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में संघमित्रा को मैनपुरी से टिकट दिया था. इसी सीट से सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव चुनाव लड़ रहे थे. उन्होंने संघमित्रा को हरा दिया था. 

संघमित्रा ने 2019 के चुनाव में किसे हराया था

स्वामी प्रसाद मौर्य 2017 के चुनाव से पहले 2016 में बीजेपी में शामिल हो गए. इसके बाद संघमित्रा और उत्कृष्ट भी बसपा छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के बदायूं से टिकट दिया. यह सपा का परंपरागत इलाका है. संघमित्रा ने 2019 के चुनाव में अखिलेश यादव के चेचेरे भाई धर्मेंद्र यादव का हराया था. 

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संघमित्रा मौर्य संसद के मानसून सत्र में जातिय जनगणना की मांग उठाकर चर्चा में आ गई थीं. इससे बीजेपी को थोड़ा असहज होना पड़ा था. अब जब पिता और भाई ने बीजेपी छोड़ दिया है तो संघमित्रा को लगता है कि उनका आगे का रास्ता थोड़ा कठिन है. उन्हें लगता है कि पार्टी में निशाना बनाया जाएगा. हालांकि उन्होंने कहा है कि वो बीजेपी सांसद के रूप में अपने दायित्वों का निर्वाह करेंगी. 'इंडियन एक्सप्रेस' से उन्होंने कहा कि आपको हर जगह मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. लेकिन मुझे पता है कि उनका सामना कैसे करना है. मैं जानती हूं कि संघर्ष कैसे किया जाता है. 

संघमित्रा मौर्य ने 3 दिन पहले फेसबुक पर लिखा था, ''पिता और बेटी का रिश्ता दुनिया का सबसे मजबूत रिश्ता है. मैं देश के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी जी के मुझे बेटी के रूप में मेरे पिता से मांगे हुए वचन से बंधी हुई हूँ. सोशल मीडिया पर जब अशोभनीय शब्द पड़ती हूँ, तब ऐसा नहीं है जबाब नहीं दे सकती ,ऐसा भी नहीं है फैसला नहीं ले सकती,लेकिन तभी आदरणीय प्रधानमंत्री जी के द्वारा पिताजी से बोले गए शब्द कि मौर्य जी "ये बेटी अब हमारी बेटी है ये बेटी हमने ले ली"गूँज जाते हैं.'' उन्होंने लिखा कि सांसद बनने से पहले मैं सामाजिक कार्यों में व्यस्त रहती थी, सांसद बनने के बाद अपनी जिम्मेदारियों का संसद में निर्वाहन कर रही हूं और आगे भी करती रहूंगी. आपके हक के लिए लड़ने में कही पीछे नही रहूंगी. मेरे पिता मेरे अभिमान हैं ,मेरे हीरो हैं. पार्टी अलग हो सकती है लेकिन पिता-पुत्री नहीं. इसके साथ ही उन्होंने 'जय भाजपा,तय भाजपा' का नारा भी लगाया था.

भाई उत्कृष्ट का क्या होगा भविष्य

स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे उत्कृष्ट मौर्य रायबरेली की ऊंचाहार सीट से दो बार चुनाव हार चुके हैं. दोनों ही बार उन्हें सपा के उम्मीदवार के हाथों हार का सामना करना पड़ा. अब पिता के सपा में जाने के बाद उम्मीद की जा रही है कि पार्टी उत्कृष्ट को विधानसभा चुनाव का टिकट दे सकती है. संघमित्रा कहती हैं, '' अब यह पार्टी नेतृत्व पर निर्भर है कि वह उन्हें टिकट देती है या नहीं. अगर उन्हें टिकट नहीं भी मिलता है तो भी वो पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करते रहेंगे. मैं उन्हें राजनीतिक रूप से समर्थन नहीं कर पाउंगी, लेकिन एक बहन के रूप मैं उनका समर्थन करुंगी.'' वो कहती है कि पार्टी अलग है, पार्टी की बात पार्टी में और परिवार अपनी जगह. 

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