अखिलेश यादव ने बजट को बताया 'भाजपाई BUDGET', बोले- न जनता का जिक्र न उनकी फिक्र
Union Budget 2026: अखिलेश यादव ने कहा कि बजट में अमीरों के काम-कारोबार और घूमने-फिरने पर दस तरह की छूटें दी गईं हैं लेकिन बेकारी-बेरोज़गारी से जूझ रहे लोगों की उम्मीदों की थाली, खाली है.

देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार (1 फरवरी) को केंद्रीय बजट पेश किया. इस आम बजट को लेकर विपक्ष ने निशाना साधना शुरू कर दिया है. इस बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है.
उन्होंने केंद्रीय बजट को 'भाजपाई बजट' करार दे दिया है. अखिलेश यादव ने आगे कहा कि इसमें न जनता की जिक्र है न उनकी फिक्र है. इसके साथ ही सपा चीफ ने बजट के प्रमुख बिंदुओं को लेकर बीजेपी सरकार को घेरा है.
अखिलश यादव ने सोशल मीडिया पर दी प्रतिक्रिया
सपा चीफ अखिलेश यादव ने अपने 'एक्स' अकाउंट से पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि हमने तो पहले ही कहा था सवाल ये नहीं है कि शेयर बाजार रविवार को खुलेगा, सवाल ये है कि और कितना गिरेगा. उन्होंने आगे लिखा कि जब भाजपा सरकार से कोई उम्मीद नहीं है, तो उसके बजट से क्या होगी.
आ गया भाजपाई बजट का परिणाम, शेयर मार्केट हुआ धड़ाम।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) February 1, 2026
हमने तो पहले ही कहा था :
- सवाल ये नहीं है कि शेयर बाज़ार रविवार को खुलेगा, सवाल ये है कि और कितना गिरेगा।
- जब भाजपा सरकार से कोई उम्मीद नहीं है, तो उसके बजट से क्या होगी।
- हम तो भाजपा के हर बजट को 1/20 (एक बँटे बीस) का बजट… pic.twitter.com/AGnZPltCgS
हम तो भाजपा के हर बजट को 1/20 (एक बंटे बीस) का बजट मानते हैं क्योंकि वो 5% लोगों के लिए होता है. अखिलेश यादव ने लिखा कि भाजपा का बजट, अपने कमीशन और अपने लोगों को सेट करने का बजट होता है. भाजपा का बजट, भाजपाई भ्रष्टाचार की अदृश्य खाता-बही होता है.
2026 के बजट को लेकर क्या कहा?
अखिलेश यादव ने साल 2026 के बजट को लेकर लिखा, "इस बजट में न आम जनता का जिक्र है न फिक्र. महंगाई बेतहाशा बढ़ने पर भी इस बजट में जनता को टैक्स में छूट न देना, ‘टैक्स-शोषण’ है."
उन्होंने आगे कहा कि अमीरों के काम-कारोबार और घूमने-फिरने पर दस तरह की छूटें दी गईं हैं, लेकिन बेकारी-बेरोजगारी से जूझ रहे लोगों की उम्मीदों की थाली, खाली है. मध्यम वर्ग अपने को ठगा महसूस कर रहा है.
बजट के गरीबों के लिए कुछ न होने पर भड़के सपा चीफ
अखिलेश यादव ने आगे लिखा कि शोषित, वंचित, गरीब व्यक्ति जहां था, उससे भी नीचे जाता दिख रहा है. इस बजट ने उसके चादर में पैबंद लगाने की जगह, उसे और चिथड़ा कर दिया है क्योंकि सामाजिक सुरक्षा शाब्दिक औपचारिकता तक सीमित होकर रह गयी है.
उन्होंने लिखा कि किसान, मजदूर, श्रमिक, कारोबारी, छोटा दुकानदार अपने लिए मिली राहत को दूरबीन लेकर भी ढूंढ नहीं पा रहा है. सपा चीफ अखिलेश यादव ने आखिर में इस बजट को 'निराशाजनक, निंदनीय बजट' बताया है.
























