सर्विलांस, स्वच्छता और सुंदरता: स्मार्ट सिटी की रेस में वाराणसी और लखनऊ ने तय किया आधुनिकता का सफर
Smart Cities News: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत लखनऊ और वाराणसी में बुनियादी ढांचे का विकास हुआ है. वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, कमांड सेंटर और घाटों का पुनरुद्धार हुआ है.

UP Smart Cities: देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ सालों में बुनियादी ढांचे और शहरी सुविधाओं के मामले में बड़ी छलांग लगाई है. केंद्र सरकार के महत्वकांक्षी 'स्मार्ट सिटी मिशन' के तहत राज्य की राजधानी लखनऊ और दुनिया के सबसे पुराने जीवित शहरों में से एक वाराणसी (काशी) ने विकास की नई इबारत लिखी है. ये बदलाव न केवल इन शहरों में आधुनिकता को बढ़ा रहे हैं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन को भी सुगम बना रहे हैं.
वाराणसी: आध्यात्मिकता के साथ आधुनिकता का संगम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सांसद बनने के बाद वाराणसी में विकास कार्य युद्धस्तर पर हुए हैं. स्मार्ट सिटी मिशन के तहत यहां सबसे बड़ा बदलाव काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के रूप में देखा गया, जिसने शहर के धार्मिक पर्यटन को पूरी तरह बदल दिया है.
कमांड एंड कंट्रोल सेंटर: वाराणसी में 'काशी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर' (KICCC) की स्थापना की गई है. यह शहर की सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं के लिए एक मस्तिष्क की तरह काम करता है.
घाटों का पुनरुद्धार: गंगा के घाटों को साफ-सुथरा और सुंदर बनाया गया है. पर्यटकों की सुविधा के लिए सीएनजी (CNG) नौकाओं का संचालन शुरू किया गया है, जिससे प्रदूषण बेहद कम हुआ है.
स्मार्ट मोबिलिटी: शहर की संकरी गलियों में भीड़ कम करने के लिए ई-रिक्शा और स्मार्ट पार्किंग की व्यवस्था की गई है. इसके अलावा दुनिया का तीसरा और भारत का पहला अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे (Ropeway) जल्द ही कैंट स्टेशन से गोदौलिया तक शुरू होने जा रहा है, जो पर्यटकों के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा.

लखनऊ: विरासत और तकनीक का बेहतरीन तालमेल
नवाबों के शहर और राजधानी लखनऊ ने अपनी ऐतिहासिक विरासत को संजोते हुए स्मार्ट सिटी की दौड़ में अपनी अलग पहचान बनाई है.
स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट: लखनऊ में 'इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' (ITMS) लागू किया गया है. चौराहों पर लगे स्मार्ट कैमरे न केवल ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नजर रखते हैं, बल्कि ट्रैफिक के दबाव के अनुसार सिग्नल की टाइमिंग भी बदलते हैं.
स्वच्छता और वेस्ट मैनेजमेंट: कूड़ा निस्तारण के लिए अंडरग्राउंड डस्टबिन और जीपीएस-सक्षम कचरा उठाने वाले वाहनों का उपयोग किया जा रहा है. गोमती रिवरफ्रंट का विकास शहर को एक नया 'रिक्रिएशनल हब' प्रदान करता है.
हेल्थ एटीएम: स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लखनऊ के विभिन्न पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर 'हेल्थ एटीएम' लगाए गए हैं, जहां लोग बहुत कम शुल्क में अपनी बुनियादी स्वास्थ्य जांच कर सकते हैं.
स्मार्ट बन रहीं राज्य की 57 नगर पालिकाएं
बता दें कि राज्य में 17 स्मार्ट शहर बनाए गए हैं, उसी अनुरूप जिला मुख्यालयों में स्थित 57 नगर पालिकाओं को स्मार्ट नगर पालिकाओं के तौर पर विकसित किया जा रहा है. परियोजना के लिए लगभग 40,000 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है. नगर विकास विभाग सीएम योगी के विजन 'ईज ऑफ लिविंग' के मूल मंत्र के मुताबिक नगरीय क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं का तीव्र गति से विकास कर रहा है.

चुनौतियां और भविष्य की राह
हालांकि, विकास की इस रफ्तार के बीच कुछ चुनौतियां भी हैं. सीवरेज सिस्टम का पूरा आधुनिकीकरण और बारिश के दौरान जलभराव जैसी समस्याओं पर अभी और काम होना बाकी है, लेकिन जिस तरह से वाराणसी में बिजली के तारों को भूमिगत (underground cabling) किया गया और लखनऊ में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन बढ़ा है, वह एक सकारात्मक संकेत है.
वाराणसी और लखनऊ का कायाकल्प केवल ईंट-पत्थर का विकास नहीं है, बल्कि यह 'न्यू इंडिया' के विजन को दर्शाता है. जहां एक तरफ काशी अपनी पुरानी आत्मा को बचाए हुए आधुनिक हो रही है, वहीं लखनऊ स्मार्ट तकनीकों के साथ नजाकत और तहजीब को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है.
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Source: IOCL
























