साइबेरियन मेहमानों ने काशी के घाटों की रौनक बढ़ाई, गंगा किनारे उमड़ी पर्यटकों की भीड़
Varanasi News: गंगा घाट के स्थानीय लोगों की माने तो नवंबर दिसंबर के महीने में साइबेरियन पक्षी हजारों किलोमीटर दूर से वाराणसी के गंगा घाट पहुंचते हैं. तीन से चार महीने तक उनका काशी में डेरा रहता है.

उत्तर प्रदेश के बनारस में घूमने के लिए वैसे तो हर वर्ष लाखों की संख्या में पर्यटक दुनिया के कोने-कोने से पहुंचते हैं. लेकिन ठंड की दस्तक के बाद कुछ ऐसे खास मेहमान भी इस प्राचीन शहर में भ्रमण करने के पहुंचते है जिनका हर साल बेसब्री से इंतजार रहता है. जी हां हजारों किलोमीटर दूर से हवाओं में सैर करते हुए साइबेरियन पक्षी काशी के गंगा घाटों पर पहुंच चुके हैं.
ठंड की शुरुआत के साथ ही ये विदेशी पक्षी गंगा में अपना डेरा जमा लेते हैं,और इनकी गंगा में अठखेलियां हर किसी को लुभाती हैं. पर्यवारंविद भी मानते हैं कि इससे इलाके में जल जीवन अभी बेहतर है.
ठंड के दिनों में काशी पहुंचते हैं साइबेरियन पक्षी
गंगा घाट के स्थानीय लोगों की माने तो नवंबर दिसंबर के महीने में साइबेरियन पक्षी हजारों किलोमीटर दूर से वाराणसी के गंगा घाट पहुंचते हैं. करीब तीन से चार महीने तक उनका काशी में डेरा रहता है. इस दौरान काशी पहुंचने वाले पर्यटक नौका विहार के दौरान उन्हें देखकर बेहद उत्साहित होते हैं. काफ़ी खूबसूरत दिखने वाले इन पक्षियों के साथ पर्यटक तस्वीर लेना और उन्हें दाना खिलाना पसंद करते हैं. काशी का यह मौसम भी उन्हें रास आता है. करीब नवंबर दिसंबर में वह वाराणसी आते हैं और फरवरी के बाद वह काशी से लौट जाते है.
गंगा में रहता है इनका डेरा
गंगा नदी में चल रही नाव के बीच इनकी उड़ान काशी की खूबसूरती को और निखारने वाली होती है. खासतौर पर सुबह और शाम के वक्त लोग नौका विहार के दौरान इन्हें देखना पसंद करते हैं. बीते वर्षों से काशी पहुंचने वाले देश दुनिया के लाखों पर्यटक साइबेरियन पक्षी के साथ नौका विहार करना काफी पसंद करते है. निश्चित ही इस बार साइबेरियन पक्षी की काशी में दस्तक ने घाटों की चहल-पहल रौनक को और बढ़ा दिया है.
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Source: IOCL


























