शंकराचार्य के मठ में रहीं भूमिका द्विवेदी का दावा- सखी के साथ सोते हैं अविमुक्तेश्वरानंद...
Swami Avimukteshwaranand: लेखिका भूमिका द्विवेदी ने आरोप लगाया कि शंकराचार्य के मठ में कई सीक्रेट जगहें थी, जहां जाने की मनाही है. आश्रम में रहने वाले बच्चों को बात नहीं करने दिया जाता था.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर आश्रम में रही लेखिका भूमिका द्विवेदी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि उनके आश्रम का माहौल पवित्र नहीं है. उनके मठ में कई सीक्रेट कमरे में है, जहां किसी के भी जाने की मनाही है. मठ में बच्चों को अभिभावकों से बात नहीं करने दिया जाता है. वहां की एक मालकिन है जो खुद को शंकराचार्य की सखी बताती है. शंकराचार्य उनके साथ सोते हैं.
लेखिका भूमिका द्विवेदी का कहना है कि वो साल 2000 में इस आश्रम में दो महीने तक रही थीं. एबीपी न्यूज से ख़ास बातचीत में लेखिका ने दावा किया कि उनका शंकराचार्य जी की कुर्सी से 70 साल पुराना नाता है. इनके गुरु स्वरूपानंद जी मेरी दादा के अच्छे मित्र थे. हम शंकराचार्य का बहुत मान करते हैं.
शंकराचार्य के मठ में कई सीक्रेट कमरे
भूमिका द्विवेदी ने कहा कि शंकराचार्य के आश्रम में ये सब लोग ऐश में रहते हैं. 10 बजे उठते हैं वहां पूजा-पाठ का कोई माहौल नहीं है. मठ में एक मालकिन है जो 12 बजे दर्शन देती हैं और उनका कोई कठोर जीवनचर्या नहीं है. उन्होंने दावा किया उनसे कठिन दिनचर्या तो हम करते हैं. उनके कमरे में बड़ा बाथरूम है, मैंने सुना है कि वहां बड़े-बड़े बाथटब हैं.
उन्होंने कहा कि मेरा शंकराचार्य जी से कोई मनमुटाव नहीं. उनके गुरु के प्रिय शिष्यों में भी ये शंकराचार्य जी नहीं है. मैं अविमुक्तेश्वरानंद जी से कभी मिली ही नहीं, जब वो आते थे तो पूरा मठ खाली करा दिया जाता था. मैंने इन्हें कभी सामने से कभी नहीं देखा. कभी फोन पर भी बात नहीं हुई. मठ में कुछ ऐसी जगहे हैं जहां ये सीक्रेट तरीके से आराम करते हैं.
मठ में सबसे ऊपरी मंजिल पर स्विमिंग पूल
लेखिका ने दावा किया कि मठ में पूरी बिल्डिंग संगमरमर से बनी हुई हैं. उसमें कई फ्लोर हैं, जहां सबसे ऊपर स्विमिंग पूल बना हुआ है. वहां लिफ्ट लगी हुई है. कुछ हिस्से सीक्रेट हैं. जहां सब लोग नहीं जा सकते हैं. वहां पर सबकुछ अजब सा माहौल रहता है. पहले फ्लोर पर ऑफिशियल है. दूसरे फ्लोर पर खाने का है. तीसरी मंजिल पर सब लोगों की रिहाइशी है.
उन्होंने दावा किया कि अविमुक्तेश्वरानंद ने कई कोठियां अपनी बहनों को दी हैं. बनारस के लोग बताते हैं हालांकि मेरे पास इसका प्रूफ नहीं है. शकंराचार्य मालकिन के यहां जाकर सोते थे ऐसा लोग कहते हैं. वहां करीब 20 बच्चे रहते थे. जो बच्चे वहां रहते हैं उनके अभिभावकों से भी बच्चों की बातचीत की इजाज़त नहीं था. एडमिशन के समय 50-60 बच्चे आए होंगे जिनमें से 20 को एडमिशन मिला. उनके वाहन सिर्फ लड़के रहते थे कोई एक भी लड़की नहीं.
मठ में अथाह खजाने का भंडार होने का दावा
भूमिका द्विवेदी ने कहा कि मैं उनके आश्रम में एक किताब लिखने के लिए रुकी थी. जब शंकराचार्य आश्रम आते हैं तो सिर्फ बच्चे, वो महिला और मैनेजर होते हैं बाक़ी सब को हटा दिया जाता है. आश्रम के ठीक सामने एक बिल्डिंग है जो गेस्ट हाउस है. वो सील बंद है एकदम होटल जैसा. मैं आज ये सारे बयान नहीं बोल रही, मुझसे आज मीडिया द्वारा ये सब पूछा जा रहा है.
मठ के अंदर अथाह खजाना है, वहां पर रत्न और तमाम भंडार हैं. लेखिका ने सवाल किया कि मठ में सबसे ऊंचे फ्लोर पर अंदर की सीढ़ियों पर क्यों नहीं जाने दिया जाता? अविमुक्तेश्वरानंद एक लग्जरी बस में चलते हैं. उनके पास अपनी वैनिटी वैन हैं, जिसमें सारी सुविधाएं हैं. इस वैनिटी वैन में ही वो रहते हैं. ये बस उनके लिए ख़ासतौर से डिज़ाइन की गई है.
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Source: IOCL



























