संजय निषाद ने एकजुट होने का किया आह्वान, कहा- 'बरसाती मेंढकों से सावधान'
संजय निषाद ने सपा पर अप्रत्यक्ष तौर पर निशाना साधते हुए उसके नेताओं को बरसाती मेंढक का टैग दे डाला है, जो चुनावी सीजन आते ही उठलने लगते हैं. उन्होंने अपने समाज के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी.

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल एक-दूसरे पर हमलावर हैं. सभी अपने समर्थकों को एकजुट करने का एक अवसर नहीं छोड़ रहे हैं. इसी चुनावी माहौल में उत्तर प्रदेश में गठबंधन सरकार के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने अपने समाज के लोगों को एकजुट होने का आह्वान किया है.
उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर ट्वीट कर ये आह्वान किया है. इस दौरान उन्होंने फूलन देवी की हत्या को लेकर बड़ा बयान दिया और अपने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. ऐसा लगता है जैसे फूलन देवी हत्याकांड पर एक बार फिर से सियासत गरमाने वाली है.
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चुनावी सीजन आ गया है। जो साढ़े चार साल आपके सुख दुख में नहीं आए- अब दरी बिछाने वाले वही सौदागर पंचायत के बहाने आपके आसपास बरसाती मेंढक की तरह कूदने लगे हैं। मल्लाह, निषाद, केवट, कश्यप, बिंद, धीवर, कहार, बाथम, रायकवार और माझियों के मछुआरा समुदाय को सावधान रहना होगा।
— Dr. Sanjay Kumar Nishad (@drsanjayknishad) September 18, 2026
जिन्होंने…
सपा नेताओं को बताया 'बरसाती मेंढक'
संजय निषाद ने अपने ट्वीट में अप्रत्यक्ष तौर पर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है. अपने पोस्ट में उन्होंने चुनाव के दौरान निषाद और मछुआरा समुदाय के बीच अचानक सक्रिय होने वाले नेताओं को 'बरसाती मेंढक' और 'बहरुपिया' बताया है. उन्होंने लिखा, 'चुनावी सीजन आ गया है. जो साढ़े चार साल आपके सुख दुख में नहीं आए, अब दरी बिछाने वाले वही सौदागर पंचायत के बहाने आपके आसपास बरसाती मेंढक की तरह कूदने लगे हैं. मल्लाह, निषाद, केवट, कश्यप, बिंद, धीवर, कहार, बाथम, रायकवार और माझियों के मछुआरा समुदाय को सावधान रहना होगा.'
अपने समुदाय के लोगों को दी सतर्क रहने की सलाह
उन्होंने अपने समाज के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी और लिखा, 'जिन्होंने बहन वीरांगना फूलन देवी की हत्या करवाकर मछुआरा समाज की अलग राजनीति को खड़ा होने से रोका था, ऐसे बहरूपियों से और उनकी मदद करने वाले समाजद्रोहियों से सावधान रहना होगा.' गौर हो कि फूलन देवी की हत्या 25 जुलाई 2001 में दिल्ली में उनके आवास के बाहर गोली मारकर की गई थी. इस मामले में शेर सिंह राणा को दोषी ठहराया गया था.
संजय निषाद ने फूलन देवी की हत्या के मामले को उठाते हुए लिखा कि कुछ राजनीतिक ताकतों ने वीरांगना फूलन देवी के हत्या की सुपारी दी और उनकी संपत्ती पर कब्जा किया था. उन्होंने लिखा कि जिस पार्टी ने फूलन देवी की राजनीतिक विरासत को मछुआरा समुदाय से छीनने का प्रयास किया वो लोग मछुआरों का भला चाहने वाले लोग नहीं हैं.
'ये OBC समाज के हक के लिए लड़ने वाली कौम'
संजय निषाद ने अपने पोस्ट के अंत में अपनी निषाद पार्टी को मछुआरों की स्वतंत्र पहचान बताया और लिखा कि मछुआरे दरी बिछाने वाली कौम नहीं हैं, बल्कि ओबीसी समाज के हक के लिए लड़ने वाली कौम है. बरसाती मेंढक भेष बदल-बदल के आएंगे और उनसे सावधान रहने की सलाह दे डाली. संजय निषाद ने एक तरह से सपा को OBC की हितैषी वाली पार्टी करार दी है और दावा किया कि ये लोग निषाद समाज का भला नहीं चाहते.
ये पोस्ट तब सामने आई है जब हाल ही में सपा ने दावा किया था कि उसने अपने शासनकाल में निषाद समाज को मान-सम्मान, पहचान और अधिकार दिया है. इसके साथ ही फूलन देवी का उदाहरण देते हुए कहा था कि सपा ने ही उन्हें रिहा करवाया था और दो बार सांसद बनाया था. सपा अक्सर दावा करती है कि सपा ने ही निषाद समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिया था. हालांकि, संजय निषाद ने सपा के इन दावों को खारिज करते रहे हैं.
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