राम मंदिर चंदा मामले पर डैमेज कंट्रोल, संवाद से भ्रम दूर करेगा संघ
Ram Mandir News: राम मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं की आस्था पर पड़े असर और भरोसा बहाल करने को लेकर अब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ डैमेज कंट्रोल में जुट गया है. संवाद के जरिए लोगों को समझाया जा रहा है.

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा गणना विवाद के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अब डैमेज कंट्रोल में जुट गया हैं. आरएसएस अब अनौपचारिक संवाद के जरिए लोगों के बीच फैली भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश शुरू कर दी गई है. लखनऊ में हुई ऐसी ही एक बैठक में संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण पर विस्तार से अपनी बात रखी.
इस बैठक में माना कि चोरी की घटना से इनकार नहीं किया जा सकता और यह किसी भी स्थिति में उचित नहीं है. हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया कि इसे 'राम मंदिर में चोरी' कहना सही नहीं होगा. संघ का पक्ष है कि चोरी मंदिर परिसर में नहीं, बल्कि चढ़ावे की गणना प्रक्रिया के दौरान हुई. गणना में लगे कुछ लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया, जो बैंक की ओर से थर्ड पार्टी रिकमेंडेशन के जरिए लगाए गए थे.
चढ़ावा मामले में डैमेज कंट्रोल में जुटा संघ
संघ के पदाधिकारी के अनुसार, इस मामले में आठ लोग गिरफ्तार हैं, जिसमें से छह लोग को लेकर जांच में सामने आया कि करीब 45 दिनों के दौरान उन्होंने लगभग 70 बार चोरी की. सभी आरोपियों के नाम एफआईआर में दर्ज हैं और वे जेल में हैं.
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बैठक में यह भी बताया गया कि दो अन्य लोगों के नाम भी मामले में आए हैं. इनमें एक वह व्यक्ति था जिसके पास चाबियों की जिम्मेदारी थी और दूसरा गणना प्रक्रिया का प्रभारी था. हालांकि उनके खिलाफ प्रत्यक्ष रूप से चोरी करने के साक्ष्य नहीं मिले लेकिन, जिम्मेदारी के पद पर होने के कारण उनका नाम भी जांच में शामिल किया गया. संघ के अनुसार, वरिष्ठ स्तर के लोगों की प्रत्यक्ष संलिप्तता के कोई प्रमाण नहीं मिले लेकिन, निगरानी और जवाबदेही में कमी को बड़ी चूक माना गया.
संवाद से भ्रम दूर करने की कोशिश
संघ के पदाधिकारी ने बताया कि 4 जून को ट्रस्ट को इस पूरे प्रकरण की जानकारी मिली थी. इसके बाद इस पर दो तरह की राय सामने आई. एक पक्ष का मानना था कि तत्काल पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जाए. जबकि, दूसरे पक्ष का कहना था कि पहले पूरी जानकारी एकत्र कर ली जाए. इस बीच 5 जून को पुलिस की मदद से बरामदगी भी हुई और चोरी की वास्तविक मात्रा का आंकलन करने का प्रयास किया गया. हालांकि, इससे पहले ही मामला सार्वजनिक हो गया और व्यापक राजनीतिक व सामाजिक चर्चा शुरू हो गई.
राम मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं की आस्था पर पड़े असर और भरोसा बहाल करने के सवाल पर संघ का स्पष्ट संदेश था संवाद ही समाधान है. संघ का कहना है कि लगातार संवाद के जरिए लोगों के बीच सही तथ्य रखे जाएंगे ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे.
चंपत राय का भी किया बचाव
बैठक में चंपत राय को लेकर भी चर्चा हुई. संघ का पक्ष रहा कि उनके खिलाफ प्रत्यक्ष रूप से किसी गड़बड़ी के प्रमाण नहीं हैं. वहीं, ट्रस्ट से जुड़े अन्य नामों पर पूछे गए सवालों का विस्तृत जवाब नहीं दिया गया. संघ की रणनीति फिलहाल यही दिख रही कि निरंतर संवाद के माध्यम से पूरे घटनाक्रम के तथ्य लोगों तक पहुंचाए जाएं, ताकि श्रद्धालुओं के मन में उठे सवालों और भ्रमों का समाधान हो सके.
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