शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप: सरकार ने संतों का अपमान किया, न्याय की प्रतीक्षा करेंगे
Prayagraj News: प्रेस कांफ्रेसं के दौरान शंकराचार्य ने भावुक होते हुए कहा कि प्रयाग की धरती पर जो कुछ घटित हुआ, उसने हमारी आत्मा को झकझोर दिया है. हम बिना स्नान किए यहां से विदा ले रहे हैं.

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन का विवाद अब एक अहम् पड़ाव के साथ बड़ा तनाव छोड़ गया. उस दिन से अनशन पर बैठे अविमुक्तेश्वरानंद आज शिविर छोड़ रहे हैं, जिससे पहले उन्होंने आरोप लगाया कि यूपी शासन ने उनकी भौतिक हत्या का प्रयास किया. आज वे अपमान का घूंट पीकर वापस जा रहे हैं. शंकराचार्य ने प्रस्थान से पहले उन्होंने प्रेस कांफ्रेसं की और कहा कि उन्होंने अन्याय को अस्वीकार किया है और न्याय की प्रतीक्षा करेंगे.
प्रेस कांफ्रेसं के दौरान शंकराचार्य ने भावुक होते हुए कहा कि प्रयाग की धरती पर जो कुछ घटित हुआ, उसने हमारी आत्मा को झकझोर दिया है. हम बिना स्नान किए यहां से विदा ले रहे हैं. आज हम यहां से जा रहे हैं, लेकिन अपने पीछे सत्य की गूंज छोड़कर जा रहे हैं.
मेला प्रशासन का प्रस्ताव ठुकराया
शंकारचार्य ने बताया कि कल शाम और आज प्रातःकाल प्रशासन की ओर से मुख्य कार्यकारी अधिकारी के माध्यम से प्रस्ताव भेजा गया था कि जब चाहें ससम्मान स्नान कराया जाएगा और उस दिन के अधिकारी पुष्पवर्षा करेंगे. लेकिन इस प्रस्ताव में अमावस्या वाले दिन की घटना के लिए क्षमा नहीं मांगी गई. बोले- "अगर हम स्नान कर लेते और पुष्पवर्षा करवा लेते तो उस दिन की बात अधूरी रह जाती. जो असली मुद्दा है, उसके लिए हम दस दिन फुटपाथ पर बैठे रहे. इतने लंबे समय के बाद जब जाने का फैसला हुआ तब ऐसा प्रस्ताव आया. हमने इसे स्वीकार नहीं किया, क्योंकि ऐसा करने से भक्तों के अपमान की होती. हम भारी मन से जा रहे हैं."
मुगलों से की तुलना
शंकारचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार की मुगल काल से तुलना करते हुए आरोप लगाया कि जो मुगलों के समय में हुआ, आज वही हो रहा है. शंकराचार्य ने गृह मंत्री के बयान का हवाला देते हुए कहा कि सरकार संतों का अपमान करेगी तो स्थायी नहीं रहेगी. उन्होंने दोहरे चरित्र पर सवाल उठाए और कहा कि सनातन का विरोध करके कोई काम नहीं कर सकेगा. इसके लिए स्पष्ट होगा और काम करेंगे.
दो मिनट का मौन रखा
इस दौरान अविमुक्तेश्वरानंद ने 2 मिनट का मौन भी रखा और प्रार्थना की कि अपमान करने वालों को दंड मिले. उन्होंने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कह कि हमारी भौतिक हत्या का प्रयास किया गया और इन दिनों हमारी पीठ की हत्या का प्रयास हुआ, जो सफल रहा. अगर यहां का प्रशासन कर रहा होता तो ठीक, लेकिन इसके पीछे यूपी शासन है.
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Source: IOCL
























