प्रयागराज में ढोल-नगाड़ों के साथ अपना दूल्हा लेने पहुंची दुल्हन, परंपराओं की दीवारें तोड़ीं
Prayagraj Bride Barat: इस अनोखी पहल के पीछे तनु के पिता राजेश जायसवाल का सपना था. पिता ने अपनी पांचों बेटियों की शादी को बेटों जैसी शान से करने का इरादा रखते थे.

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक ऐसी शादी हुई, जिसने समाज की पारंपरिक सोच को नए अंदाज में चुनौती दी. यहां परंपरागत तौर पर दूल्हे की जगह दुल्हन तनु खुद गाजे-बाजे, डीजे और सैकड़ों लोगों की भीड़ के साथ बारात लेकर अपने ससुराल पहुंचीं.
जैसे ही यह ‘उल्टी बारात’ सड़कों से गुज़री, लोगों की भीड़ इसे देखने उमड़ पड़ी और यह नज़ारा पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया. कीडगंज की रहने वाली तनु बुधवार (26 नवंबर) की रात पूरी रस्मों के साथ मुट्ठीगंज स्थित अपने दूल्हे रजत के घर बारात लेकर पहुंचीं.
बेटी की बारात लेकर निकला परिवार
इस अनोखी पहल के पीछे तनु के पिता राजेश जायसवाल का सपना था, जो अपनी पांचों बेटियों की शादी को बेटों जैसी शान से करने का इरादा रखते थे. इसी सोच को साकार करने के लिए उन्होंने शादी का निमंत्रण पत्र भी खास तरह से छपवाया, जिसमें साफ लिखा था “लड़की की बारात”.
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शादी के दिन दुल्हन का परिवार उसी तरह तैयार हुआ, जैसे आमतौर पर दूल्हे पक्ष के लोग होते हैं. घरवालों ने तनु की बारात की आरती उतारकर उसे विदा किया, बिल्कुल वैसे ही जैसे दूल्हे की बारात की रस्मों में किया जाता है. रिश्तेदारों ने भी इस अनोखे आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और खुशी का माहौल पूरे दिन बना रहा.
दो किलोमीटर तक बग्घी पर बैठ दुल्हन ने की एंट्री
तनु की बारात की रौनक देखते ही बन रही थी. पारंपरिक परिधान में सजी दुल्हन बग्घी पर बैठकर बारात का नेतृत्व कर रही थीं. करीब दो किलोमीटर लंबी बारात में डीजे की धुनों पर बाराती नाचते रहे. लाइट, साउंड, बैंड और गाजे-बाजे की गूंज ने माहौल को और भी खास बना दिया.
रास्तेभर लोग रुक-रुक कर इस अनोखे दृश्य का वीडियो बनाते रहे. जब बारात दूल्हे रजत के घर पहुंची, तो परिवार ने तनु का शाही अंदाज़ में स्वागत किया और पारंपरिक रस्मों के साथ विवाह की प्रक्रिया पूरी हुई.
सोशल मीडिया पर वायरल बराबरी का संदेश देती शादी
तनु की इस पहल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. लोग इसे लैंगिक समानता और समाज में बदलाव की मिसाल के तौर पर देख रहे हैं. यह शादी न सिर्फ अनोखी थी, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि बेटियां किसी भी परंपरा को निभाने और बदलने में पीछे नहीं हैं.
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Source: IOCL























