IITian Baba को कुंभ के मेले में मिली बहन, एक-दूसरे से मिलती-जुलती है कहानी, जुड़ा खास कनेक्शन
Maha Kumbh 2025 IITian Baba: अभय सिंह ने कुंभ के मेले में बनी उनकी बहन नाइशा की कहानी भी एकदम उनकी जैसी है. वो भी विदेश गई और दस साल तक ऑस्ट्रेलिया में रही. मैं भी विदेश गया.

Maha Kumbh 2025 IITian Baba: प्रयागराज महाकुंभ में IITian Baba के नाम से मशहूर अभय सिंह इन दिनों काफी चर्चा में बने हुए हैं. हाल में उनका एक नया रूप देखने को मिला है, जिसमें उन्होंने अपनी दाढ़ी कटवा ली है और वो एकदम क्लीन शेव दिखाई दिए. यही नहीं कुंभ के इस मेले में अब एक बहन भी मिल गई है. नाइशा नाम की इस लड़की ने अभय सिंह को अपना भाई बताया और कहा कि उन दोनों की जिंदगी एकदम एक जैसी हैं, इसलिए उसने अभय सिंह के साथ कनेक्ट किया.
अभय सिंह ने कहा कि बताया कि उनकी बहन बनी नाइशा और उनकी कहानी भी एकदम एक जैसी है. एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि नाइशा का जीवन भी उनके जैसा ही रहा है. वो भी विदेश गई और दस साल तक ऑस्ट्रेलिया में रही. मैं भी विदेश गया.. ये भी हरियाणा से हैं, और मैं भी हरियाणा से हूं. ये भी जाट है मैं भी जाट हूं. इसने भी वैसी ही पैरेंटिंग देखी है जैसी मैने देखी है. इसलिए हमारी कहानी लगभग एक जैसी है.
कुंभ के मेले में मिली बहन
IITian Baba की बहन बनी नाइशा ने कि उसे अभय सिंह की वास्तविकता बहुत पसंद आई. सबसे पहले मैंने इसी बात पर कनेक्ट किया कि कोई तो वास्तविकता पर बात कर रहा है. अगर माता-पिता जन्म देते हैं तो वहीं सबकुछ नहीं है. बच्चों को प्यार जरूर देना चाहिए. कई बार ये इस पर भी निर्भर करता है कि उनका बैक ग्राउंड क्या है. वो उसी की तरह रिएक्ट करते हैं.
नाइशा ने कहा कि वो भी काशी अपनी अध्यात्मिक यात्रा पर जा रही थी तभी उसे अभय सिंह के बारे में पता चला. उनसे मुलाक़ात हुई जिसके बाद हमारी अध्यात्म को लेकर काफी बातचीत हुईं. तो मुझे लगा कि जो मैं खोजने जा रही हूं वो सब यहीं पर है. तो मैं यहीं रुक गई. नाइशा ने कहा कि वो दो दिन पहले ही प्रयागराज से आई है. उसने पहले अभय सिंह के वीडियो देखे थे, नाइशा ने कहा कि मुझे लगा कि ये तो हमारे जैसी ही बातें कर रहे हैं. हम एक दूसरे की बातों से बहुत कनेक्ट करते हैं.
नाइशा ने कहा कि मैं अभय को एक ऐसे शख्स के तौर पर देखती हूं जिसने अपना रास्ता खुद बनाया है. खुद को एक्सप्लोर किया है. वो सच्चाई और ईमानदारी मुझे दिखी. उसी पर मैं अकेली नहीं है कितने लोग है जो इनसे जुड़ना चाह रहे हैं. क्योंकि सबने ये फेज देखा है. ऐसे लोग बहुत कम लोग मिलते हैं जिन्दगी में जिन्होंने ख़ुद को खोजा. खुद का जाना.
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