महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध को रोकने के लिए पुलिस इस योजना पर कर रही है काम, बनेगी खास टीम
महिला संबंधी अपराधों पर लगाम लगाने के लिए अब नई पहल की जा रही है. महिलाएं पुलिस की मुखबिर की तरह काम करेंगी तो वहीं पीड़ित महिला को इंसाफ दिलाने में मदद भी करेंगी.

कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर रेंज में महिला संबंधी अपराधों पर लगाम लगाने के लिए अब नई पहल की जा रही है. महिला उत्पीड़न के अपराधों को रोकने के लिए अब महिलाओं का सहारा लिया जाएगा. हर वार्ड और गांव में ऐसी महिलाओं को तैयार किया जाएगा जो शोहदों और दूसरे अपराधियों पर नजर रख सकें. ये महिलाएं पुलिस की मुखबिर की तरह काम करेंगी तो वहीं पीड़ित महिला को इंसाफ दिलाने में मदद भी करेंगी.
सीएम योगी हैं गंभीर सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ महिला संबंधी अपराधों को लेकर गंभीर नजर आ रहे हैं. इन अपराधों पर लगाम लगाने के लिए एंटी एंटी रोमियो स्क्वॉड, पिंक चौकी और मिशन शक्ति जैसी योजनाओं को अमल में लाया गया है. जिसका असर भी देखने को मिला और महिला संबंधी अपराधों में कमी देखने को मिली है.
महिला संबंधी अपराधों में कमी आई है आकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि पिछले सालों में महिला संबंधी अपराधों में कमी आई है. सरकार की मंशा को देखते हुए कानपुर परिक्षेत्र के आईजी मोहित अग्रवाल ने महिला संबंधी अपराधों पर रोक के लिए महिला मुखबिरों की टीम बनाने की कवायद शुरू की है. जिसके चलते हर वार्ड और गांव से चार-चार महिलाओं को पुलिस से जोड़ने का अभियान शुरू किया है.
महिला सूत्र मीटिंग में लेंगी हिस्सा आईजी रेंज का कहना है कि पुलिस की थानों और गांवों में होनी वाली बैठकों में मुख्य रूप से पुरुष ही शामिल होते हैं. महिलाओं की आवाज पुलिस तक नहीं पहुंच पाती है. पीड़ित महिला अपनी समस्या महिला को आसानी से बता पाएगी. इस अभियान में स्कूल और कॉलेजों की छात्राओं के साथ टीचर्स को भी जोड़ा जाएगा. उनका कहना है कि इस अभियान से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा साथ महिलाओं के साथ अपराध करने वालों की पुलिस को जानकारी मिल सकेगी. इस अभियान में थानेदारों से लेकर जिलों के कप्तान को शामिल किया जाएगा. पुलिस की ये महिला सूत्र पुलिस के अधिकारियों के साथ मीटिंग में भी हिस्सा लेंगी.
महिला सशक्तिकरण को मिलेगा बढ़ावा महिला मुखबिरों की इस योजना से महिलाएं खासी उत्साहित नजर आ रही हैं. उनका मानना है कि एक महिला दूसरी महिला से अपनी बात खुल कर कह सकेगी. वहीं, पुलिस की महिला सूत्र पीड़ित महिला की बात को अच्छे से समझ कर पुलिस अधिकारियों को बता सकेगी. वहीं, पुलिस के सूत्रों में महिलाओं की भागीदारी से महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा.
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