पूर्वांचल की बदलेगी सूरत, फिर शुरू होगा गोरखपुर के लोगों को रोजगार देने वाला कारखाना
पूर्वांचल के साथ-साथ देश की औद्योगिक इकाइयों में बड़ी पहचान रखने वाला ये कारखाना न केवल रोजगार के लिहाज से बल्कि कृषि क्षेत्र की जरूरत के लिहाज से बड़ा उद्यम रहा है।

गोरखपुर, एबीपी गंगा। गोरखपुर की पहचान भले ही गुरु गोरक्षनाथ और गोरखपुर मंदिर की वजह से हो लेकिन यहां की पहचान की बड़ी निशानियों में एक गोरखपुर का खाद कारखाना भी रहा है। पूर्वांचल के साथ-साथ देश की औद्योगिक इकाइयों में बड़ी पहचान रखने वाला ये कारखाना न केवल रोजगार के लिहाज से बल्कि कृषि क्षेत्र की जरूरत के लिहाज से बड़ा उद्यम रहा है।
इलाके के विकास को परिभाषित करने वाला ये कारखाना 1990 में नीतियों के अभाव में बंद हो गया। जिसके बाद यहां बड़े पैमाने पर रोजगार का संकट खड़ा हो गया। इकाई के बंद होने से कृषि क्षेत्र में उवर्रक की मांग के मुकाबले उत्पादन घटने के अलावा रोजगार जैसी दूसरी समस्याएं खड़ी हो गईं।
1990 के बाद केंद्र में रही सरकारों और राज्य सरकारों के सुस्त रवैये और लचर पहल के चलते बंद हुआ ये उवर्रक कारखाना सालों तक बंद रहा। 2014 में बहुमत के साथ सत्ता में आई बीजेपी ने आखिरकार 2016 में इसकी सुध ली। गोरखपुर के कारखाने के साथ ही सिंदरी और बरौनी के फर्टिलाइजर कारखाने को नया जीवन देने का फैसला किया। केंद्र सरकार ने इन तीनों कारखानों के लिए 1257 करोड़ रुपए से अधिक के ब्याज मुक्त कर्ज को मंजूरी दी है। अकेले गोरखपुर के कारखाने के लिए 422.28 करोड़ रुपए कर्ज का इंतजाम किया गया है।
केंद्र सरकार की कोशिशों के बाद इसे अमलीजामा पहनाने में राज्य की बीजेपी सरकार भी पीछे नहीं है। उसने कारखाने को बिजली कनेक्शन के लिए सिक्योरिटी मनी से छूट दी है। इससे ढाई करोड़ रुपए माफ किए जाएंगे। कारखाने को शुरू करने के लिए 4 मेगावाट बिजली की जरूरतों को पूरा किया जाएगा। कारखाने के पुराने 66 लाख रुपए माफ करने का फैसला किया है।
केंद्र सरकार ने इस कारखाने की जिम्मेदारी हिंदुस्तान उवर्रक और रसायन लिमिटेड को सौंपी है। कारखाने के लिए गैस की आपूर्ति जगदीशपुर हल्दिया गैस पाइप लाइन प्रोजेक्ट से करने का फैसला किया गया है। 600 एकड़ में स्थापित होने वाले नए यूरिया प्लांट से 13 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन होगा।
माना जा रहा है कि प्लांट से सस्ती कीमत पर किसानों को यूरिया मिल सकेगी। साथ ही लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी मुहैया हो सकेंगे। यही वजह है कि बीजेपी इसका क्रेडिट लेने में पीछे नहीं है। वहीं, समाजवादी पार्टी भले ही विकास के तमाम दावे अखिलेश सरकार के दौर में करती हो लेकिन उसके पास फर्टिलाइजर कारखाने को लेकर कोई माकूल जवाब नहीं है।
जिस दौर में ये कारखाना बंद हुआ। उस दौर में केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। भले ही उसकी सरकार में बंद हुआ कारखाना चल न पाया हो लेकिन कांग्रेस आज भी इसका श्रेय लेने से चूकती नहीं। उम्मीद है कि गोरखपुर कारखाने का काम अगर समय पर शुरू हो गया और काम अगर तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक चलता रहे तो नवंबर 2020 में इसमें उत्पादन शुरू हो जाएगा।























