चारधाम यात्रा पर CM धामी का नया प्लान, अब मार्ग में खाने की होगी सख्त जांच, प्लास्टिक पर सख्ती
Chardham Yatra News In Hindi: बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलते हीं पहाड़ों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है. जिस वजह से सीएम धामी ने यात्रा की कमजोर कड़ी पर ध्यान दिया है.

हर साल जब बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलते हैं, तो उत्तराखंड की पहाड़ी सड़कों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है. देश के कोने-कोने से, यहां तक कि विदेशों से भी लाखों तीर्थयात्री इन पवित्र धामों तक पहुंचने के लिए कठिन रास्तों पर चलते हैं.
लेकिन इस पूरी यात्रा में एक ऐसी चीज है जो अक्सर नजरंदाज हो जाती है, वो है रास्ते में मिलने वाला खाना. थके हुए यात्री को जब किसी ढाबे पर बासी, मिलावटी या बीमार कर देने वाला खाना मिले, तो उसकी पूरी यात्रा का उत्साह ठंडा पड़ जाता है. इस बार सरकार ने इसी कमजोर कड़ी पर ध्यान दिया है.
हरित चारधाम सिर्फ नारा नहीं, नीयत भी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बार चारधाम यात्रा को हरित यात्रा की थीम पर संचालित करने का फैसला किया है. इसका मतलब सिर्फ पेड़-पौधे लगाना नहीं है, बल्कि इसका दायरा बहुत बड़ा है. शुद्ध भोजन, स्वच्छ वातावरण और सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति, यह तीन संकल्प इस यात्रा की नई पहचान बनने जा रहे हैं. खाद्य संरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग को इस काम की जिम्मेदारी सौंपी गई है और विभाग ने काम भी शुरू कर दिया है, न सिर्फ कागजों पर बल्कि जमीन पर भी.
UP में हीटवेव का कहर! स्कूलों का बदला समय, जानें क्या है नई टाइमिंग?
मोबाइल वैन और क्विक रिस्पांस टीम फील्ड पर
पूरे यात्रा मार्ग पर मोबाइल फूड सेफ्टी वैन तैनात की गई हैं जो चलते-फिरते खाद्य पदार्थों की जांच करेंगी. साथ ही क्विक रिस्पांस टीमें भी तैयार हैं जो किसी भी शिकायत पर तुरंत हरकत में आएंगी. रोटेशन के आधार पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी भी यात्रा मार्ग पर तैनात किए गए हैं. अगर किसी यात्री को कोई परेशानी हो, कहीं मिलावट नजर आए या खाना ठीक न लगे तो टोल फ्री नंबर 18001804246 पर शिकायत की जा सकती है.
250 से ज्यादा कारोबारियों को मिला प्रशिक्षण
आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन सचिन कुर्वे के निर्देश पर विभाग यात्रा मार्ग के होटल और ढाबा संचालकों के साथ लगातार बैठकें और कार्यशालाएं कर रहा है. उपायुक्त मुख्यालय गणेश कंडवाल के अनुसार अब तक उत्तरकाशी, श्रीनगर, देवप्रयाग, तीनधारा, चंबा, घनसाली, रुद्रप्रयाग और घट्टूगाड़ में 250 से अधिक होटल कारोबारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है.
इन कार्यशालाओं में कारोबारियों से खाने में तेल, नमक और चीनी का उपयोग कम करने की अपील की जा रही है. यह बात सुनने में भले ही छोटी लगे, लेकिन जब लाखों तीर्थयात्री इनमें से कई मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीज भी हैं. वहीं रोजाना इन ढाबों पर खाना खाते हैं, तो यह सावधानी वाकई बड़ा फर्क डाल सकती है.
खाने का तेल अब बनेगा बायोफ्यूल
एक और दिलचस्प और जरूरी पहल यह है कि होटलों से कहा जा रहा है कि वे खाना पकाने के तेल को तीन बार से ज्यादा इस्तेमाल न करें. बार-बार गरम किया गया तेल स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होता है और दुर्भाग्य से ढाबों में यह आम बात रही है.
अब इस्तेमाल किए गए तेल को फेंकने की बजाय बायोफ्यूल बनाने के लिए एकत्र किया जाएगा. यह एक साथ दो काम करेगा, जिसमें यात्रियों का खाना सुरक्षित रहेगा और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होगा.
प्लास्टिक पर भी लगा लगाम
मुख्यमंत्री धामी ने साफ कहा है कि चारधाम जैसे पवित्र स्थलों पर सिंगल यूज प्लास्टिक का अंबार नहीं लगने देंगे. सरकार रिड्यूज, रियूज और रिसाइकिल के सिद्धांत पर काम कर रही है. तीर्थस्थलों की पवित्रता सिर्फ आस्था से नहीं, स्वच्छता से भी बनती है. यह सोच इस पूरे अभियान की जड़ में है.























