यूपी की जेल में लापरवाही या साजिश? वारंट के बावजूद स्क्रैप माफिया रवि काना की रिहाई से मचा बवाल
Banda News: रविंद्र सिंह नागर को कुछ महीने पहले पुलिस ने गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) गौतम बुद्ध नगर ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था.

उत्तर प्रदेश के बांदा जिला जेल प्रशासन पर एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जिसने जेल व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. मामला कुख्यात अभियुक्त रविंद्र सिंह नागर उर्फ रवि काना से जुड़ा है, जो गौतम बुद्ध नगर जिले के थाना सेक्टर-63, सेंट्रल नोएडा में दर्ज गंभीर आपराधिक मामलों और गैंगस्टर एक्ट के तहत आरोपी है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविंद्र सिंह नागर को कुछ महीने पहले पुलिस ने गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) गौतम बुद्ध नगर ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था. इसके तहत 29 जनवरी 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आरोपी की पेशी कराई गई, जिसमें अदालत ने 2 फरवरी 2026 तक न्यायिक रिमांड मंजूर की.
कोर्ट के आदेश विपरीत आरोपी को रिहा कर दिया
कोर्ट की कार्यवाही के बाद उसी दिन शाम 6 बजकर 40 मिनट पर आरोपी का कस्टडी वारंट जारी किया गया. यह वारंट ई-मेल और व्हाट्सऐप के जरिए मात्र दो मिनट बाद, यानी 6 बजकर 42 मिनट पर बांदा जिला जेल प्रशासन को भेज दिया गया. इसके बावजूद हैरान करने वाली बात यह है कि बांदा जेल अधीक्षक ने उसी दिन शाम करीब 6 बजकर 39 मिनट पर आरोपी को रिहा कर दिया. यानी न्यायिक रिमांड और कोर्ट के आदेश प्रभावी होने के बावजूद आरोपी को जेल से बाहर कर दिया गया.
जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप
इस पूरे घटनाक्रम को कारागार अधिनियम, जेल मैनुअल और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता का गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है. नियमों के अनुसार, किसी भी आरोपी को तब तक रिहा नहीं किया जा सकता, जब तक अदालत की ओर से स्पष्ट आदेश न हों. खासकर जब न्यायिक रिमांड लागू हो, तब जेल प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है.
जेल अधीक्षक से मांगा स्पष्टीकरण
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीजेएम गौतम बुद्ध नगर ने बांदा जेल अधीक्षक से स्पष्टीकरण तलब किया है. इसके साथ ही आरोपी रविंद्र सिंह नागर उर्फ रवि काना की दोबारा गिरफ्तारी के लिए गैर-जमानती वारंट भी जारी किया गया है. अदालत ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के निलंबन, विजिलेंस जांच कराने और आपराधिक मुकदमा दर्ज करने के आदेश भी दिए है.
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर एक्ट जैसे कानून संगठित अपराध पर रोक लगाने के लिए बनाए गए हैं. ऐसे मामलों में आरोपी की रिहाई को लेकर जरा-सी लापरवाही भी कानून-व्यवस्था पर गंभीर असर डाल सकती है. इस घटना के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं और अब सभी की नजरें जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.
























