अलंकार अग्निहोत्री ने जिस पद से दिया इस्तीफा उसके बड़े ठाट-बाट, इतनी मिलती है सैलरी, सरकार देती है कई सुविधाएं
Alankar Agnihotri salary: पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने जिस पद से इस्तीफा दिया उसकी सैलरी कितनी होगी और उस स्तर के अधिकारी को कितनी सरकारी सुविधाएं मिलतीं हैं? जानें- यहां

उत्तर प्रदेश स्थित बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे और फिर निलंबन ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है. बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट (PCS अधिकारी) अलंकार अग्निहोत्री अपने पद से इस्तीफा दिया.
सिटी मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात अधिकारी के तौर पर, अग्निहोत्री के पास उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में प्रभावशाली पद था. इस स्तर के अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं, जिसमें कानून और व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ और जिम्मेदारियां शामिल हैं.
अलंकार अग्निहोत्री की सैलरी कितनी?
सिटी मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यरत एक PCS अधिकारी को आमतौर पर उत्तर प्रदेश सरकार के तहत 7वें वेतन आयोग के अनुसार वेतन मिलता है. इस रैंक के लिए मूल वेतन पे लेवल 10 के तहत 56,100 से 1,32,000 रुपये प्रति माह के बीच होता है.
मूल वेतन के अलावा, PCS अधिकारी कई नियमित भत्तों के हकदार होते हैं जिसमें महंगाई भत्ता (DA) मकान किराया भत्ता (HRA) , परिवहन भत्ता (TA), चिकित्सा और अन्य भत्ते शामिल हैं.
सैलरी के अलावा क्या सुविधाएं?
अच्छी सैलरी के अलावा सरकारी आवास, आधिकारिक वाहन , चिकित्सा सुविधाएं, सुरक्षा और सपोर्ट स्टाफ भी मिलता है. हालांकि कई मामलों में सरकारी आवास उपलब्धता और सपोर्ट स्टाफ और सुरक्षा, वरिष्ठता के आधार पर तय होती है.
अलंकार अग्निहोत्री के आरोप क्या हैं?
अलंकार अग्निहोत्री ने बीते दिनों कहा था कि 'उत्तर प्रदेश सरकार में काफी समय से ब्राह्मण विरोधी अभियान चल रहा है. ब्राह्मणों को निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है. कहीं, एक डिप्टी जेलर एक ब्राह्मण को पीट रहा है. दूसरे पुलिस स्टेशन में, एक दिव्यांग ब्राह्मण को पीट-पीटकर मार डाला गया है. पिछले दो हफ्तों की हाल की घटनाओं के बारे में सोचिए, जिसमें माघ मेला भी शामिल है, जहां मौनी अमावस्या के दिन, हमारे ज्योतिर मठ (ज्योतिषपीठ) के शंकराचार्य, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज स्नान करने गए थे. उनके शिष्यों और बुजुर्ग संतों को पैरों, लातों और जूतों से पीटा गया. जब प्रशासन इस तरह पीटता है, तो क्या आप बाहर के दूसरे समुदायों के लोगों को यह संदेश देना चाहते हैं कि जब प्रशासन इस तरह पीटेगा, तो नरसंहार होगा? आप क्या चाहते हैं? क्या आप ब्राह्मणों का नरसंहार करना चाहते हैं?'
उन्होंने कहा था कि 'केंद्र सरकार के हालिया नियम, भारत सरकार का 13 जनवरी, 2026 को जारी गजट, ने विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को घोषित अपराधी मान लिया है. इसका मतलब है कि आपका बेटा या बेटी वहां पढ़ रहे होंगे. कोई भी उनके खिलाफ भेदभाव का आरोप लगाते हुए झूठी शिकायत दर्ज कर सकता है, और समता समिति उनका फायदा उठाएगी.इस दुर्दशा का सबसे बड़ा कारण यह है कि हमारे समाज, हमारे ब्राह्मण समुदाय के सांसद और विधायक पूरी तरह से मूक दर्शक बन गए हैं. वे चुप हैं. क्या वे चाहते हैं कि समाज में बेटों, बेटियों और बहुओं का बलात्कार हो?मैं अभी भी ब्राह्मण समुदाय के सभी जन प्रतिनिधियों से अपील करता हूं कि वे तुरंत इस्तीफा देना शुरू करें और समुदाय के साथ खड़े हों. समय आ गया है, नहीं तो आपका नरसंहार निश्चित है. सामान्य श्रेणी का नरसंहार निश्चित है क्योंकि आपके जन प्रतिनिधि सो रहे हैं, कॉर्पोरेट कंपनियों के कर्मचारी बनकर बैठे हैं. मैंने राज्यपाल को लिखा है.मैंने अपना इस्तीफा उत्तर प्रदेश के सीईओ और जिला मजिस्ट्रेट को ईमेल के माध्यम से भेज दिया है'
























