'छापा मारना चाहिए...', सपा के पूर्व विधायक के यहां ED रेड पर क्या बोले अखिलेश यादव?
Akhilesh Yadav On ED Raid: पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव और उनके सहयोगियों से जुड़े कई ठिकानों पर ईडी ने छापा मारा है. इस पर अखिलेश यादव ने तीखा हमला बोला है.

समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव और उनके सहयोगियों से जुड़े कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इलाहाबाद जोनल कार्यालय ने बुधवार (8 जुलाई) को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत कार्रवाई करते हुए छापेमारी की. यह कार्रवाई झांसी और लखनऊ में एक साथ की गई. ईडी की रेड पर सपा मुखिया अखिलेश यादव भड़क गए हैं.
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "छापा मारना चाहिए कर्नाटक और महाराष्ट्र में मार रहे हैं यूपी में." उन्होंने आगे कहा, "जहां CC का माल है वहां नहीं जाते हैं, बस दिखावटी औपचारिकता निभाते हैं." ईडी द्वारा की गई छापेमारी पर सपा चीफ की प्रतिक्रिया से राजनीतिक हलचल पैदा हो गई है.
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एफआईआर के आधार पर हुई कार्रवाई
ईडी की जांच उत्तर प्रदेश विजिलेंस एस्टैब्लिशमेंट द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई है. इस एफआईआर में पूर्व विधायक पर आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप लगाए गए हैं. इसी के आधार पर ईडी ने ईसीआईआर दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की.
ईडी की शुरुआती जांच में सामने आया है कि कथित अपराध से अर्जित धन को रियल एस्टेट, निर्माण (कंस्ट्रक्शन) और अन्य कारोबार से जुड़ी कई कंपनियों और एलएलपी के नेटवर्क के जरिए इधर-उधर किया गया.
जांच एजेंसी को शक है कि इन संस्थाओं का इस्तेमाल अवैध धन को वैध दिखाने (मनी लॉन्ड्रिंग) के लिए किया गया. जांच में यह भी सामने आया है कि इस मामले का संबंध धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत सूचीबद्ध विभिन्न अपराधों से है. ईडी के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में 23 से अधिक एफआईआर दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है, जिनकी जांच को आधार बनाकर कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है.
छापेमारी के दौरान कब्जे में लिया ये सामान
तलाशी के दौरान ईडी की टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और चल-अचल संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं. इसके अलावा वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की जा रही है. एजेंसी का उद्देश्य अपराध से अर्जित धन का पता लगाना और इस धन को ठिकाने लगाने या छिपाने में शामिल लोगों की पहचान करना है.
ईडी सूत्रों के मुताबिक, बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है. एजेंसी धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत मामले की आगे की जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी अहम खुलासे हो सकते हैं.
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