एक्सप्लोरर

उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा होगी बेहतर, नए नियम में मान्यता से लेकर प्रबंधन तक सख्त व्यवस्था

Uttarakhand News: उत्तराखंड सरकार अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में कानून व्यवस्था को लेकर सक्रिय है. अब राज्य सरकार ने नए कानून के तहत अहम संशोधन किया है. नियम उल्लंघन पर 5 लाख तक होगा जुर्माना.

उत्तराखंड सरकार ने राज्य में संचालित अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में शामिल मदरसे के संचालन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और कानूनसम्मत बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण कानूनी बदलाव किए हैं.  सरकार ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा से जुड़े कानून में संशोधन करते हुए नया अध्यादेश लागू किया है.

राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार ने कानून में अहम संशोधन किए है. जिसमें संशोधित व्यवस्था भी प्रभावी हो गई है. सरकार का दावा है कि इन बदलावों का उद्देश्य संस्थानों की स्वायत्तता को बनाए रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण संचालन सुनिश्चित करना है. साथ ही नए प्रावधानों के तहत अब संस्थानों की मान्यता, प्रबंधन, वित्तीय जवाबदेही, शिक्षकों की नियुक्ति, प्रशासनिक नियंत्रण और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई से जुड़ी व्यवस्थाओं को पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनाया गया है.

धारा-14 के तहत मान्यता के नियम किए गए स्पष्ट

दरअसल, संशोधित कानून में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक धारा-14 से जुड़ा है. इस प्रावधान के तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता के लिए आवश्यक शर्तों को विस्तार से परिभाषित किया गया है.

इस संसोधन के तहत किसी भी संस्था को केवल अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान होने का दावा करने भर से मान्यता नहीं मिलेगी. साथ ही इसमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उसका गठन, संचालन और प्रशासन  अधिनियम में निर्धारित सभी मानकों के अनुरूप हो. साथ ही संस्था का संचालन संबंधित अल्पसंख्यक समुदाय के उद्देश्य और हितों के अनुरूप होना चाहिए तथा उसका पंजीकरण, प्रबंधन ढांचा और प्रशासनिक व्यवस्था विधिक प्रावधानों के अनुसार होना बेहद आवश्यक होगा.

सरकार का मानना है कि नए नियम के तहत इससे वास्तविक अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों और केवल नाम मात्र के संस्थानों के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित होगा इतना ही नहीं मान्यता प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी.

नियमों के उल्लंघन पर पांच लाख रुपये तक जुर्माना

नए नियम के मुताबिक संशोधित कानून में आर्थिक दंड का भी स्पष्ट प्रावधान किया गया है. इसके तहत किसी संस्था द्वारा अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन सिद्ध होता है तो उस पर अधिकतम पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा. सरकार का मानना है कि आर्थिक दंड की व्यवस्था संस्थानों को नियमों के पालन के लिए अधिक जवाबदेह बनाएगी.

गंभीर मामलों में प्रशासक नियुक्त करने की व्यवस्था

नए नियम के तहत यदि किसी संस्थान में प्रशासनिक अव्यवस्था, गंभीर वित्तीय गड़बड़ी या संचालन संबंधी गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं, तो सरकार वहां प्रशासक नियुक्त कर सकेगी.प्रशासक का दायित्व संस्था के संचालन को व्यवस्थित करना और उसे कानून के अनुरूप संचालित कराना होगा. इस कानून का उद्देश्य संस्था को बंद करना नहीं बल्कि आवश्यक सुधार सुनिश्चित करना है.

वकील इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में बड़ा फैसला, नोएडा कमिश्नर के पिता के कातिलों को उम्रकैद की सजा

आपराधिक मामलों में अलग से होगी कानूनी कार्रवाई

यदि जांच के दौरान अनियमितता में किसी प्रकार की धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा, वित्तीय अनियमितता या अन्य आपराधिक कृत्य के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्रचलित कानूनों के तहत अलग से आपराधिक कार्रवाई भी की जा सकेगी. इस प्रकार प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ दंडात्मक कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जा सकेगी.

कानून में किए गए अन्य महत्वपूर्ण बदलाव

बता दें संशोधित कानून में कई प्रक्रियात्मक प्रावधानों को भी अद्यतन किया गया है. सरकार ने नियामक प्राधिकरण की शक्तियों और जिम्मेदारियों को अधिक स्पष्ट किया है, ताकि शिकायतों की जांच, निरीक्षण और कार्रवाई की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से संचालित की जा सके.इसके अलावा संस्थानों के रिकॉर्ड, प्रशासनिक दस्तावेज और संचालन संबंधी व्यवस्थाओं को भी नियमानुसार बनाए रखने पर जोर दिया गया है.

किन संस्थानों पर लागू होंगे नए नियम?

यह संशोधित व्यवस्था उत्तराखंड में संचालित सभी मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों पर लागू होगी. इसमें मदरसे भी शामिल हैं.सरकार का कहना है कि जो संस्थान पहले से नियमों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं, उन्हें किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है. कार्रवाई केवल उन्हीं मामलों में होगी जहां कानून का उल्लंघन या गंभीर अनियमितता सामने आएगी.

खुला राम मंदिर ट्रस्ट का बही खाता! जानें एक साल में कितनी हुई कमाई और कहां हुआ खर्च?

अतुल चौहान को पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 35 वर्षों का अनुभव है. एबीपी न्यूज़ के साथ 17 सालों से जुड़े हैं और उत्तराखंड की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. इससे पहले एएनआई समेत अन्य बड़े संस्थानों से जुड़े रहे हैं.   वे कुमाऊं रीजन, उत्तराखंड के ब्यूरो चीफ रहे और क्षेत्रीय पत्रकारिता को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अतुल चौहान ने तीन दशक से अधिक के पत्रकारिता जीवन में राजनीति, प्रशासन, आपदा, विकास, सामाजिक सरोकार, चुनाव, अपराध और जनहित के अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की है. मेल आईडी- atul.media@gmail.com

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

पूर्व सांसद बृजभूषण शरण बोले- 'मुसलमानों ने मुझ पर गोली चलाई...'
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण बोले- 'मुसलमानों ने मुझ पर गोली चलाई...'
'बहुजन समाज को आकाश आनंद से बहुत उम्मीद', भतीजे को लेकर बोलीं मायावती
'बहुजन समाज को आकाश आनंद से बहुत उम्मीद', भतीजे को लेकर बोलीं मायावती
शिवा शर्मा हत्याकांड: आत्मसमर्पण की तैयारी में श्रद्धा दुबे, कोर्ट में डाली सरेंडर की अर्जी
आत्मसमर्पण की तैयारी में श्रद्धा दुबे, कोर्ट में डाली सरेंडर की अर्जी
'मुझ पर नींबू फेंका, मैंने शर्बत बना दिया', Gen-Z को लेकर बोले रवि किशन
'मुझ पर नींबू फेंका, मैंने शर्बत बना दिया', Gen-Z को लेकर बोले रवि किशन

वीडियोज

ABP News: किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने वालों की घंटी बजाओ | Ghanti Bajao
CJP Delhi Protest: अराजकता-अव्यवस्था जिम्मेदार कौन? | Gyanesh Kumar | Congress | Gyanesh Kumar
Kolkata Stampede News: कोलकाता में घायलों से अस्पताल मिलने पहुंचे शुभेंदु! | Breaking News | Puja
Janhit | Congress Protest | Gyanesh Kumar: विरोध के नाम पर 'अराजकता'..क्या सही है ? | Neha Bora
रेलवे स्टेशन पर 510 रुपए का 'घमासान' !

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
FIR दर्ज, आयोजक गिरफ्तार, कोलकाता हादसे में अब तक क्या-क्या एक्शन?
FIR दर्ज, आयोजक गिरफ्तार, कोलकाता हादसे में अब तक क्या-क्या एक्शन?
ग्वालियर हादसे में 15 लोगों की मौत, परिजनों का फूटा गुस्सा; प्रशासन पर लगाए आरोप
ग्वालियर हादसे में 15 लोगों की मौत, परिजनों का फूटा गुस्सा; प्रशासन पर लगाए आरोप
नमन धीर ने तोड़ा युवराज सिंह का 19 साल पुराना रिकॉर्ड, सिर्फ 6 गेंद खेलकर रचा इतिहास
नमन धीर ने तोड़ा युवराज सिंह का 19 साल पुराना रिकॉर्ड, सिर्फ 6 गेंद खेलकर रचा इतिहास
ओटीटी पर कब और कहां देख पाएंगे नानी की 'द पैराडाइज'? रिलीज डेट आई सामने
ओटीटी पर कब और कहां देख पाएंगे नानी की 'द पैराडाइज'? रिलीज डेट आई सामने
'बहुत दुख हुआ...', PM मोदी ने ग्वालियर हादसे के परिजनों के लिए की मुआवजे की घोषणा
'बहुत दुख हुआ...', PM मोदी ने ग्वालियर हादसे के परिजनों के लिए की मुआवजे की घोषणा
'ऐसे मर नहीं सकता...', स्मिच मच्छार ने बयां की सबसे खौफनाक पलों की कहानी
'ऐसे मर नहीं सकता...', स्मिच मच्छार ने बयां की सबसे खौफनाक पलों की कहानी
बीच सड़क अकेली गरबा करती दिखी महिला, वीडियो वायरल
बीच सड़क अकेली गरबा करती दिखी महिला, वीडियो वायरल
पुरुषों को भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर, छाती की गांठ को न करें नजरअंदाज
पुरुषों को भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर, छाती की गांठ को न करें नजरअंदाज
Embed widget