Rajasthan: वसुंधरा राजे का बड़ा बयान, 'हर इंसान के जीवन में आता है वनवास, जिसको अपना समझा, वो पराया...'
Rajasthan News: धौलपुर की परशुराम धर्मशाला में महाराज मुरलीधर संत की रामकथा में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे शामिल हुईं. जीवन के वनवास, भक्ति और आत्मसंयम पर अपने विचार साझा किए.

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने शुक्रवार को धौलपुर की परशुराम धर्मशाला में आयोजित महाराज मुरलीधर जी संत की रामकथा में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए जीवन के उतार-चढ़ाव और आज की दुनिया की सच्चाई पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि आजकल की दुनिया बड़ी अजीब है, जिसमें जिसे हम अपना समझते हैं, वो कभी पराया हो जाता है.
'वनवास आता है, तो जाता भी है'
वसुंधरा राजे ने अपने संबोधन में कहा, "आजकल की दुनिया बड़ी अजीब है, जिसको अपना समझा है, वो पराया भी हो जाता है. हर इंसान के जीवन में कहीं ना कहीं वनवास आ ही जाता है, पर आता है तो जाता भी है."
उन्होंने यह भी बताया कि हर व्यक्ति को पता होता है कि वह कहां गलत है, लेकिन मन की इच्छाओं के आगे वह गलत रास्ते पर चल पड़ता है. उनके मुताबिक, सच्चा साधक वही है, जो अपने मन पर काबू पा ले.
रामकथा को बताया आत्मा को झकझोरने वाला अनुभव
रामकथा का जिक्र करते हुए राजे ने कहा कि यह कोई साधारण कथा नहीं है, बल्कि यह आत्मा को झकझोर देने वाला अनुभव है. उन्होंने कहा, "जब संत जी ने श्रीराम के आदर्शों और मर्यादाओं का वर्णन किया, तो ऐसा लगा मानो हृदय राममय हो उठा हो. रामकथा हमें यह सिखाती है कि भक्ति से शक्ति मिलती है, मर्यादा से जीवन सजता है और आत्मसंयम से मुक्ति का मार्ग खुलता है."
लोगों से की मर्यादा अपनाने की अपील
वसुंधरा राजे ने अपने संबोधन में लोगों से आत्मसंयम और मर्यादा अपनाने की बात कही. उन्होंने श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेने की सलाह दी और कहा कि उनके आदर्श आज भी हमारे लिए प्रासंगिक हैं.
राजे के इस संबोधन ने वहां मौजूद लोगों को गहरे सोच में डाल दिया. उनके शब्दों ने न सिर्फ रामकथा के महत्व को उजागर किया, बल्कि जीवन के प्रति एक नया दृष्टिकोण भी दिया.
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