राजस्थान में तैयार हो रही 'आपदा मित्र' की फौज! युद्ध और संकट में सेना-पुलिस का बनेंगे सहारा
Rajasthan News: एनडीएमए साढ़े 12 हजार से अधिक युवाओं को ‘आपदा मित्र’ के रूप में प्रशिक्षित कर रहा है. संकट, युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं में ये युवा सेना, पुलिस व प्रशासन की मदद करेंगे.

पाकिस्तान सीमा से सटे राजस्थान में किसी भी तरह की आपदा या आपात स्थिति से निपटने के लिए बड़ी तैयारी की जा रही है. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) राज्य के साढ़े 12 हजार से ज्यादा युवाओं को युवा आपदा मित्र के रूप में तैयार कर रहा है. इन युवाओं को ऐसी ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि युद्ध, प्राकृतिक आपदा, आगजनी, बाढ़ या किसी अन्य संकट के समय वे सेना, पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर राहत और बचाव कार्यों में अहम भूमिका निभा सकें.
राजस्थान की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यह अभियान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. एक तरफ राज्य का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान की सीमा से जुड़ा हुआ है तो दूसरी तरफ यहां कई इलाके प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से भी संवेदनशील हैं. ऐसे में स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित युवाओं की मौजूदगी राहत कार्यों को तेज और प्रभावी बना सकती है.
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एनसीसी कैडेट्स पर खास फोकस
इस अभियान में बड़ी संख्या में एनसीसी कैडेट्स को शामिल किया गया है. अधिकारियों का मानना है कि एनसीसी के युवा पहले से ही अनुशासन, नेतृत्व और आपात परिस्थितियों में काम करने की बुनियादी ट्रेनिंग प्राप्त कर चुके होते हैं. साथ ही वे शारीरिक रूप से फिट और मानसिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण हालात का सामना करने के लिए तैयार रहते हैं.
इसी वजह से जयपुर स्थित एनसीसी मुख्यालय में भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. यहां सेना, पुलिस, प्रशासन और एनसीसी के अधिकारी अलग-अलग सत्रों में युवाओं को विभिन्न विषयों की जानकारी दे रहे हैं.
लेक्चर के साथ मॉक ड्रिल से भी सीख रहे युवा
ट्रेनिंग के दौरान युवाओं को केवल किताबों या लेक्चर तक सीमित नहीं रखा जा रहा है. उन्हें वास्तविक परिस्थितियों का अनुभव देने के लिए लगातार मॉक ड्रिल भी कराई जा रही हैं.
प्रशिक्षण में यह बताया जा रहा है कि आपदा के समय सबसे पहले क्या करना चाहिए, लोगों को सुरक्षित कैसे निकालना है, घायलों की मदद कैसे करनी है और प्रशासन के साथ किस तरह समन्वय बनाना है.
प्रशिक्षण के चौथे दिन जयपुर में एक इमारत में आग लगने की काल्पनिक स्थिति बनाकर मॉक ड्रिल कराई गई. इसके जरिए युवाओं को सिखाया गया कि संकट की घड़ी में घबराने के बजाय शांत रहकर कैसे काम करना चाहिए और कम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद कैसे की जा सकती है.
राहत टीमों के पहुंचने से पहले संभालेंगे मोर्चा
अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आपदा के दौरान सबसे अहम शुरुआती कुछ घंटे होते हैं. कई बार एनडीआरएफ और एसडीआरएफ जैसी विशेष टीमों को घटनास्थल तक पहुंचने में समय लग जाता है. ऐसे में स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित युवा सबसे पहले राहत और बचाव का काम शुरू कर सकते हैं.
यही वजह है कि इन युवाओं को आपदा मित्र के रूप में तैयार किया जा रहा है. स्थानीय होने के कारण उन्हें इलाके की बेहतर जानकारी होती है और वे जरूरतमंद लोगों तक तेजी से पहुंच सकते हैं. इससे जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी.
इस कार्यक्रम के तहत राजस्थान के 13 ऐसे जिलों पर विशेष फोकस किया गया है जो या तो पाकिस्तान सीमा से सटे हुए हैं या फिर प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं. इन इलाकों में प्रशिक्षित युवाओं का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद उपलब्ध कराई जा सके.
राजस्थान पुलिस के एडीजी रुपिंदर सिंह और आईजी परम ज्योति का कहना है कि आने वाले समय में ये युवा आपदा मित्र पुलिस और प्रशासन के लिए बड़े सहयोगी साबित होंगे. उनके मुताबिक यह केवल वर्तमान की जरूरत नहीं बल्कि भविष्य की मांग भी है.
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हर नागरिक को मिलनी चाहिए बुनियादी ट्रेनिंग
राजस्थान एनसीसी के डिप्टी डायरेक्टर जनरल संपत कुमार आनंद का मानना है कि केवल आपदा मित्र ही नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक को आपदा प्रबंधन की बुनियादी जानकारी और प्रशिक्षण मिलना चाहिए. इससे लोग आपात स्थिति में खुद को सुरक्षित रखने के साथ-साथ दूसरों की भी मदद कर सकेंगे.
वहीं प्रशिक्षण ले रहे एनसीसी कैडेट्स भी इस पहल को लेकर उत्साहित नजर आए. उनका कहना है कि आपदा मित्र के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त कर वे देश और समाज की सेवा करना चाहते हैं और जरूरत पड़ने पर लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहेंगे.

























