अजमेर जेल में जेलर सद्दाम का खेल, कैदियों को कराई वीडियो कॉल, सस्पेंड
Ajmer News In Hindi: अजमेर सेंट्रल जेल में जेलर सद्दाम हुसैन पर कैदियों को निजी मोबाइल से वीडियो कॉल कराने का आरोप लगा है. वीडियो सामने आने पर सस्पेंड किया गया.

अजमेर सेंट्रल जेल से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने जेल प्रशासन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस जेल में कैदियों की हर गतिविधि पर नजर रखने की जिम्मेदारी जेल अधिकारियों की होती है, वहीं जेलर सद्दाम हुसैन पर कैदियों को अपने निजी मोबाइल फोन से वीडियो कॉल कराने का आरोप लगा है. मामला सामने आने के बाद जेल विभाग में हड़कंप मच गया. जांच के बाद जेलर को सस्पेंड कर दिया गया है और उनके खिलाफ FIR भी दर्ज कराई गई है.
बताया जा रहा है कि जेलर सद्दाम हुसैन ने अजमेर सेंट्रल जेल में बंद कुछ कैदियों को अपने निजी मोबाइल फोन से वीडियो कॉल पर बातचीत कराई. हैरानी की बात यह है कि इस बातचीत में करीब 100 रेप के मामलों का मास्टरमाइंड बताए जा रहे कैदी नफीस चिश्ती को भी शामिल किया गया.
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वीडियो कॉल के दौरान जेलर सद्दाम हुसैन खुद भी मौजूद था. सामने आए वीडियो में जेलर को कैदी से बातचीत करते हुए देखा और सुना जा सकता है. बातचीत के दौरान जेलर सद्दाम हुसैन खुद भी वीडियो कॉल पर मौजूद रहा. वीडियो में जेलर को कैदी से 'ओके चाचा' कहते हुए भी सुना गया.
मामला सामने आने के बाद जेल विभाग ने इसे गंभीरता से लिया और पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी. जांच के बाद जेलर सद्दाम हुसैन को निलंबित कर दिया गया. निलंबन के बाद उन्हें श्रीगंगानगर जिले में अटैच किया गया है. इसके साथ ही मामले में FIR भी दर्ज कराई गई है.
तीन कैदियों की नफीस चिश्ती से कराई गई बात
जानकारी के मुताबिक, जेलर सद्दाम हुसैन ने अपने मोबाइल फोन से वीडियो कॉल पर जेल में बंद कैदी तारिक चिश्ती, उसके बेटे तौसीफ चिश्ती उर्फ चंकी और भांजे फखर जमाली को बात कराई थी. तीनों को साल 2014 में हुए एक जानलेवा हमले के मामले में 2025 में सात सात साल की सजा मिली थी.
इन तीनों की बातचीत करीब 100 रेप केस के आरोपी नफीस चिश्ती से कराई गई थी. नफीस चिश्ती पर सट्टा खिलवाने और ड्रग स्मगलिंग के भी आरोप हैं. बताया जा रहा है कि यह बातचीत कुछ हफ्तों पहले कराई गई थी. इनमें से दो आरोपी फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर आ चुके हैं.
रेप और ब्लैकमेलिंग के चर्चित मामले में आरोपी नफीस चिश्ती को उम्र कैद की सजा भी मिली थी. ऐसे में गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी कैदियों के बीच जेलर के निजी मोबाइल से वीडियो कॉल कराए जाने का मामला और ज्यादा गंभीर माना जा रहा है.
जेलर के मोबाइल से आखिर कैसे हुई वीडियो कॉल?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जेल के अंदर कैदियों को जेलर के निजी मोबाइल फोन से वीडियो कॉल की सुविधा आखिर कैसे मिली. जेल में मोबाइल फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर विषय माना जाता है. ऐसे में जेल अधिकारी के मोबाइल से कैदियों की वीडियो कॉल सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं.
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि जेलर ने कितने कैदियों को वीडियो कॉल कराई, किन-किन लोगों से उनकी बात कराई गई और ये कॉल कितनी देर चलीं. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि बातचीत के दौरान कैदियों ने किसी तरह की संवेदनशील या आपराधिक जानकारी तो साझा नहीं की.
अगर जांच में यह सामने आता है कि जेल के अंदर लंबे समय तक इस तरह की कॉल कराई जाती रही, तो इससे जेल की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर भी सवाल उठ सकते हैं.
अजमेर जेल में पहले भी मिल चुके हैं मोबाइल
अजमेर सेंट्रल जेल में मोबाइल फोन मिलने का यह पहला मामला नहीं है. जेल के अंदर पहले भी मोबाइल फोन और सिम मिलने की घटनाएं सामने आती रही हैं. कई बार तलाशी के दौरान कैदियों के पास से मोबाइल बरामद किए गए हैं और उनके खिलाफ मामले भी दर्ज हुए हैं.
ऐसे में जेलर के अपने मोबाइल फोन से ही कैदियों को वीडियो कॉल कराए जाने की बात सामने आने के बाद यह मामला सामान्य मोबाइल बरामदगी से कहीं ज्यादा गंभीर नजर आ रहा है. क्योंकि यहां आरोप जेल के अंदर मोबाइल पहुंचने का ही नहीं, बल्कि जेल अधिकारी के निजी मोबाइल के इस्तेमाल का भी है.
जगन गुर्जर की हत्या के बाद भी उठे थे सवाल
अजमेर की यह वही सेंट्रल जेल है, जहां थोड़े दिन पहले ही चंबल के कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई थी. उस मामले में भी खूब कोहराम मचा था. घटना के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता किए जाने का दावा किया गया था, लेकिन जिन पर यह जिम्मेदारी थी उन्होंने ही व्यवस्था को तार तार कर दिया.
ऐसे में अब जेलर सद्दाम हुसैन के मोबाइल से ही कैदियों को वीडियो कॉल कराए जाने की घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. खासकर ऐसे कैदियों से बातचीत कराए जाने की बात सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है, जिन पर गंभीर अपराधों के आरोप हैं.
FIR के बाद जांच में खुलेंगे कई राज
फिलहाल जेलर सद्दाम हुसैन के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ पुलिस स्तर पर भी जांच शुरू हो गई है. एफआईआर दर्ज होने के बाद यह पता लगाने की कोशिश होगी कि वीडियो कॉल का इस्तेमाल केवल बातचीत के लिए किया गया था या इसके पीछे कोई और मकसद भी था.
जांच में जेलर के मोबाइल की कॉल डिटेल, वीडियो कॉल और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड भी अहम हो सकते हैं. यह भी देखा जाएगा कि इस पूरे मामले में जेल के किसी दूसरे कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका थी या नहीं.
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जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि इस तरह की वीडियो कॉल कितनी बार हुईं और इसमें कितने कैदी शामिल थे. इसके अलावा जिन लोगों से कैदियों की बातचीत कराई गई, उनकी पहचान और बातचीत के मकसद को भी जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है.
फिलहाल जेलर सद्दाम हुसैन के सस्पेंड होने और श्रीगंगानगर अटैच किए जाने के बाद अजमेर सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं. जेलर के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में जेलर सद्दाम हुसैन की भूमिका को लेकर और क्या खुलासा होता है.























