राजस्थान: शादी में 5 तोला सोने से अधिक लेने-देने पर विराम, छोटे-बड़े का भेद मिटाने का लिया संकल्प
Rajasthan News: रियांबड़ी उपखंड के ग्राम पादूकलां में जाट समाज ने शादी में 5 तोला सोना सीमा तय कर दी है. साथ ही फिजूलखर्ची पर रोक और सामाजिक समानता का संकल्प लिया.

रियांबड़ी उपखंड के ग्राम पादूकलां में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर जाट समाज की ओर से श्री सूरजपुरी महाराज के स्थान पर एक विशाल सामाजिक बैठक का आयोजन किया गया. इस बैठक में समाज सुधार को लेकर कई महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसले लिए गए, जिनका उद्देश्य सामाजिक समानता, सादगी और आपसी सौहार्द को बढ़ावा देना है. बुजुर्गों, युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों की सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि शादी-विवाह में पांच तोला सोने से अधिक लेने-देने की परंपरा पर पूरी तरह विराम लगाया जाएगा.
साथ ही विवाह, मायरा (भात) और मृत्युभोज में हो रही फिजूलखर्ची पर सख्त रोक लगाने का संकल्प लिया गया. समाज में छोटे-बड़े और अमीर-गरीब के बीच बढ़ते भेदभाव को समाप्त कर समानता आधारित सामाजिक व्यवस्था बनाने का भी सामूहिक संकल्प व्यक्त किया गया.
शादी में तय की गई सिर्फ 5 तोला सोने के जेवरात देने-लेनी की सीमा
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सोने-चांदी के तेजी से बढ़ते दामों और दिखावे की बढ़ती प्रवृत्ति ने गरीब, किसान और मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डाल दिया है. कई परिवार सामाजिक दबाव के कारण कर्ज लेने तक को मजबूर हो जाते हैं. साथ ही विवाह समारोहों में अधिक खर्च करने वाले और साधारण परिवारों के बीच सामाजिक दूरी भी बढ़ रही है. इस स्थिति को समाप्त करने के उद्देश्य से समाज ने एकजुट होकर सादगी अपनाने का संकल्प लिया. निर्णय के अनुसार, लड़के की शादी हो या लड़की की. दोनों ही स्थिति में अधिकतम 5 तोला सोने के जेवरात देने-लेने की सीमा तय की गई है. इससे अधिक सोना देने-लेने पर सामाजिक रोक रहेगी.
मृत्युभोज में कपड़ों के लेन-देन की परंपरा होगी समाप्त
इसके साथ ही विवाह में बर्तन बांटने की प्रथा पूर्णतः बंद करने, मायरा (भात) में सादगी अपनाने तथा कपड़ों के स्थान पर सीमित व प्रतीकात्मक राशि देने पर सहमति बनी. मृत्युभोज में कपड़ों के लेन-देन की परंपरा समाप्त कर लिफाफे में सीमित राशि देने की व्यवस्था लागू की जाएगी. हल्दी व मेहंदी जैसे अलग-अलग आयोजनों को सीमित कर विवाह संस्कार सादगीपूर्ण ढंग से संपन्न कराने पर जोर दिया गया.
समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि इन निर्णयों का मुख्य उद्देश्य आर्थिक संतुलन स्थापित करना, सामाजिक समानता को बढ़ावा देना तथा छोटे-बड़े और आम परिवारों के बीच भेदभाव की भावना को समाप्त करना है. बैठक के अंत में सभी सदस्यों ने इन निर्णयों की पूर्ण पालना करने और समाज में एकता व सादगी की परंपरा को मजबूत करने का सामूहिक संकल्प लिया.
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Source: IOCL




























