राजस्थान: 'वनवासी' शब्द के खिलाफ सड़कों पर उतरी भारत आदिवासी पार्टी, बड़े आंदोलन की चेतावनी
Rajasthan Politics: भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायक उमेश डामोर के नेतृत्व में आज दोवड़ा चौराहे पर पार्टी कार्यकर्ताओं और आदिवासी समाज ने जोरदार प्रदर्शन किया. और पुतला फूँका.

राजस्थान के डूंगरपुर जिले में आदिवासी समाज को 'वनवासी' कहे जाने के विरोध में सियासत पूरी तरह गर्मा गई है. डूंगरपुर की आसपुर विधानसभा से भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायक उमेश डामोर के नेतृत्व में आज दोवड़ा चौराहे पर पार्टी कार्यकर्ताओं और आदिवासी समाज ने जोरदार प्रदर्शन किया. आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने देश के गृह मंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया. बीएपी का साफ कहना है कि आदिवासी समाज को 'वनवासी' कहना उनकी सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक सम्मान पर सीधा आघात है.
इसके साथ ही महंगाई, बेरोजगारी और बिजली-पानी के साथ ही आम लोगों से जुड़े मुद्दों को लेकर भी ज्ञापन देकर उचित कदम उठाने की मांग की है, और जल्द कीमतें कम न होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है.
यह भी पढ़ें: राजस्थान के कई हिस्सों में बारिश से बदला मौसम, भीषण गर्मी से मिली राहत
आदिवासी शब्द को लेकर भड़की पार्टी
डूंगरपुर के दोबड़ा चौराहे पर बड़ी संख्या में भारत आदिवासी पार्टी के बैनर तले युवाओं, महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे आसपुर विधायक उमेश डामोर ने सरकार को घेरते हुए कहा कि भारतीय संविधान और सरकारी दस्तावेजों में सिर्फ 'आदिवासी' शब्द ही मान्य और सम्मानजनक है. शासकीय या सार्वजनिक मंचों से किसी अन्य शब्द का प्रयोग समाज बर्दाश्त नहीं करेगा.
पुतला दहन के बाद आक्रोशित कार्यकर्ताओं का काफिला दोवड़ा तहसील कार्यालय पहुंचा, जहां तहसीलदार को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया. इस ज्ञापन में सिर्फ अस्मिता का सवाल ही नहीं, बल्कि आसपुर विधानसभा क्षेत्र की कई ज्वलंत और मूलभूत समस्याओं को भी पुरजोर तरीके से उठाया गया.
इन मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
अस्मिता की लड़ाई- सरकारी और सार्वजनिक मंचों पर केवल संवैधानिक शब्द 'आदिवासी' का ही उपयोग हो.
महंगाई की मार- पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों पर तुरंत लगाम लगे.
किसान संकट- किसानों को समय पर खाद-बीज मिले और कालाबाजारी पर सख्त रोक लगे.
मूलभूत सुविधाएं- अघोषित बिजली कटौती बंद हो और 'जल जीवन मिशन' के तहत हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचे.
रोजगार और पेंशन- युवाओं के लिए रोजगार, सामाजिक सुरक्षा पेंशन का नियमित भुगतान और मनरेगा में पारदर्शिता.
लोकतंत्र- पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव समय पर आयोजित कराए जाएं.
फिलहाल, भारत आदिवासी पार्टी ने क्षेत्र के विकास और आदिवासी समाज के सम्मान की रक्षा के लिए आर-पार की लड़ाई का संकल्प ले लिया है. अब देखना यह होगा कि इस तीखे प्रदर्शन और चेतावनी के बाद सरकार का क्या रुख रहता है ?
Source: IOCL























