सिरोही: मंत्री ओटाराम देवासी के वायरल वीडियो पर मचा घमासान, खनन संघर्ष समिति ने लगाए गंभीर आरोप
Sirohi Mining Project: पिंडवाड़ा क्षेत्र में आक्रोश चरम पर है. राज्यमंत्री ओटाराम देवासी के वायरल वीडियो के बाद चार ग्राम पंचायतों और 12 गांवों में बवाल नजर आ रहा है.

राज्य मंत्री ओटाराम देवासी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सिरोही जिले के पिंडवाड़ा क्षेत्र में सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है. वीडियो में मंत्री देवासी के साथ जालौर–सिरोही सांसद लुम्बाराम चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी, समाराम गरासिया, विधायक पिंडवाड़ा-आबू सहित अन्य नेता नजर आ रहे हैं. संघर्ष समिति ने उनके बयान पर गंभीर आरोप लगाते हुए सवाल खड़े किए हैं.
वीडियो में मंत्री देवासी कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर यह कहते दिख रहे हैं कि लोगों को भ्रमित किया जा रहा है, किसी की जमीन नहीं जा रही है. इस बयान के सामने आते ही पिंडवाड़ा क्षेत्र की चार ग्राम पंचायतों और 12 गांवों के लोगों में सोशल मीडिया और प्रत्यक्ष रूप से आक्रोश फैल गया. खनन संघर्ष समिति ने मंत्री के बयान को आधी सच्चाई बताते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
मामले पर संघर्ष समिति का क्या कहना है?
संघर्ष समिति का कहना है कि यदि वास्तव में किसी की जमीन नहीं जा रही है, तो फिर खनन परियोजना से जुड़ी पूरी प्रक्रिया क्यों और कैसे शुरू की गई. समिति ने सवाल उठाए कि जब जमीन अधिग्रहण का मुद्दा नहीं था, तो पर्यावरणीय जनसुनवाई क्यों करवाई गई?
जनसुनवाई के दौरान स्थानीय लोगों की आपत्तियों को क्यों नजर अंदाज किया जा रहा है. क्यों उस पर सरकार एक्शन नहीं ले रही है. समिति ने कहा कि जनसुनवाई को अभी तक निरस्त नहीं किया गया. आखिर किस दबाव में इस खनन परियोजना को आगे बढ़ाया गया?
संघर्ष समिति ने सीएम से मुलाकात पर उठाए सवाल
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात को लेकर भी सवाल उठाए हैं. समिति का कहना है कि यदि मामला इतना सरल था, तो मुख्यमंत्री से मुलाकात की जरूरत क्यों पड़ी? जब वार्ता के बाद भी समाधान नहीं निकला, तो यह क्यों कहा गया कि वार्ता विफल होने की बात बाहर मीडिया में न बताएं? समिति का आरोप है कि जनता को भ्रमित करने के लिए आधी-अधूरी जानकारी फैलाई जा रही है.
TOR-SDM का पत्र और कागजी हेरफेर के आरोप
संघर्ष समिति ने प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं. कमलेश मेटाकास्ट का TOR किस आधार पर तैयार किया गया? समिति ने आगे कहा कि पिंडवाड़ा SDM के उस पत्र का आधार क्या था, जिसमें प्रस्तावित क्षेत्र में एक भी कीमती पेड़ नहीं, केवल कांटेदार झाड़ियां होने की बात कही गई? एक और सवाल उठाते हुए कहा गया कि सिंचित भूमि को असिंचित कैसे दर्शाया गया? कथित गलत तथ्यों पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
598 घर विस्थापन और फर्जी सहमति पत्रों का मुद्दा
संघर्ष समिति का दावा है कि कागजों में 598 घरों के विस्थापन का उल्लेख है, जो सीधे तौर पर मंत्री के 'जमीन नहीं जा रही' वाले बयान पर सवाल खड़ा करता है. इसके साथ ही ग्रामीणों से फर्जी सहमति पत्र लेने के आरोप भी लगाए गए हैं. समिति का कहना है कि इस मामले में रोहिड़ा व स्वरूपगंज थाने में रिपोर्ट दी गई, लेकिन अब तक कार्रवाई का कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला न ही मामला दर्ज हुआ ऐसा क्यों?
स्थानीय लोगों का कहना है क्षेत्र की पीड़ित जनता पिछले तीन महीने से जल, जमीन और जंगल के लिए सड़क पर संघर्ष कर रहीं है. राज्य मंत्री कितनी बार सीधे जनता के बीच आए? संघर्ष समिति ने खुली चुनौती देते हुए कहा है कि मंत्री चार ग्राम पंचायतों और 12 गांवों की जनता के सामने आएं, हम हर सवाल का जवाब हर दस्तावेज के साथ देंगे.
1700 करोड़ का MOU और सीमेंट प्लांट की जमीन पर भी सवाल
संघर्ष समिति ने यह भी पूछा कि खनन प्रस्ताव के पीछे किसका दबाव था. सिरोही ADM को कंपनी के लिए सीमेंट प्लांट की जमीन उपलब्ध कराने का पत्र क्यों लिखना पड़ा. साथ ही राज्य सरकार ने 1700 करोड़ रुपये का MOU किन शर्तों पर किया?
संघर्ष समिति ने लगाया आरोप
संघर्ष समिति का आरोप है कि आगामी पंचायती राज चुनाव को देखते हुए भाजपा नेतृत्व की बेचैनी साफ नजर आ रही है. अवैध जुए, मिट्टी खनन, राम झरोखे जमीन विवाद, पिंडवाड़ा रेलवे जंक्शन का लंबित मुद्दा और अरावली संरक्षण जैसे विषयों ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
संघर्ष समिति का दावा है कि 28 जनवरी को प्रस्तावित आंदोलन से सरकार और भाजपा में घबराहट है. समिति ने दो-टूक कहा कि इस बार पंचायती राज चुनाव में जनता करारा जवाब देगी.
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Source: IOCL






















