Rajasthan Politics: मंदिर के पुजारियों के लिए मासिक भत्ता, राजनीतिक भागीदारी सहित कई मांगें, 19 मार्च से विप्र सम्मेलन
Jaipur News: जयपुर में इससे पहले क्षत्रिय युवक संघ की बैठक और जाट महाकुंभ हो चुका है. जाटों की सभा में कुछ नेताओं ने तो सरकार में अपना प्रतिनिधित्व बढ़ाने की बात भी कही थी.

Rajasthan News: राजस्थान पूरी तरह से चुनावी मोड में जा चुका है. यहां विधानसभा चुनाव होने में अभी महज 9 महीने ही बचे हैं, लेकिन उसके पहले ही सम्मेलनों का दौर शुरू हो गया है. जयपुर में तीन मार्च को क्षत्रिय समाज ने अपना सम्मेलन किया था. उसके बाद पांच मार्च को जाट महाकुंभ हुआ था. अब 19 मार्च को जयपुर में विप्र सम्मेलन होने जा रहा है. जयपुर से ही ये सभी सम्मेलन शुरू हुए हैं. जातिगत सम्मेलनों के आयोजकों का कहना है कि यहां से कोई राजनीतिक बात नहीं होगी.
क्षत्रिय समाज की हुई थी बैठक
पिछले 3 मार्च को जयपुर में क्षत्रिय युवक संघ के बैनर तले बैठक हुई थी. इस बैठक में कई राजनीतिक दलों के क्षत्रिय सांसद और विधायक के साथ पूर्व विधायक शामिल हुए थे. यह बैठक जयपुर स्थित संघ शक्ति मुख्यालय में आयोजित हुई. जानकारी के अनुसार क्षत्रिय युवक संघ की इस बैठक में संघ के संरक्षक भगवान सिंह रोलसाहबसर और प्रताप फाउंडेशन के संयोजक महावीर सिंह सरवड़ी शामिल हुए थे. राजस्थान सरकार के ऊर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, विभिन्न पार्टियों और निर्दलियों समेत सभी विधायक शामिल हुए. इस दौरान राजपूत समाज ने अपने EWS आरक्षण की सीमा बढ़ाने जैसे कई मुद्दों पर मंथन किया.
जाटों ने दिखाई थी ताकत
पांच मार्च को जयपुर के विद्याधरनगर में जाट महाकुंभ हुआ था, जहां पर सभी दल के जाट नेता शामिल हुए थे. जाटों का यह महाकुंभ 23 साल बाद आयोजित हुआ था. इस दौरान जाट महाकुंभ के संरक्षक राजराम मील ने कहा कि जब जाटों की बात सरकार में नहीं सुनी जाने लगी तो अब महाकुंभ किया जा रहा है. इस मंच से जाट सीएम की भी मांग उठी. इसी मंच से जाटों के सभी नेता अपने समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी बताई. यहा जाट महाकुंभ भले ही जयपुर में हुआ हो, लेकिन इसमें पूरे प्रदेश के जाट नेता शामिल हुए थे. जाट नेता बसों और अन्य माध्यमों से जयपुर पहुंचे थे. यहां सभी जाट नेताओं ने विधिवत तरीके से अपनी बात रखी. इस सभा में जाटों के आरक्षण की भी मांग उठी थी. कुछ नेताओं ने तो सरकार में अपना प्रतिनिधित्व बढ़ाने की बात भी कही.
अब विप्र सम्मेलन की बारी
जयपुर के विद्याधरनगर में अब 19 मार्च को विप्र सम्मेलन होने जा रहा है. इस सम्मेलन के मुख्य आयोजक सुनील तिवाड़ी का कहना है कि यह गैरराजनीतिक कार्यक्रम है. यहां से बस विप्र समाज के लिए आवाज उठेगी. यहां से कोई राजनीतिक बातें नहीं होगी. सुनील तिवाड़ी का कहना है कि यह कार्यक्रम वर्षों बाद हो रहा है. इसमें कुछ प्रमुख मांगें हैं, जिनपर चिंतन होगा. मंदिर के पुजारियों की मूल-भूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए केंद्र और राज्य सरकार मासिक भत्ता प्रदान करें. साथ ही निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करने की कोशिशों पर रोक लगाने को लेकर बात करेंगे. सुनील तिवाड़ी ने कहा कि इस सम्मेलने में ब्राह्मण बाहुल्य सीटों से समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिए जाने और केंद्र सरकार विप्र कल्याण आयोग का गठन करने और परशुराम जयंती के दिन राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की मांग होगी.
ये भी पढ़ें: Watch: गहलोत सरकार के मंत्री ने किरोड़ी लाल मीणा को कहा 'आतंकी', अब हो रहा रिएक्शन
Source: IOCL























