मराठी सीखने के लिए 1 साल का समय, रिक्शा-टैक्सी ड्राइवर्स पर बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई के ऑटो और टैक्सी चालकों को राहत देते हुए बोलचाल की मराठी भाषा सीखने के लिए एक वर्ष का समय देने का फैसला लिया है. पिछले कई दिनों से इस पर सियासत हो रही थी.

महाराष्ट्र में रिक्शा और टैक्सी चालकों को मिली बड़ी राहत मिली है. राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. गैर-मराठी रिक्शा और टैक्सी चालकों को बोलचाल की मराठी सीखने के लिए एक साल की मोहलत दी गई है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि रिक्शा-टैक्सी चालक संगठनों के प्रमुख उनसे मिले थे. उन्होंने चालकों की ओर से मराठी सीखने के लिए एक साल का अतिरिक्त समय मांगा था.
सीएम देवेंद्र फडणवीस ने आगे कहा कि संगठनों की मांग को स्वीकार करते हुए सरकार ने उन्हें एक साल की मोहलत देने का फैसला किया है. इस एक साल की अवधि में मराठी न आने पर सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी.
कैब ड्राइवर्स ने बॉम्बे HC का खटखटाया दरवाजा
मुंबई के चार कैब ड्राइवर्स ने मंगलवार (25 अगस्त) को बॉम्बे हाई कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसके जरिये ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप-आधारित कैब चालकों के लिए मराठी भाषा का कामकाजी ज्ञान होना अनिवार्य बनाया गया था. याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार के फैसले को आम लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया था.
किसी की रोजी-रोटी छीनने का कोई इरादा नहीं- प्रताप सरनाईक
महाराष्ट्र में ट्रांसपोर्ट विभाग ने 20 अगस्त 2026 से पूरे प्रदेश में एक अभियान शुरू किया था, ताकि गैर-मराठी टैक्सी और ऑटो-रिक्शा ड्राइवर्स की मराठी भाषा की जानकारी की जांच की जा सके. राज्य के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर प्रताप सरनाईक ने हाल ही में कहा था कि सरकार का किसी की रोज़ी-रोटी छीनने का कोई इरादा नहीं है, वह बस इतना चाहती है कि महाराष्ट्र में काम करने वाले लोग राज्य की भाषा और संस्कृति को सीखें और उनका सम्मान करें.
मुंबई में कई जगह ऑटो और टैक्सी ड्राइवर्स ने किया था प्रदर्शन
राज्य सरकार के मराठी भाषा की जानकारी से जुड़े अभियान के तहत भारी जुर्माने की अफवाहों की वजह से ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों ने विरोध प्रदर्शन भी किया था. मुंबई के कुछ हिस्सों में कई ऑटो और टैक्सी चालक सड़क पर उतरकर इस फैसले का विरोध किया था, जिसके बाद सीएम देवेंद्र फडणवीस को दखल देना पड़ा. मुख्यमंत्री ने पहले कहा कि सरकार की इस मुहिम का मकसद ड्राइवरों को भाषा का एक्सपर्ट बनाना नहीं, बल्कि यह पक्का करना था कि वे अपने काम के लिए स्थानीय भाषा में बातचीत कर सकें.
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