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महाराष्ट्र में हिंदी भाषा को लेकर क्यों मचा है बवाल? क्या है राज ठाकरे की मांग, समझें पूरा विवाद

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में हिंदी भाषा को लेकर जमकर बवाल मचा हुआ है. राज ठाकरे की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कई जगह हिंदी की किताबों को फाड़ दिया.

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में गरमाया हिंदी और मराठी भाषा का मुद्दा, इस बार स्कूली बच्चों को स्कूल में हिंदी पढ़ाए जाने का विवाद फिर उठा है. मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी भाषा में सरकार को धमकी देते हुए कहा कि देखते है कि स्कूल छात्रों को हिंदी कैसे पढ़ाते है , जिसके बाद से अलग अलग स्कूलों के जाकर मनसे कार्यकर्ता प्रिंसिपल को पत्र दे रहे है तो कही कही हिंदी की किताब को भी जलाया गया.

महाराष्ट्र में स्कूलों में हिंदी भाषा पढ़ाने को लेकर अनिवार्यता शब्द हटाया गया लेकिन मराठी और अंग्रेजी के बाद तीसरी भाषा के तौर पर पढ़ाया जाएगा यह बात राज्य सरकार के नए जीआर से साफ हुआ . लेकिन कक्षा 1 से 5 तक अब तीसरे भाषा के रूप में हिंदी पढ़ाने के संबंध में अनिवार्य शब्द को वापस ले लिया गया है, लेकिन सामान्य रूप से हिंदी को तीसरे भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा. स्कूल शिक्षा विभाग का नया सरकारी निर्णय जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है, कि कक्षा 1 से त्रिभाषा फॉर्मूला अपनाया जाएगा, यदि कक्षा में 20 से अधिक छात्र हिंदी के बजाय अन्य भाषा सीखना चाहते हैं तो शिक्षक उसे उपलब्ध कराएंगे या उस भाषा को ऑनलाइन पढ़ाया जाएगा. 

आक्रामक हुई राज ठाकरे की पार्टी
अब इसके बाद मनसे ने आक्रामक भूमिका अपनाई है, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने जो पहली से पांचवीं तक हिंदी के सख्ती का निर्णय लिया है, 17 जून को मैंने पत्र लिखा था कि ऐसा ना करें. हिंदी कोई राष्ट्र भाषा नहीं है . आज मैं राज्य के सभी स्कूलों के प्रिंसिपल को पत्र भेज रहा हूं. मुझे सीएम ने कहा था कि हम हिंदी अनिवार्यता का फैसला वापस ले रहे हैं, जिसके चलते मैंने 5 दिन पहले यह पत्र लिखा था जो अब मैं स्कूल के प्रिंसिपल को भेज रहा हूं.'' उन्होंने कहा कि हिंदी सिर्फ एक राज्य भाषा है राष्ट्र की नहीं है. नए बच्चों को यह सब ना सिखाएं. उसे जो भाषा सिखनी है, बड़े होकर समझ जाएगा. आईएएस लॉबी का दबाव है क्या? तो यहां तीसरी भाषा का दबाव क्यों है?

मनसे कार्यकर्ताओं ने फाड़ी हिंदी की किताबें
राज ठाकरे के बयान के बाद जगह जगह महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ता और पद अधिकारी स्कूलों में पहुंचकर स्कूल के प्राध्यापक से मिलकर उन्हें पत्र दे रहे है. लेकिन मनसे कार्यकर्ता इतने पर भी नहीं रुके है बल्कि उनकी तरफ से बाकायदा दुकानों से हिंदी की किताब खरीद कर फाड़ा और जलाया जा रहा है . कही कही तो किताब को फाड़कर हवा में उड़ा दिया गया है.

शिक्षा मंत्री ने दी ये सफाई
हालांकि इस पर शिक्षा मंत्री दादा भूसे ने सफाई भी दी है . शिक्षा मंत्री ने कहा कि, मेरा आपसे एक निवेदन है कि नए सरकारी निर्णय में अनिवार्य शब्द कहां है,.सबसे पहले तो सभी माध्यम के स्कूलों में मराठी अनिवार्य है.चाहे अंग्रेजी हो या अन्य माध्यम के स्कूल, यह अनिवार्य है. पिछले कुछ सालों से कक्षा 5 से हिंदी एक विषय है, कुछ भाषा विद्यालय हैं, उनकी भाषा मराठी है और तीसरी भाषा हिंदी है, जो कुछ सालों से पढ़ाई जा रही है.. कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों को जो तीसरी भाषा में रुचि रखते हैं, उन्हें एक तीसरी भाषा प्रदान करने का निर्णय लिया गया है .

कांग्रेस की भी आई प्रतिक्रिया
अब इसको लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है, कांग्रेस भी इस मामले में कूदी है. राज्य सरकार को घेरते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि तीन भाषा का फॉर्मूला पंडित नेहरू ने लागू किया था, जो हर मातृ भाषा का संरक्षण होना चाहिए. अगर हिंदी सख्ती को लाद रहे हैं यह इलॉजिकल है, मराठी सिर्फ एक भाषा नहीं है संस्कृति है. 

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि, हम सब लोग अंग्रेजी का पुरस्कार करते हैं और भारतीय भाषाओं का तिरस्कार करते हैं, ये सही नहीं है. मैंने राज ठाकरे से बात की है, उन्होंने कहा कि केवल दो भाषाएँ होनी चाहिए और तीसरी भाषा न थोपें. मैंने उनसे कहा कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में उचित विचार-विमर्श के साथ पूरे देश में 3 भाषा नीति लाई है. एनईपी पूरे देश के लिए है और महाराष्ट्र दो भाषा नीति नहीं अपना सकता. तमिलनाडु 3 भाषा नीति के खिलाफ अदालत गया था, जिसे अदालत ने भी स्वीकार नहीं किया. अपनी क्षेत्रीय भाषा सीखते समय, यदि कोई छात्र एक अतिरिक्त भाषा सीखता है, तो इसमें क्या गलत है? अतिरिक्त भाषा उनके ज्ञान को बढ़ाने में मदद करेगी. विशेषज्ञों के साथ व्यापक चर्चा के बाद एनईपी लाया गया था.

सीएम ने आगे कहा कि  हमने नई जीआर में तीसरी भाषा के रूप में हिंदी भाषा को अनिवार्य करने की शर्त को हटा दिया है. अब आप किसी भी भारतीय भाषा को तीसरी भाषा के रूप में चुन सकेंगे. 3 भाषा नीति एनईपी के अनुसार है. यदि किसी विशेष भारतीय भाषा को सीखने के लिए लगभग 20 छात्र उपलब्ध हैं, तो शिक्षक उपलब्ध कराया जाएगा या इसे ऑनलाइन भी पढ़ाया जा सकता है. मैं केवल एक बात कहना चाहता हूं कि हम सभी अंग्रेजी भाषा की प्रशंसा करते हैं और भारतीय भाषाओं का अनादर करते हैं, यह सही नहीं है. भारतीय भाषाएं अंग्रेजी से कहीं बेहतर हैं.

'एमपी-यूपी में कौनसी होगी तीसरी भाषा'
लेकिन राज ठाकरे ने एक बड़ा जो मुद्दा उठाया है उस पर सरकार पक्ष से कोई जवाब नहीं आया है .यूपी में तीसरी कौन सी भाषा सिखाएंगे- राज ठाकरे राज ठाकरे ने कहा, ''उत्तर प्रदेश में तीसरी भाषा कौनसी सिखाएंगे. शिक्षा मंत्री कह रहे हैं, यह ऑप्शनल भाषा है तो 6वीं से रखो ना पहली से क्यों करना है. यह तो राज्य भाषा है, तो यह भाषा क्यों थोप रहे हैं? यूपी, बिहार और एमपी में तीसरी भाषा क्या मराठी सिखाएंगे. गुजरात में भी हिंदी जरूरी नहीं है .

क्या है महाराष्ट्र सरकार का आदेश? 
महाराष्ट्र सरकार के आदेश के अनुसार, मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पहली से पांचवी कक्षा तक के सभी छात्र अब अनिवार्य रूप से तीसरी भाषा के रूप में हिंदी का अध्ययन करेंगे. जो छात्र हिंदी के विकल्प के रूप में कोई अन्य भाषा सीखना चाहते हैं, उनकी संख्या 20 से अधिक होनी चाहिए . हालांकि देखना होगा कि बीएमसी चुनाव से पहले मनसे की इस नई भूमिका पर राज्य सरकार का अगला रुख क्या होगा, क्योंकि बच्चों के स्कूल खुल चुके हैं और किताबें भी खरीदी जा चुकी है.

नम्रता अरविंद दुबे 10 वर्षों से अधिक समय से टीवी पत्रकारिता में विभिन्न मुद्दों को कवर कर रही हैं. वर्तमान में ABP न्यूज़ में बतौर संवाददाता कार्यरत हैं.

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