'मौत को गले लगाने से पहले परेशान चल रहा था', मुंबई में 16 साल के छात्र सुसाइड मामले में चाचा का बड़ा खुलासा
Suicide Case: 16 वर्षीय छात्र की आत्महत्या के मामले में परिवार ने स्कूल पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया. छात्र ने नोट में शिक्षकों के नाम लिखे थे. परिजनों ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की है.

मुंबई में 16 वर्षीय छात्र की आत्महत्या के मामले ने शिक्षा व्यवस्था और स्कूल में होने वाली प्रताड़ना पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. छात्र के चाचा आदेश मुले ने परिवार की व्यथा और घटना से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को साझा करते हुए कहा कि उनके भतीजे को लंबे समय से मानसिक दबाव और स्कूल-स्तरीय उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा था.
आदेश मुले के अनुसार, घटना के तुरंत बाद ही छात्र के पिता, जो उस समय महाराष्ट्र में थे. उनको एक अनजान नंबर से कॉल आया. परिवार को जैसे ही इस दुर्घटना की जानकारी मिली, वे फौरन मेट्रो स्टेशन पहुंचे. वहां पहुंचकर उन्होंने देखा कि लोग बच्चे को अस्पताल ले जा रहे थे. अस्पताल पहुंचने तक परिवार को उम्मीद थी कि शायद बच्चे को बचाया जा सके, लेकिन प्रयास विफल रहे.
भविष्य में एक्टर बनना चाहता था छात्र
परिवार ने बताया कि छात्र बेहद क्रिएटिव, संवेदनशील और कला प्रेमी था. वह भविष्य में एक्टर बनने का सपना देखता था और अपनी प्रतिभा पर कड़ी मेहनत कर रहा था. लेकिन उसके आत्महत्या नोट में जिन शिक्षकों के नाम लिखे गए हैं, वे पिछले कई महीनों से उसे अपमानित और परेशान कर रहे थे. आदेश मुले ने कहा कि बच्चा पिछले 4–5 महीनों से शिक्षकों की शिकायत करता आ रहा था.
चार दिन से मानसिक रूप से परेशान चल रहा था छात्र
घटना के बाद मिली जानकारी के अनुसार, छात्र के दोस्तों ने भी बताया कि घटना से पहले के अंतिम चार दिनों में शिक्षकों द्वारा ताने मारने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की घटनाएं बढ़ गई थीं. उन्होंने कहा कि बच्चे की मनोदशा इन चार दिनों में लगातार बिगड़ती गई, लेकिन स्कूल की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
परिवार का कहना है कि बच्चे के माता-पिता ने स्कूल प्रिंसिपल और संबंधित शिक्षकों से कई बार इस मुद्दे पर बात की थी, लेकिन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया और जब यह दर्दनाक घटना हुई, तब भी एफआईआर दर्ज कराने में पांच घंटे लग गए.
परिवार ने स्कूल प्रबंधन पर उठाए लापरवाही के आरोप
आदेश मुले ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन की लापरवाही और संवेदनहीनता इस दुखद घटना के लिए जिम्मेदार है. उनका कहना है कि जब तक परिवार और अन्य अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन नहीं किया, तब तक मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया. प्रदर्शन के बाद ही अधिकारियों ने जांच की रफ्तार बढ़ाई, लेकिन शिक्षकों पर कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट बयान अब तक नहीं आया है.
परिवार और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि छात्रों की शिकायतें और अभिभावकों की समस्याएं हल करने के लिए एक स्वतंत्र प्रणाली बनाई जाए. आदेश मुले ने कहा कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, वे अपना शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखेंगे, ताकि भविष्य में कोई और बच्चा ऐसी त्रासदी का शिकार न बने.
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Source: IOCL



























