Mumbai News: मुंबई पुलिस में मेडिकल और LTA बिलों की देरी पर जांच, रिकॉर्ड गायब मिलने से बढ़ा संदेह
Mumbai News In Hindi: मुंबई पुलिस के मेडिकल व LTA बिलों में देरी पर गृह विभाग ने जांच शुरू कर दी है. रिकॉर्ड गायब मिलने से गड़बड़ी की आशंका भी बढ़ गई है. रिपोर्ट के बाद कार्रवाई संभव है.

मुंबई पुलिस कर्मियों द्वारा मेडिकल रिइम्बर्समेंट, लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA) और अन्य बिलों के भुगतान में हो रही देरी की शिकायतों के बाद महाराष्ट्र सरकार के गृह विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं. कई शिकायतों में बताया गया कि 2024 से लंबित बिल अब तक क्लियर नहीं हुए हैं, जबकि इनके लिए फंड पहले ही मंजूर किए जा चुके थे.
सूत्रों के मुताबिक, गृह विभाग की एक टीम को हाल ही में नॉर्थ रीजन भेजा गया था, जहां प्रशासनिक अधिकारी ज्योत्सना शेख से संबंधित दस्तावेज और जानकारी जुटाई जानी थी. हालांकि, जांच के दौरान अधिकारियों को उम्मीद के मुताबिक रिकॉर्ड नहीं मिले. जिससे मामले में और संदेह पैदा हो गया है.
लंबित बिलों का कोई नहीं मिला रिकॉर्ड
जानकारी के अनुसार, जांच टीम को लंबित बिलों का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड या फाइल नहीं मिली. केवल कुछ चुनिंदा बिलों का जिक्र दिखाया गया, जो संदिग्ध प्रतीत हुआ. एक वरिष्ठ अधिकारी ने ABP न्यूज को बताया कि न तो कोई पूरा रजिस्टर मिला और न ही सही दस्तावेज, जिससे रिकॉर्ड में गड़बड़ी की आशंका बढ़ गई है.
इससे पहले भी गृह विभाग ने ज्योत्सना शेख से देरी को लेकर जवाब मांगा था, लेकिन उन्होंने बार-बार संपर्क के बावजूद कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया. उन्हें विभाग के सामने पेश होने के लिए भी कहा गया था, लेकिन उन्होंने इसका पालन नहीं किया. इसके बाद एक टीम बनाकर मौके पर जांच की गई. टीम जब मुंबई पुलिस के नॉर्थ रीजन ऑफिस पहुंची, तब भी पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए. टीम को केवल 2-3 एंट्री दिखाई गईं, जबकि बाकी रिकॉर्ड गायब पाए गए.
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समय पर क्लियर नहीं हो रहे मेडिकल और LTA
नियमों के अनुसार, मेडिकल और LTA जैसे रिइम्बर्समेंट 3 से 6 महीने के भीतर क्लियर होने चाहिए, लेकिन कई मामलों में एक साल से अधिक की देरी सामने आई है. अधिकारियों का कहना है कि फंड उपलब्ध होने के बावजूद बिल क्लियर नहीं होना गंभीर सवाल खड़े करता है. इस देरी का सीधा असर पुलिस कर्मियों पर पड़ा है. जिन्हें इलाज, आरोपियों की तलाश में यात्रा और फॉरेंसिक प्रक्रियाओं पर अपनी जेब से खर्च करना पड़ा है. उन्हें समय पर भुगतान की उम्मीद थी, जो पूरी नहीं हो सकी.
अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही जांच टीम
सूत्रों के अनुसार, रिकॉर्ड की कमी और सहयोग न मिलने से अनियमितताओं की आशंका मजबूत हो रही है. फिलहाल जांच टीम अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है. जिसे जल्द ही गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा जाएगा. रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी और जरूरत पड़ने पर मामला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तक भी पहुंच सकता है.
अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जांच का दायरा नॉर्थ रीजन से आगे बढ़ाया जा सकता है. यदि जरूरत पड़ी तो मुंबई और राज्य के अन्य हिस्सों में भी ऐसे मामलों की जांच की जा सकती है. जांच के निष्कर्ष के आधार पर संबंधित अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई या पुलिस विभाग में रिइम्बर्समेंट सिस्टम का व्यापक ऑडिट किया जा सकता है.
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Source: IOCL

























