महाराष्ट्र के ठाणे रिश्ते शर्मसार, नाबालिग को शादी का झांसा देकर करता रहा रेप, कोर्ट ने सुनाई सख्त सजा
Thane News: महाराष्ट्र के ठाणे की एक कोर्ट ने 15 साल की अपनी रिश्तेदार से रेप करने के जुर्म में एक व्यक्ति को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनायी है. रेप के बाद किशोरी गर्भवती हो गई थी.

Maharashtra Rape News: महाराष्ट्र के ठाणे की एक कोर्ट ने 15 साल की अपनी रिश्तेदार से रेप करने के जुर्म में एक व्यक्ति को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. रेप के बाद किशोरी गर्भवती हो गई थी. कोर्ट ने कहा कि इस सजा से यह संदेश जाना चाहिए कि ऐसे अपराधियों से ‘सख्ती’ से निपटा जाता है.
बाल यौन अपराध संरक्षण कानून (POCSO) कोर्ट के विशेष न्यायाधीश डीएस देशमुख ने 16 जून को दिए आदेश में बचाव पक्ष की इस दलील को खारिज कर दिया कि संबंध आपसी सहमति से बने थे. न्यायाधीश ने कहा कि POCSO कानून के तहत नाबालिग की सहमति मायने नहीं रखती.
शादी का झांसा देकर उससे रेप करता रहा
ठाणे जिले में उल्हासनगर निवासी 35 साल के आरोपी ने पीड़िता की रिश्ते की एक बहन से शादी की है और उसका एक बेटा है. अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता अपने पिता की मृत्यु के बाद नवी मुंबई के घनसोली में आरोपी के घर चली गई. आरोपी ने पीड़िता को गलत तरीके से छुआ और जुलाई 2016 में जब उसकी पत्नी सो गई तो उसने लड़की से रेप किया.
उसने पीड़िता को धमकी दी कि अगर उसने घटना के बारे में किसी को बताया, तो वह अपनी पत्नी को छोड़ देगा. उससे बचने के लिए पीड़िता ठाणे शहर में एक और रिश्तेदार के घर रहने चली गई. अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी ने वहां भी उसका पीछा किया, उससे अपने ‘‘प्यार’’ का इजहार किया और शादी का झांसा देकर उससे रेप करता रहा.
आरोपी ने पीड़िता को गर्भपात की दवा दी
दिसंबर 2016 में पीड़िता को पता चला कि वह गर्भवती है और उसने आरोपी को इसके बारे में बताया, जिसने उसे गर्भपात कराने की दवा दी लेकिन गर्भपात नहीं हो पाया. इसके बाद आरोपी और उसकी मां लड़की को उल्हासनगर के एक अस्पताल लेकर गए, जहां एक चिकित्सक ने कहा कि गर्भपात संभव नहीं है, क्योंकि वह 6 महीने की गर्भवती है.
इसके बाद पीड़िता आरोपी के घर लौट आयी. उसकी मां ने उसे एक कमरे में बंद कर दिया. आरोपी ने अपने घर पर कई बार उससे रेप किया. पीड़िता ने बाद में अपनी बहनों और मां को इसके बारे में बताया, जिसके बाद मई 2017 में आरोपी के खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया. वह 17 अप्रैल 2019 से न्यायिक हिरासत में है.
DNA रिपोर्ट को स्वीकार किया जाना चाहिए - कोर्ट
अभियोजन पक्ष ने पीड़िता की गवाही, मेडिकल रिपोर्ट और महत्वपूर्ण DNA साक्ष्य पेश किए. कोर्ट ने कहा, उपरोक्त तथ्यों से यह साफ है कि DNA रिपोर्ट को स्वीकार किया जाना चाहिए, जब तक कि इसमें कोई त्रुटि न हो और DNA जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषसिद्धि की जा सकती है, बशर्ते कि रक्त का नमूना उचित रूप से लिया जाए और नमूने में किसी प्रकार की छेड़छाड़ का संकेत देने वाला कोई सबूत न हो.
वहीं, बचाव पक्ष ने दलील दी कि संबंध सहमति से बने थे और उसने DNA नमूना इकट्ठा करने को चुनौती दी. आरोपी ने सजा में नरमी बरतने की अपील की और कहा कि वह पहले ही छह साल से अधिक समय से जेल में है और उसकी पत्नी और छोटा बेटा उस पर निर्भर है. बहरहाल, अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता के कारण अधिकतम सजा दिए जाने की पैरवी की.
50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया
कोर्ट ने आरोपी को POSCO कानून और भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया और उस पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया. कोर्ट ने कहा, इस मामले में आरोपी ने 15 साल की पीड़िता का यौन शोषण किया, जिससे वह गर्भवती हो गयी जबकि वह उसकी रिश्ते की बहन का पति है.
उसने कहा, इसलिए सजा यौन उत्पीड़न के कृत्य के अनुरूप होनी चाहिए और समाज को यह स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि ऐसे मामलों में अपराधियों से सख्ती से निपटा जाता है. मामले में सह-आरोपी उसकी मां को पर्याप्त सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया.





















