महाराष्ट्र में स्कूल बसों का बढ़ता खर्च बना सिरदर्द, हाइब्रिड क्लास से 16 लाख लीटर डीजल बचत का दावा
Maharashtra Bus Operators: महाराष्ट्र में 1 जून से शुरू होने जा रहे नए शैक्षणिक सत्र पहले स्कूल बस संचालकों की टेंशन बढ़ गई है. संघ ने मांग की है कि सरकार सब्सिडी या रियायत दे.

- अभिभावक संघ भी हाइब्रिड मोड और अन्य उपायों की मांग कर रहा.
महाराष्ट्र में 1 जून से शुरू होने जा रहे नए शैक्षणिक सत्र पहले स्कूल बस संचालकों की टेंशन बढ़ गई है. देश में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से स्कूल बस ऑपरेटरों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है. राज्य के स्कूल बस ऑपरेटरों और एसोसिएशन ने ईंधन की लागत में हुई भारी बढ़ोतरी के जवाब में नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होने से पहले ही बस सेवा शुल्क बढ़ाने का संकेत दिया है. संघ ने मांग की है कि सरकार सब्सिडी या रियायतें देकर स्कूल बस क्षेत्र को तत्काल राहत प्रदान करे. स्कूल बस संचालकों ने इसे कोविड काल जैसी स्थिति बताते हुए सरकार से तत्काल राहत पैकेज और सब्सिडी की मांग की है.
स्कूल बस ओनर्स एसोसिएशन (SBOA) के अनुसार स्कूल बस ऑपरेटर्स पहले से ही वाहन रखरखाव, बीमा प्रीमियम, परमिट शुल्क, कर्मचारियों के वेतन और अन्य प्रशासनिक खर्चों का भारी बोझ उठा रहे हैं. अब डीजल की बढ़ाती कीमतों ने उनकी आर्थिक परेशानी और बढ़ा दी है. SBOA ने साफ किया है कि वह अभिभावकों और विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डालना चाहता, इसी कारण संगठन ने स्कूलों और सरकार के सामने कुछ व्यावहारिक सुझाव रखे हैं, ताकि बिना बस शुल्क बढ़ाए खर्च को नियंत्रित किया जा सके.
2 दिन ऑनलाइन क्लास का सुझाव
सुझाव के तहत SBOA ने स्कूलों से हाइब्रिड शिक्षण प्रणाली अपनाने की अपील की है. इसके तहत सप्ताह में तीन दिन फिजिकल क्लास और दो दिन ऑनलाइन क्लास आयोजित करने का सुझाव दिया गया है. संगठन का कहना है कि इससे स्कूल बसों का रोजाना संचालन कम होगा और ईंधन की बचत के साथ परिचालन खर्च भी घटेगा. इसके अलावा SBOA ने स्कूलों से सिंगल शिफ्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम लागू करने का आग्रह किया है .
स्कूल बस ऑपरेटर्स राज्यभर में छात्रों की नियमित और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ऐसे में सरकार, स्कूल प्रबंधन और परिवहन संचालकों को मिलकर ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े.
कैसे हो सकती है तेल की बचत और आर्थिक बोझ कम
SBOA ने सुझाव देते हुए कहा कि महाराष्ट्र में स्कूल बसों की कुल संख्या लगभग 40 हजार है. हर बस प्रतिदिन 18 से 20 लीटर डीजल खर्च करती है. यदि स्कूल दो दिन ऑनलाइन चलें तो इससे प्रतिदिन लाखों लीटर डीजल की बचत हो सकेगा. स्कूल बस एसोसिएशन के मुताबिक इस व्यवस्था से लगभग 16 लाख लीटर डीजल बचाया जा सकता है. इससे बस संचालकों की लागत घटेगी और अभिभावकों पर किराया बढ़ाने बोझ कम पड़ेगा.
संगठन का कहना है कि अलग-अलग समय पर कई शिफ्ट चलने से बसों को कई बार चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे ईंधन और खर्च दोनों बढ़ते हैं. यदि एक समान पिकअप और ड्रॉप समय तय किया जाए, तो बसों के फेरे कम होंगे और खर्च में बड़ी कमी आएगी. एसोसिएशन का मानना है कि इन उपायों से तत्काल किराया वृद्धि टाली जा सकती है और स्कूल परिवहन सेवाए भी सुचारु रूप से जारी रखी जा सकती है .
पेरेंट्स एसोसिएशन ने भी की हाइब्रिड मोड की मांग
ईंधन की बढ़ती कीमतों और प्रधानमंत्री की ईंधन बचाने की अपील को देखते हुए, 'इंडिया वाइड पेरेंट्स एसोसिएशन' ने मांग की है कि, जैसे-जैसे पूरे राज्य में स्कूल फिर से खुल रहे हैं, उन्हें कुछ समय के लिए हाइब्रिड मोड में खोला जाए, जिसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों तरह की पढ़ाई शामिल हो. पेरेंट्स एसोसिएशन ने कहा कि स्कूल बस ड्राइवरों के साथ मिलकर मांग कर रहे हैं कि सरकार स्कूलों को 'हाइब्रिड मोड' (ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाई का मेल) में फिर से खोले. इसके साथ ही ये और इसी तरह के सुझाव पेरेंट्स एसोसिएशन ने एक लिखित पत्र के जरिए अधिकारियों को औपचारिक रूप से सौंप दिए हैं. सुझावों पर एक नजर:
1. स्कूलों में पढ़ाई हाइब्रिड मोड में होनी चाहिए, जिसमें दो दिन ऑनलाइन पढ़ाई और दो दिन ऑफलाइन पढ़ाई हो.
2. जिन छात्रों के स्कूल पास में हैं, उन्हें पैदल या साइकिल से स्कूल आने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.
3. सरकार को स्कूल बस ऑपरेटरों को इलेक्ट्रिक (EV) बसें देनी चाहिए, या कम से कम, उनकी तरफ से EV बसें उपलब्ध कराने में मदद करनी चाहिए.
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Source: IOCL


























