नाना पाटेकर के साथ तस्वीर शेयर कर CM देवेंद्र फडणवीस बोले- 'मन दुख से भरा...'
Nana Patekar Death News: देवेंद्र फडणवीस अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से बेहद दुखी हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर शोक व्यक्त किया है और लिखा कि एक अभिनेता के तौर पर उनका जाना एक बहुत बड़ी क्षति है.

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. उनके निधन से देश में शोक की लहर है. हिंदी और मराठी सिनेमा के एक बेमिसाल अभिनेता नाना पाटेकर ने गोवा के मणिपाल अस्पताल में आज सुबह अंतिम सांस ली. वो अपने दमदार अभिनय के लिए जाने जाते थे.
महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से बेहद दुखी हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर शोक व्यक्त किया है और लिखा कि एक अभिनेता के तौर पर उनका जाना एक बहुत बड़ी क्षति है.
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'ये गहरा सदमा देने वाला है'
देवेंद्र फडणवीस ने एक्स पर लिखा, 'दिग्गज अभिनेता और मेरे करीबी दोस्त नाना पाटेकर का अचानक और असमय जाना दिल को गहरा सदमा देने वाला है. मन दुख से भरा हुआ है. नाना जितने शानदार पर्दे पर थे, उतने ही शानदार उनके विचार भी थे. उन्होंने मराठी और हिंदी सिनेमा को एक पूरा दौर दिया. इनमें भी, एक देशभक्त के तौर पर उनकी छवि दर्शकों के दिलों में गहराई तक बसी. 'क्रांतिवीर' से लेकर 'नटसम्राट' तक, अपने सफर में उन्होंने अभिनय का जो शानदार और बेजोड़ ताना-बाना बुना, उसकी कोई मिसाल नहीं है. इसलिए, एक अभिनेता के तौर पर उनका जाना एक बहुत बड़ी क्षति है.'
ज्येष्ठ अभिनेते आणि माझे निकटचे मित्र नाना पाटेकर यांची अशी अकाली आणि अचानक ‘एक्झिट’ मनाला मोठा धक्का देणारी आहे. मन प्रचंड दुःखी आहे. नाना जितके पडद्यावर मोठे, तितकेच मनाने सुद्धा मोठे होते. मराठी आणि हिंदी चित्रपटसृष्टीला त्यांनी एक कालखंड दिला. त्यातून प्रामुख्याने एक राष्ट्रभक्त अशीच त्यांची प्रतिमा प्रेक्षकांना भावली. 'क्रांतिवीर' ते 'नटसम्राट' या त्यांच्या प्रवासात जो दमदार आणि कसदार अभिनयाचा पट त्यांनी उभा केला, त्याला तोड नाही. त्यामुळे अभिनेता म्हणून त्यांचे जाणे ही मोठी हानी आहे. परखडपणा, बेधडकपणा हे स्वभावगुण त्यांचे व्यक्तिमत्त्व खुलवणारे ठरले. पण मी मुख्यमंत्री झाल्यापासून त्यांच्यातील हळवा माणूस कायम पाहत आलो आहे. आम्ही जलयुक्त शिवार अभियान हाती घेतले, तेव्हा त्याला पाठिंबा देण्यासाठी स्वतः नाना पुढे आले होते. मकरंद अनासपुरेजी आणि त्यांनी सोबत येत 'नाम फाऊंडेशन'ची स्थापना केली आणि स्वतः शिवारात जाऊन काम केले. शेतकऱ्यांसाठी मदत करणे असो, दुष्काळी कालखंडात मदतीचा हात पुढे करणे असो, नाना कायम अग्रणी राहिले. यंदाही आपण दुष्काळाचा सामना करीत असताना नाना कधीच मागे राहिले नसते, पण ते अचानक सोडून निघून गेले. मी त्यांना भावपूर्ण श्रद्धांजली अर्पण करतो. त्यांच्या कुटुंबियांच्या, चाहत्यांच्या दुःखात आम्ही सहभागी आहोत. ॐ शांति 🙏
— Devendra Fadnavis (@Dev_Fadnavis) October 8, 2026
'साफगोई और निडरता नाना की पहचान'
फडणवीस ने अपने पोस्ट में बताया कि नाना की पहचान साफगोई और निडरता थे, लेकिन जब से वो मुख्यमंत्री बने, उन्होंने हमेशा उनके भीतर एक संवेदनशील इंसान को देखा है. उन्होंने पोस्ट में लिखा, 'जब हमने 'जलयुक्त शिवार अभियान' शुरू किया, तो नाना खुद इसके समर्थन में आगे आए. मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर उन्होंने 'नाम फाउंडेशन' की स्थापना की और गांवों में जाकर खुद काम किया.'
'किसानों की मदद के लिए रहे हमेशा आगे'
फडणवीस ने अपने पोस्ट में बताया कि कैसे नाना किसानों की मदद हो या सूखे के समय सहायता का हाथ बढ़ाना हो, वो हमेशा सबसे आगे रहते थे. इस साल भी, जब हम सूखे का सामना कर रहे हैं तो नाना मदद के लिए आगे आते, लेकिन आज वो हमें इतनी अचानक छोड़कर चले गए. फडणवीस ने लिखा, 'मैं उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. हम उनके परिवार और प्रशंसकों के दुख में शामिल हैं.
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