संजय राउत की तरफ से दाखिल केस में नारायण राणे ने कोर्ट में कहा- 'मैं निर्दोष हूं', अब आगे क्या होगा?
Narayan Rane Defamation Case: नारायण राणे पर आरोप है कि उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के खिलाफ अपमानजनक शब्द कहे. सुनवाई में राणे ने खुद को निर्दोष बताया. अब इस मामले में ट्रायल चलेगा.

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लोकसभा सांसद नारायण राणे ने सोमवार (25 अगस्त) को मानहानि के मामले में मुंबई की मजिस्ट्रेट कोर्ट में खुद को निर्दोष बताया. यह मामला शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत द्वारा दायर मानहानि याचिका से जुड़ा है, जो राणे के 2023 में दिए गए कथित बयानों पर आधारित है. राणे की तरफ से खुद को निर्दोष बताए जाने के बाद अब कोर्ट में केस चलेगा.
संजय राउत ने आरोप लगाया था कि जनवरी 2023 में उपनगरीय भांडुप में आयोजित कोंकण फेस्टिवल के दौरान राणे ने उनके खिलाफ मानहानिकारक और झूठे बयान दिए. राणे ने कथित रूप से कहा था कि राउत का नाम मतदाता सूची में नहीं है और उन्होंने राज्यसभा तक पहुंचाने में राणे की मदद की.
मामला क्या है?
सोमवार को मजिस्ट्रेट ए. ए. कुलकर्णी की अदालत में पेश होकर राणे ने आरोपों से इनकार किया. इसके बाद कोर्ट ने मुकदमे की सुनवाई गवाहों की जांच से 11 नवंबर से शुरू करने का फैसला किया.
अप्रैल में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राउत की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राणे को समन जारी किया था. राणे ने इस आदेश को चुनौती देते हुए विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट में दलील दी थी कि उनके खिलाफ मानहानि का मामला नहीं बनता. उन्होंने कहा था कि समन जारी करते समय मजिस्ट्रेट ने उचित कारण नहीं बताए और न्यायिक विवेक का प्रयोग नहीं किया.
क्या रहा स्पेशल कोर्ट का फैसला?
हालांकि विशेष कोर्ट ने राणे की याचिका खारिज कर दी. अदालत ने माना कि राणे ने अस्पष्ट और बिना सबूत के सार्वजनिक बयान दिए जो दुर्भावना का संकेत देते हैं. अदालत ने कहा कि प्राथमिक रूप से ये बयान झूठे और सार्वजनिक मंच पर दिए गए थे, जो मानहानि कानून की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं.
आगे की प्रक्रिया
अब यह मामला गवाहों की गवाही के साथ आगे बढ़ेगा. यदि दोष सिद्ध होता है तो भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 499 और 500 के तहत राणे को सजा हो सकती है.
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