'ऐसी थी अजित दादा की चतुराई', अजित पवार पर उद्धव गुट के सामना का लेख बना चर्चा का विषय!
Samana on Ajit Pawar: विमान हादसे में डिप्टी CM अजित पवार के निधन से देशभर में शोक फैल गया है. शिवसेना UBT ने सामना में उन्हें हिम्मतवाले, जिगरवाले दादा बताते हुए मराठी राजनीति की अपूरणीय क्षति कहा.

28 जनवरी को महाराष्ट्र के बारामती में एक विमान हादसे में राज्य के डिप्टी सीएम अजित पवार का निधन हो गया. इस दुर्घटना में उनकी मौके पर ही मौत हो गई, जिससे महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश में शोक की लहर फैल गई. राजनीतिक दलों, समर्थकों और आम लोगों ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके राजनीतिक योगदान को स्मरण किया. इस बीच शिवसेना यूबीटी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में लेख प्रकाशित कर अजित पवार को “हिम्मतवाले और जिगरवाले दादा” बताया.
शिवसेना यूबीटी की भावभीनी श्रद्धांजलि
लेख में कहा गया कि अजित पवार जैसे मजबूत नेतृत्व का समय से पहले चले जाना मराठी राजनीति के लिए गहरी क्षति है. प्रमोद महाजन, गोपीनाथ मुंडे, विलासराव देशमुख और आर. आर. पाटिल जैसे नेताओं की तरह अजित पवार का जाना भी महाराष्ट्र की राजनीति को कमजोर करता है. लेख के अनुसार, उनकी अनुपस्थिति से राजनीति सुस्त और दिशाहीन होती जा रही है, और उनके नेतृत्व पर निर्भर वर्ग खुद को अनाथ महसूस कर रहा है.
राजनीतिक सफर और पवार परिवार
सामना में प्रकाशित लेख में अजित पवार के राजनीतिक जीवन को विस्तार से याद किया गया. उन्हें जन्मजात नेतृत्व गुणों वाला नेता बताया गया, जिन्होंने शरद पवार की छत्रछाया में रहते हुए भी अपनी अलग पहचान बनाई. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में रहते हुए उन्होंने अलग राह चुनी और 40 विधायकों के साथ बीजेपी के समर्थन से सरकार में शामिल हुए, लेकिन पारिवारिक रिश्ते बने रहे. हाल के नगर निगम और जिला परिषद चुनावों में दोनों गुटों का साथ आना इसी का संकेत था. विडंबना यह रही कि जिस बारामती से उनका राजनीतिक जीवन जुड़ा रहा, वहीं प्रचार के दौरान विमान हादसे में उनका निधन हो गया.
6 बार उपमुख्यमंत्री और निर्णायक नेता
लेख के अनुसार, अजित पवार छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे और प्रशासनिक निर्णय क्षमता के लिए पहचाने गए. पृथ्वीराज चव्हाण, विलासराव देशमुख, उद्धव ठाकरे, देवेंद्र फडणवीस, अशोक चव्हाण मुख्यमंत्री बनते-बनते रहे, लेकिन अजित पवार इन सभी के मंत्रिमंडलों में उपमुख्यमंत्री बने रहे. वे एक चतुर राजनीतिज्ञ थे. प्रधानमंत्री मोदी ने खुद उन पर 70 हजार करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले का आरोप लगाया, लेकिन अजित पवार की चतुराई ऐसी थी कि एक महीने के भीतर ही वे उसी मोदी पार्टी की महाराष्ट्र सरकार में उपमुख्यमंत्री बन गए.
काटेवाड़ी के एक साधारण कार्यकर्ता से लेकर मंत्री और उपमुख्यमंत्री तक का उनका सफर उल्लेखनीय रहा. वे स्पष्टवादी, समय के पाबंद और निर्णय लेने में निडर माने जाते थे. आरोपों और विवादों के बावजूद वे सत्ता के केंद्र में बने रहे और काम निकालने की उनकी शैली चर्चित रही. बारामती की जनता ने उन्हें कई बार समर्थन दिया, जिससे उनका जनाधार स्पष्ट हुआ. सामना के लेख के अनुसार, अजित पवार एक छत्र की तरह थे, जिनके नीचे हजारों लोग खड़े थे. उनके जाने से यह छत्र टूट गया और महाराष्ट्र की राजनीति ने एक सशक्त, साहसी और प्रभावशाली नेता को खो दिया, जिसकी यादें लंबे समय तक जीवित रहेंगी.























