जवानी जेल में गुजरी और अब बनेगा बुजुर्ग माता-पिता का सहारा, जानें हत्या आरोपी प्रशांत की कहानी
Ujjain News: उज्जैन में खुली जेल ने 20 बंदियों को परिवार के साथ रहने का मौका दिया है. हत्या के आरोपी प्रशांत को 13 साल की सजा के बाद अपने माता-पिता के साथ रहने का सौभाग्य मिला है.

Ujjain Jail: मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उज्जैन में खुली जेल की शुरुआत करते हुए 20 बंदियों के पास उनके परिवार को रहने की बड़ी सौगात दी है. अब इंदौर के रहने वाले हत्या के आरोपी प्रशांत को अपने बूढ़े माता-पिता के साथ रहने का मौका मिल रहा है. प्रशांत ने 13 साल तक हत्या के आरोप में केंद्रीय जेल भैरवगढ़ की सजा काटी है. इस दौरान उसकी पूरी जवान जेल में गुजर गई, अब जाकर वह बूढ़े माता-पिता का सहारा बनने जा रहा है.
उज्जैन की केंद्रीय जेल भैरवगढ़ में सजा काट रहे इंदौर के प्रशांत गिरी ने बताया कि 20 साल की उम्र में हत्या के आरोप में उसे आजीवन कारावास की सजा हो गई थी. उसने 13 साल तक केंद्रीय जेल भैरवगढ़ में सजा काटकर अपने दिन निकले हैं. अब उनकी उम्र 33 वर्ष हो गई है.
सुधरने का मौका करा रही है उपलब्ध
प्रशांत का कहना है कि उसका विवाह भी नहीं हुआ है. वह अपने माता-पिता का एकमात्र सहारा है. उसका कहना है कि खुली जेल के एक फ्लैट में उसका भी आशियाना है. अब उसने अपने बूढ़े माता-पिता को अपने पास ही बुला लिया है. उसे उम्मीद नहीं थी कि वह 14 वर्ष के पहले अपने परिवार के साथ रह पाएगा. प्रशांत ने कहा कि खुली जेल केवल कैदियों के लिए सुविधा नहीं बल्कि सुधरने का एक मौका उपलब्ध करा रही है.
मध्य प्रदेश में डेढ़ सौ कैदी खुली जेल में
मध्य प्रदेश के जेल डीजी जीपी सिंह ने बताया कि एमपी में 140 फ्लैट कैदियों के लिए खुली जेल के रूप में उपलब्ध कराए गए हैं, जिनमें लगभग 150 कैदी रह रहे हैं. जेल विभाग के एडीजी मंसाराम पटेल के मुताबिक कई मामलों में सगे भाई सजा काट रहे हैं. ऐसे लोगों को एक ही फ्लैट में दो भाई भी रह रहे हैं, इस प्रकार मध्य प्रदेश के 140 फ्लैट में 150 कैदियों को खुली जेल में रखा जा रहा है.
सूर्योदय से सूर्यास्त तक जेल के बाहर
जेल विभाग के एडीजी संजय पांडे ने बताया कि कैदियों को खुली जेल में कई प्रकार की सुविधा मिलती है, वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ जाते हैं. उन्हें सूर्योदय से सूर्यास्त तक बाहर काम करने जाने की अनुमति रहती है. हालांकि उनका जेल का सजा काल चल रहा है, इसलिए सूर्योदय के बाद उन्हें वापस खुली जेल में आना होता है.
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Source: IOCL





















