कान्हा टाइगर रिजर्व में तीन शावकों के बाद बाघिन की भी मौत: पहले भूख, अब फेफड़ों में संक्रमण को बना कारण
Madhya Pradesh Kanha Tiger Reserve: अधिकारियों ने बताया कि बाघिन की उम्र 10-11 साल की थी और उसके फेफोड़ों में इन्फेक्शन काफी बढ़ गया था. उसे सांस लेने में बहुत तकलीफ हो रही थी.

- इन्फेक्शन के कारणों की जांच, पानी के सैंपल भी इकठ्ठे.
मध्यप्रदेश के मंडला जिले के कान्हा टाइगर रिज़र्व (KTR) में पांच दिन में तीन शावकों को खो देने वाली बाघिन 'टी-141' और उसकी चौथी संतान की भी मौत हो गई है. वन विभाग अधिकारियों ने मौत का कारण फेफोड़ों में संक्रमण बताया है. बाघिन और उसके शावक स्थिति गंभीर थी और उनका इलाज मुक्की रेंज में एक क्वारंटाइन सेंटर में चल रहा था, लेकिन संक्रमण इतना बढ़ चुका था कि अंत में बाघिन और उसके आखिरी शावक ने भी दम तोड़ दिया.
अधिकारियों ने बताया कि बाघिन ‘टी-141’ को पिछले महीने सरही रेंज में चार शावकों के साथ देखा गया था. पहले शावक की 21 अप्रैल को मौत हो गई थी और बताया गया था कि वह प्राकृतिक कारणों से मरा था. उन्होंने बताया कि उसका पेट खाली पाया गया जिससे यह अनुमान लगाया गया कि भूख से शावक ने दम तोड़ा. दूसरे शावक की 23 अप्रैल को डूबने से मौत हो गई और उसका क्षतविक्षत शव बरामद किया गया.
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नौ दिनों में बाघिन और उसके चारों शावकों की मौत
केटीआर के पशु चिकित्सक डॉ. संदीप अग्रवाल ने कहा कि तीसरे शावक की 25 अप्रैल को मौत हो गई, उसने फेफड़ों में संक्रमण के कारण दम तोड़ा था. उन्होंने बताया कि सभी शावक करीब एक साल के थे. शुरूआत में अधिकारियों को शक था कि शावकों की मौत शायद भूख के कारण हुई होगी, लेकिन तीसरे शावक की मौत ने वन अधिकारियों को सचेत कर दिया. वन अधिकारियों ने जाकर जांच की तो पाया कि बाघिन T-141 और उसका आखिरी बचा हुआ शावक, दोनों की हालात काफी खराब है. दोनों को बेहोश करके इलाज के लिए मुक्की रेंज में एक क्वारंटाइन सेंटर में भेज दिया गया था.
अधिकारियों ने बताया कि बाघिन की उम्र 10-11 साल की थी और उसके फेफोड़ों में संक्रमण काफी बढ़ गया था. उसे सांस लेने में बहुत तकलीफ हो रही थी और वो खाना तक नहीं खा पा रही थी. शावक में भी एक जैसे लक्षण दिखाई दिए. बुधवार (29 अप्रैल) को इलाज के दौरान बाघिन की मौत हो गई, उसी दिन बाद में शावक की भी मौत हो गई. इस तरह नौ दिनों में बाघिन और उसके चारों शावकों की मौत हो गई.
जांच में जुटे वन अधिकारी
कान्हा टाइगर रिजर्व के उप निदेशक प्रकाश कुमार वर्मा ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया, "ये मौतें फेफड़ों के संक्रमण के कारण हुईं है. अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस संक्रमण ने बाघिन और उसके परिवार को कैसे प्रभावित किया." वन अधिकारियों ने बताया कि संक्रमण कैसे क्यों हुआ इसकी जानकारी के लिए बाघिन के शरीर के सैंपल जांच के लिए सुरक्षित रख लिए गए हैं. जिस इलाके में बाघिन और उसके शावक पाए गए थे, उस इलाके को सैनिटाइज किया जा रहा है. इसके साथ ही एहतियात के तौर पर आस-पास के जल स्रोतों से पानी के सैंपल इकट्टा किये जा रहे हैं ताकि संक्रमण के सही कारणों का पता लगाया जा सके.
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