MP News: बजट सत्र से पहले बीजेपी में सुलह-सफाई और मतभेदों पर विराम! ऑल इज वेल के संदेश की कोशिश
Madhya Pradesh News: बजट सत्र से पहले भाजपा ने अंदरूनी मतभेदों पर विराम लगाने की कवायद तेज कर दी है. विजयवर्गीय-सीएम की मुलाकात के बीच सरकार एकजुटता का संदेश दे रही है.

मध्य प्रदेश में विधानसभा के बजट सत्र से ठीक पहले सत्ता और संगठन दोनों स्तर पर ‘ऑल इज वेल’ का संदेश देने की कोशिश तेज हो गई है. पिछले कुछ दिनों में कई मुद्दों ने सरकार को असहज किया. यूजीसी के समानता विनियम को लेकर बहस, ब्राह्मण बेटियों पर की गई कथित असभ्य टिप्पणी को लेकर आईएएस संतोष वर्मा पर कार्रवाई की मांग और इंदौर के दूषित जल कांड जैसे मामलों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया था. ऐसे में अब भाजपा डैमेज कंट्रोल मोड में नजर आ रही है.
इंदौर के दूषित जल कांड ने बढ़ाई थी बेचैनी
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से हुई मौतों के बाद सरकार पर सवाल खड़े हुए थे. सड़क से लेकर संगठन तक इस मामले को लेकर असहजता दिखी. विपक्ष ने भी इसे बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश की. इसी के बाद सरकार ने हालात संभालने के लिए अंदरूनी संवाद तेज किया और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्ती के संकेत दिए.
विजयवर्गीय-सीएम मुलाकात के सियासी मायने
नगरीय विकास एवं आवास तथा संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हाल ही में हुई मुलाकात को सियासी सुलह का संकेत माना जा रहा है.
पिछले करीब एक महीने से विजयवर्गीय सरकारी कामकाज से कुछ दूरी बनाए हुए थे और उनकी नाराजगी की चर्चाएं भी थीं. खासकर इंदौर की घटना के बाद उनके और सरकार के बीच मतभेद की बातें सामने आ रही थीं.
हालांकि मुलाकात के बाद विजयवर्गीय ने साफ कहा कि कोई गिला-शिकवा नहीं है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सोमवार से शुरू हो रहे बजट सत्र और आने वाले राज्यसभा चुनाव को देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री की भूमिका बेहद अहम हो जाती है. ऐसे में समय रहते तालमेल बैठाना जरूरी था.
विजय शाह मामले में राहत
जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई सूचीबद्ध न होने से सरकार और संगठन दोनों को राहत मिली है. अब विधानसभा में सरकार इस मुद्दे पर यह कहकर चर्चा टाल सकती है कि मामला अदालत में लंबित है. इससे बजट सत्र के दौरान संभावित टकराव को कुछ हद तक कम करने की रणनीति दिखाई देती है.
प्रशासनिक सख्ती का संदेश
स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को बदले जाने को भी सरकार की सख्ती के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. विषाक्त कफ सिरप प्रकरण के बाद यह बदलाव हुआ है. इससे सरकार यह संदेश देना चाहती है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदारी तय होगी.
कांग्रेस के आक्रामक रुख की तैयारी
दरअसल, बजट सत्र सरकार के लिए काफी अहम है. विपक्षी कांग्रेस आक्रामक रणनीति के साथ सदन में उतरने की तैयारी कर रही है. ऐसे में भाजपा चाहती है कि सरकार और संगठन दोनों स्तर पर एकजुटता साफ दिखाई दे. मुख्य सचेतक की नियुक्ति को लेकर भी चर्चा तेज है, जिसे संसदीय रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.
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