Dhar Bhojshala: धार भोजशाला पर HC के फैसले से इंदौर में जश्न, संतों ने शंख-मंजीरे बजाकर कहा, 'सत्य की जीत हुई'
Bhojshala Case: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के धार भोजशाला पर ऐतिहासिक फैसले के बाद इंदौर के हंसदास मठ में संत समाज ने जश्न मनाया. संतों ने लड्डू बांटकर इसे सनातन धर्म की जीत बताया.

धार स्थित 'भोजशाला' को हिंदू मंदिर मानते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा सुनाए गए ऐतिहासिक फैसले के बाद पूरे राज्य के संत समाज में खुशी की लहर दौड़ गई है. इस फैसले के आते ही इंदौर के मठ-मंदिरों में जश्न का माहौल बन गया. संतों ने इसे सनातन धर्म की जीत और सत्य की स्थापना बताते हुए न्यायालय के फैसले का भव्य स्वागत किया है.
हाईकोर्ट का फैसला आते ही इंदौर के ऐतिहासिक हंसदास मठ में दीवाली जैसा जश्न शुरू हो गया. मठ में उपस्थित संतों और बटुकों ने जमकर झांझ-मंजीरे बजाए और भजन-कीर्तन किया. शंख की ध्वनि से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा. सत्य की विजय के जयकारों के बीच पूरे मठ परिसर में माहौल पूरी तरह धार्मिक उत्सव में तब्दील हो गया और लोगों ने एक-दूसरे को लड्डू खिलाकर मुंह मीठा कराया.
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भोजशाला पर हमारा अधिकार सिद्ध- राधे-राधे बाबा
इंदौर के प्रसिद्ध संत राधे-राधे बाबा ने इस फैसले पर अपनी तीखी और स्पष्ट प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल एक स्थान का फैसला नहीं है, बल्कि सनातन धर्म की गौरवशाली परंपरा की पुनर्स्थापना है.
संत राधे-राधे बाबा ने कहा, "उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि भोजशाला एक हिंदू मंदिर थी और है. राजा भोज ने जहां मां वाग्देवी (सरस्वती) की स्थापना की थी, वहां कभी वेद मंत्रों की गूंज हुआ करती थी. आज सत्य की फिर विजय हुई है. राम मंदिर के बाद अब भोजशाला पर भी हमारा अधिकार सिद्ध हुआ है." राधे-राधे बाबा ने आगे कहा कि जो लोग वहां नमाज़ पढ़ने की मांग कर रहे थे, उन्हें भी मां सरस्वती सद्बुद्धि दें, क्योंकि सत्य कभी पराजित नहीं होता.
सदियों पुराने संघर्ष का हुआ अंत- महंत पवन दास
हंसदास मठ के महंत पवन दास महाराज ने भी इस फैसले को ऐतिहासिक करार दिया. उन्होंने कहा कि यह केवल एक कानूनी जीत नहीं है, बल्कि हिंदू समाज के सदियों पुराने उस संघर्ष का अंत है जो वह अपने पूजा के अधिकार के लिए कर रहा था.
महंत पवन दास महाराज ने कहा, "आज हमारा वैदिक और सनातन धर्म सम्मानित हुआ है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि वहां न तो कोई बाजार है और न ही नमाज़ पढ़ी जा सकती है. यह स्थान केवल मां सरस्वती के मंदिर के रूप में ही मान्य है."
महंत पवन दास महाराज ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में धार की भोजशाला को एक भव्य मंदिर के स्वरूप में विकसित किया जाएगा, जहां देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को मां वाग्देवी की निर्बाध आराधना करने का अवसर मिलेगा.
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