JKCA फंड गबन केस में फारूक अब्दुल्ला ने खुद को बताया बेगुनाह, कोर्ट में बोले- ये आरोप मनगढ़ंत
Farooq Abdullah News: पूर्व मुख्यमंत्री श्रीनगर की चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट तबस्सुम की अदालत में वर्चुअल तरीके से पेश हुए. इस दौरान उन्होंने खुद को निर्दोष बताया है.

नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री, फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) में कथित फंड के गलत इस्तेमाल के मामले में अपने ऊपर लगे आरोपों के लिए दोषी नहीं होने की दलील दी है.
88 साल के पूर्व मुख्यमंत्री श्रीनगर की चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट तबस्सुम की अदालत में वर्चुअल तरीके से पेश हुए, जिन्होंने उन्हें CBI की चार्जशीट की बातें पढ़कर सुनाईं. जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें और कुछ कहना है, तो उन्होंने कहा कि मेरे पास यह कहने के अलावा और कुछ नहीं है कि ये आरोप मनगढ़ंत हैं.
फारूक अब्दुल्ला ने आरोपों को बताया मनगढ़ंत
जब अदालत ने अब्दुल्ला से पूछा कि क्या उन्हें चार्जशीट की बातें समझाई गई थीं और क्या उन्हें वे समझ में आ गई थीं, तो उन्होंने हां में जवाब दिया. हालांकि, उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को 'झूठा और मनगढ़ंत' बताते हुए खारिज कर दिया.
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे आरोपों को स्वीकार करते हैं, तो अब्दुल्ला ने कहा कि नहीं, मैं किसी भी आरोप का दोषी नहीं हूं. इस मामले में बाकी आरोपी जो खुद अदालत में मौजूद थे, उन्होंने भी अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर दिया. सिवाय दो लोगों के, जिन्हें CBI ने माफ कर दिया था और उन पर कोई आरोप नहीं लगाया था. हालांकि, उन दोनों को मामले की सुनवाई खत्म होने तक इसमें शामिल रहना होगा.
सुनवाई के दौरान अदालत ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान, अदालत ने कहा था कि रणबीर दंड संहिता की धारा 120-B (आपराधिक साजिश), 406 (आपराधिक विश्वासघात), और 409 (सरकारी कर्मचारी द्वारा आपराधिक विश्वासघात) के तहत अपराधों के जरूरी तत्व पहली नजर में अब्दुल्ला के खिलाफ बनते दिख रहे हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री के अलावा, आरोपियों में मोहम्मद सलीम खान (उस समय JKCA के महासचिव), अहसान अहमद मिर्जा (उस समय कोषाध्यक्ष), मंजूर गजनफर अली, बशीर अहमद मिसगर (J&K बैंक के एक अधिकारी), और गुलजार अहमद बेग शामिल हैं.
सीबीआई को सौंपी गई थी मामले की जांच
अदालत ने बाकी आरोपियों के खिलाफ भी आरोप तय किए. JKCA में फंड के गलत इस्तेमाल के आरोपों पर, श्रीनगर के राम मुंशी बाग पुलिस स्टेशन ने 10 मार्च, 2012 को RPC की धारा 120-B, 406 और 409 के तहत FIR नंबर 27/2012 दर्ज की थी.
पुलिस द्वारा की गई जांच के दौरान और उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप पर, इस मामले की जांच बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई. जुलाई 2017 में, CBI ने इस मामले में CJM श्रीनगर के समक्ष आरोप-पत्र दायर किया. अधिवक्ता इश्तियाक खान ने अब्दुल्ला का प्रतिनिधित्व किया, जबकि अन्य आरोपियों के वकील भी वहां उपस्थित थे.
ये भी पढ़ें: ईरान युद्ध पर CM उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान, 'जो रोल प्रधानमंत्री अदा कर सकते हैं, वो कोई...'























