Jammu Kashmir: विवादित किताबों पर बड़ा एक्शन, स्कूलों की हर लाइब्रेरी का 7 दिन में ऑडिट का आदेश
Jammu Kashmir News: जम्मू-कश्मीर में विवादित किताबों के मामले के बाद DSEK ने सभी सरकारी-निजी स्कूलों और कोचिंग सेंटरों की लाइब्रेरी का 7 दिन में ऑडिट कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया है.

जम्मू-कश्मीर के सरकारी और निजी स्कूलों की लाइब्रेरी में कथित तौर पर देश-विरोधी और भड़काऊ सामग्री वाली किताबें मिलने के बाद प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. स्कूल शिक्षा निदेशालय कश्मीर (DSEK) ने पूरे कश्मीर में स्कूलों और निजी कोचिंग संस्थानों की लाइब्रेरी का ऑडिट कराने का आदेश दिया है. सभी संस्थानों को 7 दिनों के भीतर अपनी किताबों की जांच कर रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा गया है.
दो किताबों से शुरू हुआ पूरा विवाद
यह मामला उस समय सामने आया जब केंद्र सरकार की 'समग्र शिक्षा' योजना के तहत सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में बांटी गई दो किताबों की सामग्री पर सवाल उठे. इनमें पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ J&K और ग्रेट पर्सनैलिटीज ऑफ जम्मू एंड कश्मीर शामिल हैं.
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आरोप है कि इन किताबों में अलगाववाद का समर्थन करने वाली और बेहद अनुचित सामग्री मौजूद थी. मामला सामने आते ही राजनीतिक दलों और कई संगठनों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. विपक्ष ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कार्रवाई की मांग की.
8 अधिकारियों पर गिरी गाज
विवाद बढ़ने के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया. उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नेतृत्व में स्कूल शिक्षा विभाग के 8 अधिकारियों को गंभीर लापरवाही और कर्तव्य में कोताही के आरोप में सस्पेंड या सेवा से हटाने की कार्रवाई की गई.
इसके साथ ही इन किताबों के लेखकों और प्रकाशकों पर भी कार्रवाई हुई. जम्मू की ओबेरॉय बुक सर्विस और दिल्ली के अरोड़ा प्रकाशन को जम्मू-कश्मीर में ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है. दोनों विवादित किताबों की करीब 251 प्रतियां वापस मंगाने और उन्हें पूरी तरह सर्कुलेशन से हटाने के निर्देश दिए गए हैं.
UAPA के तहत FIR, जांच भी तेज
मामले की गंभीरता को देखते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत FIR दर्ज की है. पुलिस ने प्रकाशकों के ठिकानों पर छापेमारी कर फिजिकल और डिजिटल सबूत भी जुटाए हैं. इसके अलावा पूरे मामले की विभागीय जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है, जिसे 30 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी.
जांच के बीच DSEK ने नया सर्कुलर जारी कर सभी सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के साथ-साथ निजी कोचिंग सेंटरों को अपनी लाइब्रेरी और परिसर में मौजूद हर किताब की जांच करने का आदेश दिया है.
निर्देशों के मुताबिक स्कूल प्रमुखों को केवल लाइब्रेरी ही नहीं, बल्कि क्लासरूम, स्टाफ रूम, कार्यालय और परिसर के अन्य हिस्सों में रखी किताबों की भी जांच करनी होगी.
किन किताबों को हटाया जाएगा?
निदेशालय ने साफ किया है कि ऐसी किसी भी किताब की पहचान की जाएगी जिसमें आपत्तिजनक या अनुचित सामग्री हो. खास तौर पर ऐसी सामग्री पर नजर रखी जाएगी जो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती हो, मौजूदा कानूनों का उल्लंघन करती हो, राष्ट्रीय हित के खिलाफ हो, शैक्षणिक मूल्यों को प्रभावित करती हो या फिर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उम्र के अनुसार तय मानकों पर खरी नहीं उतरती हो.
अगर किसी संस्थान को ऐसी किताब मिलती है तो उसकी पूरी जानकारी देनी होगी. रिपोर्ट में किताब का नाम, लेखक, प्रकाशक, प्रकाशन वर्ष और उपलब्ध प्रतियों की संख्या भी बतानी होगी.
रिपोर्ट जमा करने की तय हुई समयसीमा
DSEK ने रिपोर्ट जमा करने के लिए स्पष्ट समयसीमा भी तय की है. सभी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों को सर्कुलर जारी होने के सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट संबंधित मुख्य शिक्षा अधिकारी या क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारी को देनी होगी.
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इसके बाद क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारी 15 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट सीईओ को भेजेंगे. सभी जिलों के सीईओ को 17 जुलाई तक संकलित रिपोर्ट DSEK को सौंपनी होगी. वहीं, संयुक्त निदेशकों, अतिरिक्त सचिव (कानून) और विशेष कर्तव्य अधिकारी (CEW) की समिति अंतिम रिपोर्ट तैयार कर 19 जुलाई तक निदेशक को सौंपेगी.
प्रशासन का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य स्कूलों में ऐसी किसी भी सामग्री को हटाना है जो छात्रों पर गलत असर डाल सकती है या शिक्षा के मूल उद्देश्यों के खिलाफ हो. सरकार चाहती है कि स्कूलों की लाइब्रेरी में केवल ऐसी किताबें रहें जो छात्रों के लिए उपयुक्त हों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मानकों के अनुरूप हों.























