Ganeshotsav 2025: कश्मीरी पंडितों ने श्रीनगर और दक्षिण कश्मीर में किया गणेश विसर्जन, भक्तों की दिखी भीड़
Jammu Kashmir Ganeshotsav 2025: जम्मू-कश्मीर में गणेशोत्सव श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ. कश्मीरी पंडितों ने श्रीनगर और दक्षिण कश्मीर में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया। गणपत्यार मंदिर में विशेष आयोजन हुए.

जम्मू-कश्मीर में इस वर्ष गणेशोत्सव का समापन श्रद्धा , भक्ति और उल्हास के साथ हुआ. कश्मीरी पंडित समुदाय ने श्रीनगर और दक्षिण कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में पारंपरिक रीति से गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कर अपनी आस्था और संस्कृति को पुनः जीवंत किया. पूरे उत्सव के दौरान भजन, कीर्तन और सामुदायिक कार्यक्रमों ने वातावरण को भक्तिमय बनाए रखा.
सांस्कृतिक धरोहर और पहचान को आगे बढ़ाने का है अवसर
श्रीनगर के ऐतिहासिक गणपत्यार मंदिर में सुबह से ही भक्तों का जमावड़ा देखने को मिला. विधिवत पूजा और अनुष्ठानों के बाद गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया. इसी तरह कुलगाम जिले के वेसु क्षेत्र में वेसु वेलफेयर कमेटी की अगुवाई में शोभायात्रा और विसर्जन कार्यक्रम आयोजित हुआ. आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन सिर्फ धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर और पहचान को आगे बढ़ाने का अवसर है.
उत्सव शांति और सौहार्द के वातावरण में हुआ संपन्न
समितियों ने इस मौके पर श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति ट्रस्ट, पुणे और उद्योगपति-समाजसेवी पुनीत बालन का विशेष आभार व्यक्त किया. उनका कहना था कि लगातार मिल रहे सहयोग से घाटी में गणेशोत्सव की परंपरा पहले से अधिक सशक्त होती जा रही है. इसके साथ ही श्रीनगर और कुलगाम प्रशासन तथा स्थानीय मुस्लिम समाज का भी धन्यवाद किया गया. आयोजकों ने कहा कि उनके सहयोग से उत्सव शांति और सौहार्द के वातावरण में संपन्न हुआ.
एक आयोजक ने कहा, “गणेशोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह लोगों को जोड़ने और साझा मूल्यों को मजबूत करने का अवसर है. हम उन सभी का आभार मानते हैं जिन्होंने इस उत्सव को सफल और गरिमामय बनाने में योगदान दिया.”
सांस्कृतिक एकजुटता और अंतरधार्मिक सहयोग का देता है संदेश
इस वर्ष की विशेषता रही कि पुणे के प्रमुख मंडलों, श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी मंडल, केसरीवाड़ा मंडल और अखिल मंडई मंडल की प्रतिकृतियां लगातार तीसरे साल घाटी भेजी गईं. कश्मीर में गणेशोत्सव का यह सफल आयोजन न केवल धार्मिक आस्था की मिसाल है, बल्कि यह सांस्कृतिक एकजुटता और अंतरधार्मिक सहयोग का भी संदेश देता है.
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