'दिल्ली धमाके के पीछे जैश नहीं, बल्कि...', डॉक्टर्स टेरर मॉड्यूल पर चार्जशीट में बड़ा खुलासा
Delhi Red Fort Blast News in Hindi: लाल किला धमाके से जुड़े 'डॉक्टर्स टेरर मॉड्यूल' मामले में SIA ने चार्जशीट दाखिल की. जांच में आतंकी साजिश, विस्फोटक और डिजिटल नेटवर्क का खुलासा हुआ.

दिल्ली में लाल किले के पास हुए धमाके के मामले में भारत-विरोधी कुख्यात आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को लगभग क्लीन चिट देते हुए, कश्मीर की राज्य जांच एजेंसी (SIA) ने कहा है कि जैश के नाम का इस्तेमाल सिर्फ अपनी बदनामी फैलाने के लिए झूठा किया गया था. 'डॉक्टर्स टेरर मॉड्यूल' नामक एक गुप्त नेटवर्क से जुड़े एक बड़े आतंकवादी षड्यंत्र मामले में दायर चार्जशीट में SIA ने कहा है कि यह मॉड्यूल स्वतंत्र रूप से काम कर रहा था और कश्मीर में अल-कायदा से जुड़े इस्लामी उग्रवादी समूह अंसार-गजवतुल हिंद (AuGH) को फिर से जिंदा करने की ओर बढ़ रहा था.
चार्जशीट में इस मॉड्यूल के हिस्से के तौर पर दस आरोपियों के नाम शामिल किए गए हैं. श्रीनगर के नौगाम पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के आधार पर इस मॉड्यूल का संबंध दिल्ली के लाल किला धमाके से भी जोड़ा गया था, लेकिन SIA की चार्जशीट में कहा गया है कि पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद का न तो इस मॉड्यूल से और न ही बाद में हुए लाल किला धमाके से कोई लेना-देना था.
पोस्टरों का मकसद आम नागरिकों में पैदा करना डर
जानकारी के अनुसार, यह मामला 19 अक्तूबर 2025 की घटना से जुड़ा है. जब नौगाम इलाके में प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के नाम पर भड़काऊ और धमकी भरे पोस्टर सामने आए थे. जांचकर्ताओं के अनुसार, इन पोस्टरों का मकसद आम नागरिकों में डर पैदा करना, सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ना और भारत की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती देना था.
SIA के अनुसार, एक लगातार और बारीकी से की गई जांच से पता चला कि यह पोस्टर अभियान एक बड़े, सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा था. जिसका मकसद प्रतिबंधित संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) को फिर से जिंदा करना था. आरोपियों ने कथित तौर पर एक गुप्त मॉड्यूल बनाया था, जो कट्टरपंथ फैलाने, भर्ती करने और पूरे देश में आतंकवादी हमले करने की तैयारी में लगा हुआ था.
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घटना में JeM के नाम का किया गया था इस्तेमाल
एजेंसी ने आगे कहा कि इस समूह ने जानबूझकर JeM के नाम का इस्तेमाल उसकी बदनामी का फायदा उठाने और मनोवैज्ञानिक असर डालने के लिए किया, जबकि गुपचुप तरीके से AGuH को फिर से स्थापित करने पर काम कर रहा था. अधिकारियों ने कहा कि यह सुरक्षा एजेंसियों को गुमराह करने और समूह के असली मकसद को छिपाने की एक सोची-समझी कोशिश थी. खास बात यह है कि इस मॉड्यूल में बेहद पढ़े-लिखे लोग शामिल थे, जिनमें मेडिकल पेशेवर भी शामिल थे. जिन्होंने कथित तौर पर अपनी विशेषज्ञता, पहुंच और संस्थागत जगहों का गलत इस्तेमाल गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए किया.
जांच से पता चलता है कि आरोपियों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए चरमपंथी प्रचार फैलाया और विस्फोटक बनाने से जुड़ी सामग्री की खरीद-फरोख्त की, जिसमें रिहायशी इलाकों और अल-फलाह मेडिकल कॉलेज से जुड़ी जगहों के अंदर की गई गतिविधियां भी शामिल हैं. जांच में यह भी पता चला कि इस ग्रुप ने Triacetone Triperoxide (TATP) को अपनी पसंदीदा सामग्री के तौर पर चुना था. यह एक बहुत ही तेजी से उड़ने वाला (highly volatile) विस्फोटक है, जिसका इस्तेमाल दुनिया भर में कई आतंकी घटनाओं में किया गया है. उन्होंने इसे इसलिए चुना क्योंकि इसके शुरुआती घटक (precursor components) आसानी से मिल जाते हैं.
अधिकारियों ने बताया कि विस्फोटक पदार्थों और सामग्रियों के इतनी बड़ी मात्रा में जमा होने से इस साजिश की गंभीरता का पता चलता है. अगर इसे समय रहते नाकाम न किया गया होता, तो इसके नतीजे बहुत ही भयानक हो सकते थे. SIA ने बताया कि उसने सबूतों पर आधारित जांच के जरिए इस पूरे नेटवर्क और इसके सपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह से खत्म कर दिया है. चार्जशीट में बरामद चीजें, डिजिटल फोरेंसिक विश्लेषण, वैज्ञानिक सबूत और गवाहों के बयान शामिल हैं, जो हर आरोपी की भूमिका और इस साज़िश में उनकी भागीदारी को साबित करते हैं.
इन लोगों के खिलाफ दायर हुई चार्जशीट
जिन लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई है, उनमें आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ भट, मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद, इरफान अहमद वागे उर्फ ओवैस, जमीर अहमद अहंगर उर्फ मुतलाशी, डॉ. मुजम्मिल शकील गनई उर्फ मुसैब, डॉ. अदील अहमद राथर उर्फ जावेद, डॉ. शाहीन सईद, तुफैल अहमद भट और पुलवामा के डॉ. उमर उन नबी शामिल हैं. डॉ. उमर उन नबी लाल किले पर हुए आत्मघाती हमले में मारा गया था. यह चार्जशीट एक सक्षम अदालत में दायर की गई है.
आतंकवाद विरोधी अभियानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, SIA ने कहा कि यह मामला आतंकी साजिशों के बदलते और ज्यादा पेचीदा होते स्वरूप को दिखाता है. इसमें पेशेवर संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के गलत इस्तेमाल जैसी बातें भी शामिल हैं. यह मामला लगातार सतर्क रहने और मिलकर प्रयास करने की जरूरत पर भी जोर देता है. इस मामले में आगे की जांच अभी भी जारी है.
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