शिमला में भारी बारिश के बावजूद पानी का संकट गहराया, शहर में 3 दिन जारी रहेगी किल्लत
Shimla Water Crisis: शिमला में भारी बारिश के बावजूद जल संकट गहराया. पेयजल योजनाओं में गाद भरने से सप्लाई ठप है. नागरिकों को सीमित पानी मिल रहा है, निगम ने सहयोग और सावधानी बरतने की अपील की.

शिमला इस समय लगातार बारिश की मार झेल रहा है. शहर में जमकर बारिश हो रही है, लेकिन विडंबना यह है कि यहां के लोग पीने के पानी की भारी किल्लत से गुजर रहे हैं. शिमला जल प्रबंधन निगम (SJPNL) ने साफ कर दिया है कि अगले दो से तीन दिनों तक पानी की आपूर्ति प्रभावित रहेगी और लोगों को बेहद सोच-समझकर पानी का इस्तेमाल करना होगा.
दरअसल, भारी बारिश के चलते शहर की सभी प्रमुख पेयजल योजनाओं में गाद यानी सिल्ट भर गई है. जल स्रोतों में 8000 NTU तक गाद दर्ज की गई है, जो सामान्य स्तर से कई गुना अधिक है. इस वजह से पानी की लिफ्टिंग और फिल्टरिंग की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई है. नतीजतन पानी का स्तर तो भरपूर है, लेकिन उसे साफ कर घरों तक पहुंचाने में बड़ी दिक्कतें सामने आ रही हैं.
निगम की टीमें दिन-रात सप्लाई को बहाल करने में जुटी
शिमला जल प्रबंधन निगम के महाप्रबंधक राजेश कश्यप ने बताया कि निगम की टीमें दिन-रात गाद हटाने और सप्लाई को बहाल करने के प्रयासों में लगी हुई हैं. उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि पानी का इस्तेमाल सिर्फ पीने के लिए करें और अन्य कामों के लिए बरसात के पानी का उपयोग करें. साथ ही अनावश्यक बर्बादी से बचने पर भी जोर दिया गया है.
शिमला की वास्तविक करीब 50 MLD
फिलहाल शहर में रोजाना मात्र 27.73 एमएलडी पानी ही सप्लाई हो पा रहा है, जबकि सामान्य दिनों में यह आंकड़ा 43 एमएलडी तक रहता है. शिमला की वास्तविक आवश्यकता करीब 50 एमएलडी है. इस अंतर की वजह से निगम को सिर्फ एक घंटे की सप्लाई देनी पड़ रही है. लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में पानी देने के बावजूद उसकी कमी होना उनकी नियति बन चुका है.
शहर को पानी गुम्मा, गिरी, चुरट, सियोग, चायरह और कोटि ब्रांडी परियोजनाओं से मिलता है. हर साल बरसात में इन परियोजनाओं में गाद जमा हो जाती है, जिससे पानी का संकट खड़ा हो जाता है. यही नहीं, गर्मियों में जल स्रोत सूखने और सर्दियों में पाइपलाइन के जमने से भी लोग पानी की समस्या से जूझते हैं.
24 घंटे पानी की सप्लाई पर उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिक निगम के 24 घंटे पानी सप्लाई के दावों पर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि जब बरसात में पानी की बहुलता होती है, तब भी शहर में बूंद-बूंद को लोग तरसते हैं. ऐसे में निगम के वादे खोखले साबित हो रहे हैं.
प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि गाद हटाने और सप्लाई बहाल करने का काम तेजी से जारी है और जल्द ही स्थिति सामान्य की जाएगी. लेकिन शिमला के लोगों के लिए पानी की यह समस्या अब एक स्थायी संकट बन चुकी है, जिससे हर मौसम में उन्हें जूझना पड़ता है.
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL






















