हिमाचल में नौतोड़ वन भूमि मामले में फिर राज्यपाल से मिले राजस्व मंत्री, क्या है पूरा विवाद?
नौतोड़ जमीन मामले में कैबिनेट से प्रस्ताव पास कर हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने करीब दो साल पहले राज्यपाल को मंजूरी के लिए भेजा था. ये मामला अभी भी लंबित है.

Himachal Pradesh News: हिमाचल के नौतोड़ मामले को लेकर राजभवन और सरकार के बीच खींचतान चल रही है. वास्तव में सुक्खू सरकार ने क़रीब दो साल पहले राज्यपाल को नौतोड़ जमीन देने को लेकर कैबिनेट से प्रस्ताव पास कर भेजा था. जिसके तहत 20 बीघा से कम या भूमिहीन 13 हज़ार के करीब लोगों को नौतोड़ जमीन देने का मामला है.
कबायली क्षेत्र के लोगों को इस तरह नौतोड़ जमीन देने की शक्तियां राज्यपाल के पास हैं, लेकिन राज्यपाल ने ये कह कर प्रस्ताव को रोका था कि सरकार से कुछ आपत्तियां मांगी गई थी जो अभी तक नहीं मिली है.
मंत्री जगत सिंह नेगी का राज्यपाल पर निशाना
गुरुवार को राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी छठी बार नौतोड़ मामले को लेकर राज्यपाल से मिले. उन्होंने राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से राजभवन पहुंच कर मुलाकात की. उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में जनजातीय क्षेत्र तथा सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को इसका लाभ मिलेगा. राजभवन से मांग उठाई गई है कि फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट 1980 में कम से कम कम दो साल की छूट देने के लिए इस एक्ट को निरस्त किया जाए.
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा, ''पिछली बार जब मामला स्वीकृति के लिए राजभवन भेजा गया था तो उसे राजभवन ने कुछ त्रुटियों पर स्पष्टीकरण मांगा था. जो सरकार की तरफ़ से दे दिया गया है. अब उम्मीद है कि राज्यपाल लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए छूट देने की स्वीकृति प्रदान करेंगे.''
क्या है वन संरक्षण अधिनियम 1980?
पहले भी तीन बार राज्यपाल FCA (Forest Conservation Act 1980) को निलंबित कर छूट दे चुके हैं. वर्तमान सरकार भी दो साल के लिए छूट मांग रही है ताकि बॉर्डर किनारे रह रहे लोगों के पलायन को रोका जा सके. इस मामले को लेकर राजस्व मंत्री पांच बार राज्यपाल से मिल चुके हैं लेकिन आज तक इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली है.
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Source: IOCL






















