भीषण गर्मी में धधक रहे हिमाचल के जंगल, बेजुबानों की आफत में जान, 3300 हेक्टेयर जमीन खाक
Himachal Pradesh Forest Fire: सोलन में 125 हेक्टेयर वन भूमि पूरी तरह से आग की भेंट चढ़ चुकी है. ऊना में 25 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में हैं. हमीरपुर के 21 वन बीट में आग लगने की घटनाएं आई हैं.

हिमाचल प्रदेश में जंगल धू-धू कर जल रहे हैं. राज्य में वनों में आग की 15 अप्रैल से लेकर 28 मई तक 263 घटनाएं सामने आ चुकी हैं. 3300 हेक्टेयर भूमि में आग लगी है. इस वर्ष आग से 28 मई तक लगभग 82 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है.
हिमाचल की राजधानी शिमला से लेकर प्रदेश के जंगलों के हिस्सों में आग की लपटें नजर आ रही हैं. सोलन के जंगलों में लग रही आग का असर कालका-शिमला रेललाइन पर भी देखने को मिला. बुधवार को आग के चलते सनवारा के समीप दो रेलगाड़ियां करीब ढाई घंटा एक जगह खड़ी रहीं.
रेलवे ट्रैक के आसपास आग लगने के कारण दोनों ट्रेनों को रोक दिया गया. इस दौरान रेलवे बोर्ड की टीमों के अलावा वन विभाग, अग्निशमन विभाग की टीमें मौके पर पहुंची और उन्होंने आग पर काबू पाया.
सोलन के बाद बिलासपुर के जंगलों में आग
दो दिन पहले शिमला के कोटखाई के शिलड़ू गांव के पास जंगल में भीषण आग लग गई. आग रिहायशी इलाके तक पहुंच गई थी. शिलड़ू गांव के पास जंगल के साथ स्थित काली माता मंदिर भी पूरी तरह जलकर राख हो गया. बिलासपुर के कई वन क्षेत्रों में बुधवार रात से लेकर भड़की आग ने भारी तबाही मचाई.
आग की चपेट में आने से बहुमूल्य वन संपदा राख हो गई है. जुखाला क्षेत्र के मंगरोट जंगल में बुधवार देर रात को अचानक आग भड़क उठी. वन विभाग की टीम ने आग पर काबू पा लिया.
सोलन में 125 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में
जिला मुख्यालय सोलन और उसके आसपास के पहाड़ी इलाकों में भड़की जंगलों की आग थमने का नाम नहीं ले रही. बीते एक सप्ताह से जारी इस भीषण आग की चपेट में आने से कई जंगल धधके हैं. डगशाई, देवठी और शमलेच के जंगल में उठती तेज लपटें और धुआं दूर-दूर से देखा जा रहा है.
वन विभाग के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, जिला मुख्यालय के करीब 125 हेक्टेयर वन भूमि पूरी तरह से आग की भेंट चढ़ चुकी है. ऊना जिले में करीब 25 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आ चुके हैं. इससे एक पशुशाला आग की चपेट में आकर जलकर राख हो गई.
केवल हमीरपुर में 21 बीटों में आग
हमीरपुर में इस फायर सीजन में विभिन्न क्षेत्रों की 21 बीटों में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. सबसे अधिक नुकसान वन बीट कुठेड़ा में हुआ है. यहां पर फायर सीजन से पहले काटे गए 400 पेड़ के स्लीपर जलकर राख हो गए. चंबा में पिछले दिनों बनीखेत के बौंखरी मोड़ गांव में एक पाइप के गोदाम में अचानक भीषण आग लगी.
धुएं के गुबार उठने लगे और पूरा गोदाम जलकर राख हो गया. कुल्लू की ऊझी घाटी में स्थित नग्गर के जंगल में 26 मई को देर रात आग भड़की थी. इसके कारण देवदार और काईल के छोटे पौधे झुलस गए. दमकल विभाग की टीम नग्गर से दस मिनट पैदल चलकर मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने में सफल रही थी.
मंडी, धर्मशाला, नाहन ज्यादा प्रभावित
सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में मंडी, धर्मशाला, नाहन और अन्य वन मंडल हैं. वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल लगभग 3310.22 हेक्टेयर क्षेत्र आग से प्रभावित हुआ, जिसमें लगभग 2,830.21 हेक्टेयर प्राकृतिक वन क्षेत्र है. इसके अलावा पौधरोपण क्षेत्र और अन्य भूमि भी प्रभावित हुई है.
शिमला के जंगल में लगातार लग रही आग
शिमला के जंगलों में आग लगने का सिलसिला लगातार जारी है, जिससे बहुमूल्य वन संपदा को नुकसान पहुंच रहा है और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. टुटीकंडी स्थित मानसिक रोगी अस्पताल के पास भी आग लगने की घटना सामने आई. आग पर एक बार काबू पा लिया था लेकिन रात को फिर भड़क गई.
वहीं, शिमला बाग गांव के समीप वीरवार को जंगल में लगी आग से वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा. इसके अलावा जुन्गा के जंगलों में भी गुरुवार सुबह आग भड़क उठी, जो काफी क्षेत्र में फैल गई. वहीं रझाना के जंगलों में पिछले दो दिनों से लगी आग पर अब जाकर काबू पाया जा सका है.
पांजड़ी क्षेत्र में भी आग लगने की घटना सामने आई. टुटीकंडी से सटे पांजड़ी के कब्रिस्तान क्षेत्र में अचानक आग भड़क उठी. वन विभाग को दोपहर 2 बजे सूचना मिलने के बाद टीम मौके पर पहुंची और दमकल विभाग के साथ मिलकर आग बुझाने का कार्य शुरू किया. इस घटना में कब्रिस्तान की लगभग 0.10 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई.
ऐसी जगह आग लगती है जहां गाड़ी पहुंचना मुश्किल
राजस्व मंत्री जगत नेगी ने बताया कि चीड़ के जंगलों में मुख्य रूप से आग लगती है. इसके अलावा थोड़े से घास की लालच में लोग जंगलों को आग के हवाले कर देते हैं. सरकार ने बार -बार हेलीकॉप्टर के लिए बात कही है, हिमाचल में पानी की कमी नहीं है लेकिन ऐसी जगह पर आग लग जाती है जहां गाड़ी नहीं पहुंच पाती. ऐसे में हेलीकॉप्टर जरूरी है. कसौली में आर्मी एरिया तक आग पहुंची तो एयर फोर्स ने आग पर काबू पाया.
जंगलों में आग के मामले
वर्ष 2026-27 : 263 मामले अभी तक
वर्ष 2025-26 : 561 मामले
वर्ष 2024-25 : 2613 मामले
वर्ष 2023-24 : 2938 मामले
वन विभाग ने लोगों से जंगलों के आसपास आग न जलाने, सिगरेट और जलती वस्तुएं खुले में न फेंकने तथा किसी भी आगजनी की सूचना तुरंत प्रशासन को देने की अपील की है.

























