Himachal News: हिमाचल में सुक्खू सरकार का बड़ा फैसला, अयोग्य घोषित विधायकों की बंद होगी पेंशन
Himachal Budget Session: हिमाचल सरकार ने 'हिमाचल प्रदेश विधानसभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) संशोधन विधेयक, 2026' पारित किया. दल-बदल करने वाले विधायकों को अब पेंशन नहीं मिलेगी.

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने एक अहम विधेयक पारित किया है. विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद 'हिमाचल प्रदेश विधानसभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) संशोधन विधेयक, 2026' को सदन की मंजूरी मिल गई है. इस नए कानून के तहत यदि किसी विधायक को दल-बदल के चलते (संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत) अयोग्य घोषित किया जाता है, तो उसे भविष्य में पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा. यह संशोधन 1971 के मूल अधिनियम में किया गया है.
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस संशोधन को जनादेश और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जरूरी बताया. उन्होंने सदन में कहा कि मौजूदा कानून में दल-बदल जैसी प्रवृत्तियों को रोकने के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं था. मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर धनबल और ईडी का दुरुपयोग कर सरकार गिराने की साजिश रचने का आरोप लगाया. सुक्खू ने कहा कि भविष्य में 'लोकतंत्र न बिके', इसी मकसद से यह बिल लाया गया है.
विपक्ष का पलटवार
इस बिल का कड़ा विरोध करते हुए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इसे राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया. विपक्ष का तर्क है कि अयोग्य घोषित होने के बाद विधायकों को पहले ही सदस्यता रद्द होने की सजा मिल चुकी है.
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि यह बिल केवल दो पूर्व विधायकों को टारगेट करने के लिए लाया गया है. उन्होंने चेतावनी दी कि यह मामला कोर्ट में जाएगा और सरकार की फजीहत होगी. विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार बिना विचार किए और दुर्भावना से काम कर रही है.
इन 2 पूर्व विधायकों की छिनेगी पेंशन
इस विधेयक के पारित होने का सीधा असर गगरेट के पूर्व विधायक चैतन्य शर्मा और कुटलैहड़ के पूर्व विधायक देवेंद्र कुमार भुट्टो पर पड़ेगा. इन दोनों ने फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग और पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया था, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने इन्हें अयोग्य घोषित कर दिया था.
चूंकि ये दोनों पहली बार चुनकर विधानसभा पहुंचे थे, इसलिए इनकी पेंशन बंद हो जाएगी. वहीं, अन्य 4 बागी विधायक (सुधीर शर्मा, इन्द्र दत्त लखनपाल, राजेंद्र राणा और रवि ठाकुर) पहले भी सदन के सदस्य रह चुके हैं, इसलिए उनके पुराने कार्यकाल की पेंशन पर कोई संकट नहीं है. हालांकि, भविष्य में दल-बदल करने वाले हर विधायक पर यह कानून लागू होगा.
कितनी मिलती है पूर्व विधायकों को पेंशन?
अक्टूबर 2025 में हुई बढ़ोतरी के बाद, हिमाचल में पूर्व विधायकों को महंगाई भत्ते सहित प्रति माह लगभग 1.29 लाख रुपये पेंशन मिलती है. इसमें 50,000 रुपये मूल पेंशन और 169% महंगाई भत्ता शामिल है. इसके अलावा, 5 वर्ष से अधिक समय तक सदस्य रहने वालों को प्रत्येक अतिरिक्त वर्ष के लिए 1,000 रुपये प्रति माह की अतिरिक्त पेंशन दी जाती है.
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Source: IOCL



























