गुरुग्राम में शुरू हुआ हाई‑टेक डिलीवरी का नया दौर, अब ड्रोन और AI रोबोट आपके घर पहुंचाएंगे सामान
Gurugram News in Hindi: गुरुग्राम में ड्रोन और AI रोबोट की दुनिया की पहली डोरस्टेप डिलीवरी शुरू हुई है. अब हाई-टेक सिस्टम के तहत स्काईपोर्ट से 5 किलोमीटर के दायरे में सामान मिनटों में पहुंचेगा.

गुरुग्राम ने टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है. हरियाणा के गुरुग्राम में दुनिया की पहली Drone + AI Robot डोर स्टेप डिलीवरी सर्विस की शुरुआत हो चुकी है. जिसने भारत को ग्लोबल इनोवेशन मैप पर सबसे आगे ला खड़ा किया है. द्वारका एक्सप्रेसवे सेक्टर-102 से उड़ान भरते ड्रोन अब आसमान से सामान गिराएंगे और जमीन पर AI रोबोट आपके दरवाजे तक सुरक्षित डिलीवरी करेगा.
जानकारी के अनुसार, इस हाई-टेक सिस्टम के तहत स्काईपोर्ट से 5 किलोमीटर के दायरे में 10 किलो तक का सामान मिनटों में पहुंचाया जा सकेगा. भारतीय कंपनी Skye Air Drone और एक अमेरिकी टेक कंपनी की साझेदारी से शुरू हुई यह सेवा न सिर्फ डिलीवरी को तेज बनाएगी, बल्कि गिग वर्कर्स के जोखिम को भी कम करेगी. गुरुग्राम अब आधिकारिक तौर पर दुनिया का पहला AI-Drone डिलीवरी हब बन चुका है.
कैसे काम करेगी हाई-टेक सर्विस?
दिल्ली से सटा साइबर सिटी गुरुग्राम अब सिर्फ साइबर सिटी नहीं, बल्कि फ्यूचर सिटी बन चुका है. क्योंकि यहां से शुरू हुई है दुनिया की पहली ऐसी डोर स्टेप डिलीवरी, जिसमें न डिलीवरी बॉय होगा न ट्रैफिक का डर होगा. बल्कि आसमान से ड्रोन और जमीन पर AI रोबोट मिलकर आपके घर तक सामान पहुंचाएंगे. गुरुग्राम के सेक्टर-102 स्थित द्वारका एक्सप्रेसवे पर बने स्काईपोर्ट से इस हाई-टेक सर्विस का शुभारंभ हुआ है. जहां भारत की स्काई एयर ड्रोन और एक अमेरिकी कंपनी ने मिलकर इस अनोखी पहल की शुरुआत की है. इस सर्विस में ड्रोन 10 किलो तक का सामान स्काईपोर्ट से उड़ाकर सोसायटी के अराइवल बॉक्स तक पहुंचाएगा. फिर AI रोबोट उस सामान को सीधे आपके घर और ऑफिस के दरवाजे तक डिलीवर करेगा.
भविष्य की राह दिखाने वाला देश बना भारत
जानकारी के अनुसार, ड्रोन और रोबोट की ये जोड़ी बिल्कुल फिल्म शोले के जय और वीरू की तरह काम करेगी. सबसे बड़ी बात इस टेक्नोलॉजी से गिग वर्कर्स की जान जोखिम में डालकर तेज डिलीवरी करने के दबाव को भी कम किया जा सकेगा. भारत ने इस पहल के साथ दुनिया को दिखा दिया है कि टेक्नोलॉजी के मामले में अब हम सिर्फ पीछे चलने वाले नहीं, बल्कि भविष्य की राह दिखाने वाले देश बन चुके है.
Source: IOCL
























